चुकंदर का उपयोग, फायदा एवं चुकंदर की खेती

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चुकंदर ( Beetroot ) सुपरफूड के नाम से भी जाना जाता है। चुकंदर एक जड़ वाला वनस्पति पौधा है। यह बीटा वल्गैरिस नामक जाति के पौधे होते हैं जिन्हें मनुष्यों ने शताब्दियों से कृषि में पाला है और कई नस्लों में विकसित करा है। इसकी जड़ हल्की मीठी होती है और उसका रंग लाल, जामुनी, पीला या श्वेत होता है। गर्मियों के मौसम में सेहत का ख्याल रखना बहुत जरूरी है।। चुकंदर को मीठी सब्जी भी कह सकते है, क्योकि इसका स्वाद खाने में हल्का मीठा होता है। चुकंदर एक ऐसी सब्जी है जिसे स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभदायक माना जाता है। 

चुकंदर का उपयोग और चुकंदर में पाए जाने वाले पोषक तत्व ( Uses of Beetroot and Nutrients Found in Beetroot )

चुकंदर में हाई न्यूट्रिशन वेल्यू, पानी और जीरो फैट जैसी खूबियां है, इसके सेवन से पानी की कमी को पूरा किया जा सकता है। चुकंदर को कई तरह से इस्तेमाल कर सकते हैं, जिन लोगों को सलाद में या कच्चा चुकंदर खाना पसंद नहीं है, वो इसे जूस के रूप में इस्तेमाल कर सकते है। चुकंदर आयरन (Iron) का अच्छा स्रोत है। चुकंदर में सोडियम (Sodium), पोटैशियम (Potassium) , फॉस्फोरस (Phosphorus) , कैल्शियम (Calcium), सल्फर (Salfer), क्लोरीन (Chlorine), आयोडीन (Iodine), विटामिन (Vitamin) B1, विटामिन B2 और विटामिन C भरपूर मात्रा में होता है। चुकंदर में अनेक प्रकार के पोषक तत्व मौजूद होते है, जो मानव शरीर के लिए काफी लाभदायक होते है।

चुकंदर के स्वास्थ्वर्धक फायदे ( Health Benefits of Beetroot )

चुकंदर खाने से बहुत लाभ होता है, जैसे यह एक गुणकारी खाद्य पदार्थ है। इसका सेवन रोजाना करने से रक्त शर्करा संतुलित हो जाती है, जिससे डायबिटीज (Diabetes)  के मरीजों के लिए यह फायदेमंद होता है।

    • चुकंदर के जूस का सेवन करने से बीपी को कम व ब्लड प्रेशर के स्तर को कम करने में मदद करता है।
    • चुकंदर कैल्शियम का अच्छा स्रोत है। चुकंदर खाने के लाभ में न सिर्फ हड्डियों, बल्कि दांतों को भी मजबूती प्रदान करता है।
    • चुकंदर में बीटा कैरोटीन पाया जाता है, जो आंखों की रोशनी को तेज करने में मदद करता है।
    • चुकंदर में आयरन काफी अच्छी मात्रा में होता है, जिससे शरीर में खून की कमी पूरी होती है, और एनीमिया की समस्या से बचाव होता है।

चुकंदर की खेती ( Beetroot Cultivation )

चुकंदर की खेती के लिए 50 किलो यूरिया, 70 किलो डी.ए.पी यानि डाई-एमोनियम फॉस्फेट और 40 किलो पोटाश प्रति एकड़ मिलाएं। खेत में जैविक खाद डालने से अच्छे परिणाम मिलते हैं और चुकंदर को उसके अधिकतम आकार तक बढ़ने में मदद मिलती है। मिट्टी में बोरॉन ना हो इसका पहले ही परीक्षण कर लेना चाहिए क्योंकि इसकी उपस्थिति से जड़े कमज़ोर या टूट सकती हैं। इससे बचने के लिए मिट्टी में बोरिक एसिड या बोरेक्स मिलाया जाता है।

चुकंदर की खेती के लिये मिट्टी, तापमान एवं जलवायु ( Soil, Temperature and Climate for Beetroot / Sugar Beet Cultivation )

चुकंदर की खेती के लिए सबसे अच्छी मिट्टी बलुई दोमट होती है। अच्छी फसल के लिए मिट्टी का पीएच 6-7 के बीच होना चाहिए। बलुई दोमट मिट्टी उपलब्ध ना हो तो आप दोमट मिट्टी या लवणीय मिट्टी भी उपयुक्त होती है। चुकंदर की खेती के लिए बुवाई का समय सम जलवायु में माना जाता है, यानि कि ना तो ज्यादा गर्मी हो और ना ही ज्यादा सर्दी हो इसलिए सबसे अच्छा और लाभदायक समय अक्टूबर का महीना रहता है। चुकंदर की खेती को करने के लिए बलुई दोमट मिट्टी की आवश्यकता होती है। 

चुकंदर की खेती की तैयारी और बुवाई का समय ( Preparation and Sowing Time for Sugar Beet or Beetroot Cultivation )

देश की जलवायु के हिसाब से चुकंदर की खेती का सबसे अच्छा समय अक्टूबर के पहले हफ्ते से लेकर जनवरी फरवरी तक होता है। बुवाई का समय सम जलवायु में माना जाता है यानी ना तो ज्यादा गर्मी हो और ना ही ज्यादा सर्दी हो इसलिए सबसे अच्छा और लाभदायक समय अक्टूबर का महीना रहता है। खेत तैयार करते हुए सबसे पहली बार गहरी जुताई करें और उसके बाद 2-3 बार हल्की जुताई करें। किसी भी फसल के लिए उपयुक्त खाद होना अत्यंत आवश्यक है। चुकंदर की अच्छी फसल के लिए खेत तैयार करते समय प्रत्येक एकड़ में कम से कम 4 टन गोबर की खाद मिलाएं। खाद डालने के बाद बीज बोने से पहले थोड़ी-थोड़ी दूरी पर क्यारियां बना लें ताकि बीजारोपण में सुविधा हो। बसंत के मौसम के शुरुआती दौर में बीजारोपण का पहला चक्र शुरू कर दें और मध्य गर्मियों तक हर 2 से 3 हफ्ते के दौरान लगातार बीजारोपण करें। बीज बुवाई के समय मिट्टी में नमी की मात्रा, बोने का समय और बीज की जाति पर यह निर्भर करता है कि आपको कितने बीज की आवश्यकता है। एक अंकुर वाली जाति में 4-6 किलो और बहु अंकुर वाली किस्मों में 10-12 किलो ग्राम बीज प्रति हेक्टेयर की आवश्यकता पड़ती है। बोने से पहले चुकंदर के बीजों को 12 घंटे तक भिगोना चाहिए। यह क्रिया अंकुरण की प्रक्रिया को तेज करती है। चुकंदर को वहां लगाना चाहिए जहां किसी दूसरे पेड़ की जड़ें ना फैली हों और ना ही साथ में कोई दूसरी फसल लगी हो क्योंकि इसकी जड़े 36 से 48 इंच की गहराई तक पहुंच सकती हैं। 

चुकंदर की उन्नत किस्में ( Improved Varieties of Sugar Beet or Beetroot )

डेट्रॉइट डार्क रेड, क्रिमसन ग्लोब, अर्ली वंडर, मिस्त्र की क्रॉस्बी, रूबी रानी 

चुकंदर की बीज की मात्रा, बीज उपचार, रोग एवं कीट प्रबंधन ( Beetroot Seed quantity, Seed Treatment, Disease and Pest Management )

एक एकड़ ज़मीन के लिए 40,000 पौधे इस्तेमाल करें। एक जगह पर एक ही पौधा लगाएं, साथ में बीज का उपचार करें। फसल को रोग लग जाए तो उचित मात्रा में केमिकल का छिड़काव कर फसल को बचाया जा सकता है। रेड स्पाइडर, एफिड्स, फ्ली बीटल और लीफ खाने वाले जैसे कीटों को 2 मिलीलीटर मैलाथियान 50 ईसी प्रति 1 लीटर पानी का छिड़काव करके नियंत्रित किया जा सकता है।

चुकंदर की सिंचाई और उर्वरक प्रबंधन ( Sugar beet/Beetroot Irrigation and Fertilizer Management )

चुकंदर को बहुत ज़्यादा सिंचाई की आवश्यकता नहीं पड़ती है। बरसात का मौसम है तो यह आवश्यकता और भी कम हो जाती है। फसल बोने के शुरुआती 15 दिनों में पहली सिंचाई और उसके 5 दिन बाद दूसरी बार सिंचाई कर दें। यदि बरसात नहीं हो रही है तो 8-10 दिन के अंतराल में सिंचाई करें। क्यारियों में जल जमा ना हो जाए। सिंचाई सही ढंग से की जाए तो इससे जड़ का विकास होता है, तेजी से विकास होता है और अच्छी उपज भी मिलती है। ड्रिप इरिगेशन सिस्टम बेहतर तरीका है और फायदेमंद साबित होता है। फसल को तैयार होने में 3 से 4 महीने का समय लगता है। खुदाई से करीब 15 दिनों पहले सिंचाई का कार्य बंद कर दें।

चुकंदर के उत्पादक राज्य ( Beetroot Producing States )

भारत में चुकंदर की खेती उत्तराखण्ड, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, के राज्यों में की जाती है।

चुकंदर की खेती में लगत और कमाई ( Cost and Earning in Beetroot Cultivation )

शबला सेवा संस्थान के संस्थापक डॉ अविनाश कुमार के अनुसार अगर चुकंदर की खेती एक एकड़ में की जाये तो औसतन 200 से 300 क्विण्टल की उपज प्राप्त होती है बाजार में इसकी कीमत 30 से 40 रूपये किलो बेचा जाता है इस तरह से देखा जाये तो किसान एक एकड़ में खेती करके 2 से 3 लाख रूपये तक की कमाई कर सकते है। खेती के बाद कम से कम 2-3 महीने में चुकन्दर की औसतन 30-40 क्विंटल प्रति हैक्टेयर जड़ों की प्राप्ति हो जाती है। किसानों को 20 रूपए से लेकर 50 रूपये प्रति किलो की दर से उनकी उपज की कीमत मिल जाती है। अक्टूबर में खेती वाले किसान अच्छा लाभ कमा सकते हैं क्योंकि उसके बाद के फरवरी तक इसकी मांग रहती है। हालांकि अपने गुणों के कारण यह लगभग सालभर मांग में रहता है इसलिए उपयुक्त वातावरण तैयार कर कभी भी इसकी खेती की जा सकती है। 

आप शबला सेवा की मदद कैसे ले सकते हैं? ( How Can You Take Help of Shabla Seva? )

  1. आप हमारी विशेषज्ञ टीम से खेती के बारे में सभी प्रकार की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
  2. हमारे संस्थान के माध्यम से आप बोने के लिए उन्नत किस्म के बीज प्राप्त कर सकते हैं।
  3. आप हमसे टेलीफोन या सोशल मीडिया के माध्यम से भी जानकारी और सुझाव ले सकते हैं।
  4. फसल को कब और कितनी मात्रा में खाद, पानी देना चाहिए, इसकी भी जानकारी ले सकते हैं।
  5. बुवाई से लेकर कटाई तक, किसी भी प्रकार की समस्या उत्पन्न होने पर आप हमारी मदद ले सकते हैं।
  6. फसल कटने के बाद आप फसल को बाजार में बेचने में भी हमारी मदद ले सकते हैं।

संपर्क

अधिक जानकारी के लिए हमसे संपर्क करें +91 9335045599 ( शबला सेवा )

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