तेजपत्ता का उपयोग, फायदा एवं तेजपत्ता की खेती

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तेजपत्ता का वैज्ञानिक नाम लॉरस नोबिलिस ( Laurus Nobilis ) है। यह एक सुगंधित पत्ता है, जो लॉरस ( Laurus ) परिवार से संबंधित है। खाने और औषधि में इसका उपयोग 1 हज़ार वर्षों से किया जा रहा है। आमतौर पर मसाले, एसेंशियल ऑयल व पारंपरिक चिकित्सा में प्रयोग होने वाले इस पत्ते की दो प्रजातियां प्रयोग की जाती हैं – लॉरस एजोरिका और एल नोबिलिस। तेजपत्ता का उपयोग इसके सूखने के बाद ही होता है। तेजपत्ता मसालों में सबसे अहम है। मसालों के अलावा तेजपत्ता आयुर्वेद के हिसाब से भी बहुत खास माना जाता है। केरल के स्पाइस गार्डन तो तेजपत्ते की सुंगध से महकते रहते हैं। इसके अलावा भारतीय तेजपत्ते एशिया के कई देशों में पहुंचाएं जाते हैं, लेकिन अगर आपको ये गलतफहमी है कि तेजपत्ता केवल भारत के एकाधिकार में है तो गलत है। इसकी पत्तियों में एक लौंग जैसी सुगंध होती है जिसमें चटपटा स्वाद होता है, उनका उपयोग औषधीय उद्देश्यों के लिए किया जाता है। 

तेजपत्ता में पाए जाने वाले पोषक तत्व ( Nutrients found in Bay leaves )

तेजपत्ता में आयरन ( Iron ), कॉपर ( Copper ), कैल्शियम ( Calcium ), मैग्नीशियम ( Magnesium ), मैंगनीज़ ( Manganese ), विटामिन ( Vitamin ) C, विटामिन A, विटामिन B6, राइबोफ्लेविन ( Riboflavin ), जस्ता ( Zinc ), फाइबर ( Fibber ), प्रोटीन ( Protein ) जैसे तत्व पाए जाते हैं।

तेजपत्ता के सेवन के स्वास्थवर्धक फायदे एवं उपयोग ( Health benefits and uses of Bay Leaf )

तेजपत्ता हर भारतीय रसोई में आपको आसानी से मिल जाएगा। यह ऐसा मसाला है, जिसका इस्तेमाल व्यंजनों में जायका और खुशबू बढ़ाने के लिए किया जाता है। ये पत्तियां कुछ हद तक यूकेलिप्टस की पत्तियों जैसी नजर आती हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि इसका इस्तेमाल कर कई शारीरिक बीमारियों से बचा सकता है। आयुर्वेद में इस औषधीय पत्ते के प्रयोग के कई लाभ बताए गए हैं।

1. मधुमेह की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए तेज पत्ते का सेवन लाभकारी होता है।

2. तेज पत्ता श्वसन तंत्र में आई सूजन और उससे पैदा होने वाली बीमारियों से बचाव कर सकता है।

3. मसूड़ों के टिश्यू में कसाव लाकर उन्हें स्वस्थ बनाए रख सकते हैं।

4. साथ ही तेज पत्ते से बनने वाली राख से मंजन करने से मसूड़े मजबूत हो सकते हैं। तेज पत्ता मुंह में बैक्टीरिया को पनपने से भी रोक सकता है।

5. तेज पत्ता के गुण पेट के कैंसर से बचाव करते हैं।

6. दर्द व सूजन के लिए भी तेज पत्ते के फायदे बहुत हैं।

7. तेज पत्ता एंटीफंगल गुणों से भी समृद्ध होता है। त्वचा संबंधी फंगल संक्रमण के लिए तेज पत्ते का एसेंशियल ऑयल इस्तेमाल में लाया जाता है।

8. तेज पत्ता घाव को बेहतर रूप से भरने में मदद करता है।

9. तेजपत्ता वजन को नियंत्रित रखता है। 

10. तेजपत्ता किडनी की समस्याओं से राहत दिलाता है।

11. कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम करने के लिए भी तेज पत्ते का इस्तेमाल किया जाता है।

12. तेजपत्ता के सेवन से हृदय की कार्यप्रणाली ठीक रहती है।

13. तेजपत्ता का उपयोग सेहत व त्वचा के साथ-साथ बालों के लिए भी किया जाता है।

तेजपत्ता की खेती ( Bay Leaf Cultivation )

तेजपत्ता एक मसाले वाली फसल है। इसका उपयोग खाने को स्वादिष्ट बनाने के लिए किया जाता है। इसकी व्यवसायिक खेती करके किसान जबरदस्त मुनाफा कमा सकते हैं। तेजपत्ता की खेती करने में लागत और मेहनत दोनों ही बहुत कम लगती है। इसके पौधे को एक बार लगाने के बाद कई सालों तक पैदावार ले सकते हैं। 

तेजपत्ता की खेती के लिए मिट्टी और जलवायु ( Soil and Climate for Bay Leaf Cultivation )

तेजपत्ता की खेती के लिए उष्ण और ठंडी जलवायु की आवश्यकता होती है। खेती के लिए उपजाऊ भूमि उपयुक्त होती है। भूमि का पीएच मान 6-8 के बीच होना चाहिए। 

तेजपत्ता की खेती की तैयारी एवं बुवाई ( Preparation and Sowing of Bay Leaf Cultivation )

तेजपत्ता की खेती के लिए पानी की उचित व्यवस्था होनी चाहिए। पौधे की रोपाई करते समय पौधे से पौधे की दूरी 4 से 6 मीटर रखनी चाहिए। फसल को बहुत ही कम सिंचाई की आवश्यकता होती है। रोग और कीट से बचाने के लिए प्रति सप्ताह नीम के तेल का छिड़काव करना चाहिए। पौधे व पौधशाला के पौधे लगाने से पहले खेत से खरपतवार साफ़ कर लेना चाहिए. फिर खेत की अच्छी प्रकार जुताई कर मिट्टी को भुरभुरा व समतल बना लेना चाहिए।

तेजपत्ता की उन्नत किस्में ( Improved Varieties of Bay Leaf )

तेजपत्ता की 2400 से 2500 प्रजातियां हैं जिसमें से अधिकतर पूर्वी एशिया, दक्षिण व उत्तरी अमेरिका और एशिया में पाई जाती हैं। प्रजाति के अनुसार सभी के रासायनिक घटक अलग-अलग हो सकते हैं। अतः स्थानीय किस्म ही पौध लगाने के काम में ली जाती है। प्रजाति के अनुसार सभी के रासायनिक घटक अलग-अलग हो सकते हैं। भारत के बहुत से पहाड़ी हिस्सों में तेजपत्ते की खेती की जाती है और सबसे ज्यादा खपत भी हमारे देश में ही होती है।

तेजपत्ता की खेती में रोग उपचार ( Disease Treatment in Bay Leaf Cultivation )

तेजपत्ता की फसल को रोग और कीट से बचाने के लिए प्रति सप्ताह नीम के तेल का छिड़काव करना चाहिए।

तेजपत्ता की खेती में सिंचाई एवं खाद उर्वरक ( Irrigation and Manure Fertilizer in Bay Leaf Cultivation )

तेजपत्ता की फसल को बहुत ही कम सिंचाई की आवश्यकता होती है। रोपाई के बाद किसी विशेष प्रक्रिया की आवश्यकता नही है। केवल निराई-गुड़ाई करने की आवश्यकता पड़ती है। पहले दो वर्षों तक वर्ष में चार बार तथा बाद में एक वर्ष में केवल दो बार निराई करना आवश्यक है। निराई के बाद पौधे के आधार पर मिट्टी चढ़ाना पौधे के विकास में सहायक रहता है। पौधे के विकास के लिए खाद एवं उर्वरक देना आवश्यक है। पहले वर्ष हर पौधे को 25 ग्राम नाइट्रोजन 20 ग्राम फ़ॉस्फोरस तथा 25 ग्राम पोटाश देना चाहिए, फिर धीरे-धीरे हर साल इस मात्रा को बढ़ाकर दस साल में, जब पौधे का पूर्ण विकास हो जाता है। 

तेजपत्ता की खेती करने वाले राज्य ( Bay Leaf Cultivating States )

तेजपत्ता की खेती भारत में मेघालय, अरुणाचल प्रदेश,नागालैंड, केरल, कर्नाटक, बिहार समेत पूर्वी उत्तर भारत के पहाड़ी इलाकों में खूब की जाती है। भारत के बहुत से पहाड़ी हिस्सों में तेजपत्ते की खेती की जाती है और सबसे ज्यादा खपत भी हमारे देश में ही होती है।

तेजपत्ता की खेती में लागत एवं कमाई ( Cost and Earning in Bay Leaf Cultivation )

अगर तेजपत्ता के 25 पौधे लगाते हैं तो आपको सालाना 75 हजार से 1 लाख 25 हजार तक कमाई हो सकती है। ज्‍यादा पौधे लगाएंगे तो आपकी कमाई भी बढ़ेगी।

तेजपत्ता की खेती के लिए सरकार अनुदान देती है ( The Government Gives Grants for the Cultivation of Bay Leaf )

सरकार औषधीय और बागवानी फसलों को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय बागवानी मिशन की तहत अनुदान भी देती है। आप राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड की वेबसाइट का अवलोकन करते रहे हैं। जानकारी के लिए आप अपने जिले के उद्यान विभाग और कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करें।

आप शबला सेवा की मदद कैसे ले सकते हैं? ( How Can You Take Help of Shabla Seva? )

  1. आप हमारी विशेषज्ञ टीम से खेती के बारे में सभी प्रकार की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
  2. हमारे संस्थान के माध्यम से आप बोने के लिए उन्नत किस्म के बीज प्राप्त कर सकते हैं।
  3. आप हमसे टेलीफोन या सोशल मीडिया के माध्यम से भी जानकारी और सुझाव ले सकते हैं।
  4. फसल को कब और कितनी मात्रा में खाद, पानी देना चाहिए, इसकी भी जानकारी ले सकते हैं।
  5. बुवाई से लेकर कटाई तक, किसी भी प्रकार की समस्या उत्पन्न होने पर आप हमारी मदद ले सकते हैं।
  6. फसल कटने के बाद आप फसल को बाजार में बेचने में भी हमारी मदद ले सकते हैं।

संपर्क

अधिक जानकारी के लिए हमसे संपर्क करें +91 9335045599 ( शबला सेवा )

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