खीरा का उपयोग, फायदा एवं खीरा की खेती

खीरा (Cucumber) का वैज्ञानिक नाम कुकुमिस सैटिवस (Cucumis sativus) है। खीरा जायद की एक प्रमुख फसल है। सम्पूर्ण विश्व में सलाद के रूप में खीरे का विशेष महत्त्व है। खीरे को सलाद के अतिरिक्त उपवास के समय फलाहार के रूप में भी प्रयोग किया जाता है। इससे विभिन्न प्रकार की मिठाइयाँ भी तैयार की जाती हैं। यह कई स्‍वास्‍थ्‍य संबंधित समस्‍याओं के उपचार हेतु भी प्रयोग किया जाता है। लगभग 3,000 वर्षों से उगाए जाने वाले इस खीरे की उत्पत्ति भारत से हुई है। यह कई स्‍वास्‍थ्‍य संबंधित समस्‍याओं के उपचार हेतु भी प्रयोग किया जाता है। खीरा की उत्पत्ति भारत में हुई जहां एक बड़ी आनुवंशिक विविधता देखी गई है। यह चीन सहित पश्चिमी एशिया में कम से कम 3000 वर्षों से खेती की जाती है और पहले ग्रीस और इटली में यूरोप में फैल गई थी।

खीरा में पाए जाने वाले पोषक तत्व ( Nutrients Found in Cucumber )

खीरा में 80% पानी के साथसाथ फाइबर ( Fiber ), मैग्नीशियम ( Magnesium ), कैल्शियम ( Calcium ), फास्फोरस ( Phosphorus ) और पोटैशियम ( Potassium ) जैसे पोषक तत्वों से भरपूर होता है। इसके अलावा इसमें विटामिन ( Vitamin ) B, विटामिन A, और एंटीऑक्सीडेंट ( Antioxidant ) की विस्तृत श्रृंखला भी होती है, जिससे शरीर को कई प्रकार के लाभ हो सकते हैं।

खीरा के उपयोग एवं स्वास्थ्वर्धक फायदे ( Uses and Health benefits of Cucumber )

खीरा कब्ज दूर करता है। खीरा पीलिया, प्यास, बुखार, शरीर की जलन, गर्मी के सभी दोष, चर्म रोग में लाभकारी होता है। खीरे का रस पथरी में लाभकारी होता है। पेशाब में जलन, रुकावट और मधुमेह में भी यह लाभकारी है। घुटनों के दर्द से निजात पाने के लिए खाने में खीरा अधिक मात्रा में खाएं।  खीरा, मधुमेह को नियंत्रित करने और इसके जोखिमों की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसमें ऐसे पदार्थ होते हैं जो रक्त शर्करा को कम करने में भी मदद कर सकते हैं। इसके अलावा खीरा में पाया जाने वाला पोटैशियम और मैग्नीशियम, इसे हृदय रोगियों के लिए उपयुक्त आहार बनाता है। खीरे के बीजों का प्रयोग तेल निकालने के लिए किया जाता है जो शरीर और दिमाग के लिए बहुत बढ़िया है| खीरे में 80% पानी होता हैं, जो गर्मी के मौसम में अच्छा होता है|

खीरा की खेती (Cucumber Cultivation)

 कद्दूवर्गीय फसलों में खीरा का अपना एक अलग ही महत्वपूर्ण स्थान है। इसका उत्पादन देश भर में किया जाता है। गर्मियों में खीरे की बाजार में काफी मांग रहती है। कटाई के लिए तेज़ चाकू या किसी और नुकीली चीज़ का प्रयोग करें|

खीरा की खेती में मिट्टी, तापमान एवं जलवायु ( Soil, Temperature and Climate in Cucumber Cultivation )

खीरा बलुई दोमट और भारी मिट्टी में भी उगाया जा सकता है, लेकिन इसकी खेती के लिए रेतीली और दोमट मिट्टी, जिसमें जल निकास अच्छा हो, अच्छी होती है। खीरे की खेती के लिए मिट्टी का पीएच मान 6 से 7 के बीच होना चाहिए। उच्च तापमान में इसकी खेती अच्छी होती है। जबकि यह पाल बर्दाश्त नहीं कर सकता। इसलिए जायद तथा वर्षा के मौसम में इसकी खेती करना बेहतर होता है।

खीरे की खेती के लिए बुवाई का समय एवं खेती की तैयारी ( Sowing Time and Preparation for Cultivation of Cucumber )

सबसे पहले खेत को तैयार करके 1.5 से 2 मीटर की दूरी पर लगभग 60-75 सेंटीमीटर चौड़ी नाली बना लें। इसके बाद नाली के दोनों ओर मेड़ के पास 1 मीटर के अंतर पर 3 से 4 बीज की एक स्थान पर बुवाई करते हैं। ग्रीष्म ऋतु के लिए इसकी बुवाई फरवरी और मार्च के महीनों में की जाती है। वर्षा ऋतु में इसकी बुआई जूनजुलाई में की जाती है तथा पहाड़ी क्षेत्रों में इसकी बुवाई मार्च और अप्रैल के महीनों में की जाती है। खेत को तैयार करने के लिए पहले मिट्टी पलटने वाले हल से जुताई करनी चाहिए, उसके बाद देशी हल से 2-3 जुताई करनी चाहिए। साथ ही 3 बार पाटा लगाकर मिट्टी को भुरभुरा कर समतल कर लेना चाहिए।

खीरा की उन्नत किस्में ( Improved Varieties of Cucumber )

देसी किस्में स्वर्ण अगेती, स्वर्ण पूर्णिमा, पूसा उदय, पूना खीरा, पंजाब चयन, पूसा संयोग, पूसा बरखा, खीरा 90, कल्याणपुर हरी खीरा, कल्याणपुर मध्यम और खीरा 75 आदि प्रमुख हैं।

नवीन किस्में – पूसा उदय, पीसीयूएच-1,  स्वर्ण पूर्णा और स्वर्ण शीतल आदि हैं।

संकर किस्में – प्रिया, पंत संकर खीरा-1,  संकर-1 एवं संकर-2 आदि प्रमुख हैं।

विदेशी किस्में – सेलेक्शन, जापानी क्लोव ग्रीन,  स्ट्रेट-8 और पॉइनसेट आदि प्रमुख हैं।

खीरा की खेती में बीज की मात्रा एवं बीज उपचार ( Seed Quantity and Seed Treatment in Cucumber Cultivation )

एक एकड़ खेत के लिए प्रति हेक्टेयर बुवाई हेतु 1.5  से 2.5 किग्रा. बीज की आवश्यकता होती है। बिजाई से पहले, फसल को कीटों और बीमारियों से बचाने के लिए और जीवनकाल बढ़ाने के लिए, अनुकूल रासायनिक के साथ उपचार जरूर करें। खीरे की खेती के लिए नवंबर के महीने में प्लास्टिक के गिलास में मिट्टी भरकर बीज अंकुरित करने के लिए डालते हैं। दो माह बाद खेतों में रोपाई की जाती है। बीज तैयार करने का यह वैज्ञानिक तरीका भरपूर उत्पादन देता है। खीरे की खेती से अच्छी आमदनी के लिए किसान हाइब्रिड प्रजाति को प्रमुखता देते हैं। 

खीरा की खेती में सिंचाई एवं उर्वरक प्रबंधन ( Irrigation and Fertilizer Management in Cucumber Cultivation )

गर्मी के मौसम में इसको बारबार सिंचाई की जरूरत होती है और बारिश के मौसम में सिंचाई की जरूरत नहीं होती है| इसको कुल 10 से12 सिंचाइयों की आवश्यकता होती हैं| बिजाई से पहले एक सिंचाई जरूरी होती है, इसके बाद 2 से 3 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें| दूसरी बिजाई के बाद, 4 से 5 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें| जायद में उच्च तापमान के कारण अपेक्षाकृत उच्च आर्द्रता की आवश्यकता होती है। इसलिए गर्मियों में हर हफ्ते हल्की सिंचाई करनी चाहिए। वर्षा ऋतु में सिंचाई वर्षा पर निर्भर करती है। खेत में पड़ी खरपतवार को फावड़े या कुदाल से निकाल देना चाहिए। वर्षा ऋतु की फसल के लिए जड़ों में मिट्टी लगानी चाहिए। जायद में उच्च तापमान के कारण अपेक्षाकृत अधिक नमी की आवश्यकता होती है इसलिए गर्मियों में हर हफ्ते हल्की सिंचाई करनी चाहिए। वर्षा ऋतु में सिंचाई वर्षा पर निर्भर करती है। खेत में खरपतवार को फावड़े या कुदाल से निकालना चाहिए। वर्षा ऋतु की फसल के लिए जड़ों में मिट्टी लगानी चाहिए। अच्छी उपज प्राप्त करने हेतु खेत तैयार करते समय प्रतिहेक्टेयर 25 से 30 टन गोबर की सड़ी खाद मिला देना चाहिए।

खीरा के उत्पादक राज्य ( Cucumber Producing States )

पश्चिम बंगाल में खीरा का वार्षिक उत्पादन में भारत में खीरे के उत्पादन 2021-22 में 20.32% हिस्सा लिया। मध्यप्रदेश में 2021-22 में दूसरे स्थान पर खीरे का वार्षिक उत्पादन 14.76% था। कर्नाटक, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में 60 हजार एकड़ में खीरे की खेती होती है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश, बिहार जैसे राज्यों में भी खीरे का उत्पादन होता है।

खीरा की खेती में लागत एवं कमाई ( Cost and Earning in Cucumber Cultivation )

अगर सही तरीके से की जाए तो खीरे की खेती काफी लाभदायक हो सकती है। बिजाई से 50 दिनों बाद पौधे पैदावार देनी शुरू कर देते हैं| इसकी 10-12 तुड़ाइयां की जा सकती हैं| खीरे की कटाई मुख्य तौर पर बीज के नर्म होने और फल हरे और छोटे होने पर करें| इसकी औसत पैदावार 45 क्विंटल प्रति एकड़ प्रति तुड़ाई होती हैं| खेत की जुताई से लेकर फसल की कटाई तक का खर्च ₹250000 तक लग जाता है। एक सीजन में खीरे की फसल 4 महीने में कटाई के लिए तैयार हो जाती है। 1 एकड़ में 450 क्विंटल तक खीरा प्राप्त होता है, जिससे उसे ₹900000 का मुनाफा होता है। इसकी कमाई प्रति किलो पर भी निर्भर करती है।

आप शबला सेवा की मदद कैसे ले सकते हैं? ( How Can You Take Help of Shabla Seva? )

  1. आप हमारी विशेषज्ञ टीम से खेती के बारे में सभी प्रकार की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
  2. हमारे संस्थान के माध्यम से आप बोने के लिए उन्नत किस्म के बीज प्राप्त कर सकते हैं।
  3. आप हमसे टेलीफोन या सोशल मीडिया के माध्यम से भी जानकारी और सुझाव ले सकते हैं।
  4. फसल को कब और कितनी मात्रा में खाद, पानी देना चाहिए, इसकी भी जानकारी ले सकते हैं।
  5. बुवाई से लेकर कटाई तक, किसी भी प्रकार की समस्या उत्पन्न होने पर आप हमारी मदद ले सकते हैं।
  6. फसल कटने के बाद आप फसल को बाजार में बेचने में भी हमारी मदद ले सकते हैं।
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