जीरा का उपयोग, फायदा एवं जीरा की खेती

जीरा एक ऐसा मसाला है जिसका उपयोग  हर भारतीय घर में खाने में तड़का लगाने के लिए किया जाता है। यह न सिर्फ खाने का स्वाद बढ़ाता है बल्कि सेहत को भी कई फायदे देता है। कुछ लोग जीरे का तड़का लगाते हैं तो कुछ लोग जीरा पाउडर सब्जी में डालते है। जीरे का उपयोग कोई भी सब्जी या दाल या फिर कोई भी व्यंजन बनाने में किया जाता है, इसके बिना सारे मसालों का स्वाद फीका लगता है। भूने हुए जीरे को छाछ, दही आदि में डालकर खाया जाता है। जीरा न सिर्फ आपके स्वाद को बढ़ाता है बल्कि इसका सेवन सेहत के लिहाज से भी काफी फायदेमंद होता है।

जीरे में पाये जाने वाले खनिज ( Minerals Found in Cumin )

जीरे में आयरन ( Iron ), कॉपर ( Copper ), कैल्शियम ( Calcium ), पोटैशियम ( Potassium ), मैंगनीज ( Manganese ), जिंक ( Zink ), मैग्नीशियम ( Magnesium ), विटामिन ( Vitamin ) A, विटामिन C, विटामिन E और B-कॉम्प्लेक्स( Complex )  जैसे तत्व पाए जाते हैं। इसके साथ ही जीरा एंटीऑक्सीडेंट ( Antioxidant ) गुणों से भी भरपूर होता है, इसलिए आयुर्वेद में इसके इस्तेमाल को स्वास्थ्य की दृष्टि से अच्छा बताया गया है।

जीरे के स्वास्थ्यवर्धक फायदे ( Health Benefits of Cumin )

  1. जीरे में मौजूद कैल्शियम ( Calcium ) हड्डियों को मजबूत बनाता है और इसमें मौजूद विटामिन-A और B-12 ऑस्टियोपोरोसिस ( Osteoporosis ) से लड़ने में भी मदद करता हैं।
  2. जीरे का सेवन वजन कम करने में मददगार होता है । यह शरीर से वसा और कोलेस्ट्रॉल को कम करने मदद करता है। 
  3. जीरे का सेवन शुगर के मरीजों के लिए फायदेमंद माना जाता है।
  4. जीरे का सेवन गुनगुने पानी के साथ किया जाए तो यह पाचन तंत्र को मजबूत करता है और अपच, एसिडिटी ( Acidity ), पेट फूलने जैसी समस्याओं को भी दूर करने में मदद करता है।
  5. जीरे में एंटी बैक्टीरियल ( Antibacterial ) गुण पाए जाते हैं, जो सर्दी और बुखार को दूर करने में मददगार होता है। 
  6. जीरे का सेवन करने से रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है क्योंकि जीरा एंटी-ऑक्सीडेंट ( Antioxidants ) और एंटी-बैक्टीरियल ( Antibacterial ) गुणों से भरपूर होता है, जो वायरस ( Virus ) और बैक्टीरिया ( Bacteria ) से बचाने में मदद करता है।

जीरे की खेती ( Cumin Farming )

जीरा एक मसाला फसल है, जिसकी खेती मसाले के रूप में की जाती है |जीरा देखने में बिल्कुल सोंफ की तरह ही होता है किन्तु यह रंग में थोड़ा अलग होता है। जीरे का उपयोग कई तरह के व्यंजनों में खुशबु उत्पन्न करने के लिए करते है। जीरे का पौधा शुष्क जलवायु वाला होता है तथा इसके पौधों को सामान्य बारिश की आवश्यकता होती है।

आवश्यक जलवायु, मिट्टी, और तापमान ( Required Climate, Soil and Temperature)

जीरा ठंडी जलवायु की फसल है। इसकी खेती रबी ( October to March ) सीजन में की जाती है। इसके लिए अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेंटीग्रेड और न्यूनतम 10 डिग्री सेंटीग्रेड से कम नहीं होना चाहिए। जीरे के लिए रेतीली दोमट और दोमट मिट्टी सबसे अच्छी मानी जाती है। इसके अलावा उपजाऊ काली और पीली मिट्टी में भी जीरे की खेती की जाती है। यदि खेत में जल भराव हो तो वहां जीरे की फसल न लगाएं। इसके लिए पूरी तरह समतल जमीन का होना जरूरी है।

खेती की तैयारी और बुवाई का समय ( Farm Preparation and Sowing Time )

 जीरा ठंडी जलवायु की फसल है। इसकी खेती ठंड के दिनों में की जाती है। जीरे की बुवाई अक्टूबर-नवम्बर (October – November ) माह में की जाती है, जबकि फरवरी-मार्च ( February – March ) तक यह पककर तैयार हो जाती है। जीरा बोने से पहले खेत को अच्छी तरह से जोतकर समतल और अच्छी तरह भुरभुरी करना आवश्यक है। जिस खेत में जीरा बोना है वहां से खरपतवार निकाल कर साफ कर लें। खेत में गाय का गोबर और वर्मीकम्पोस्ट ( Vermicompost ) डालने के बाद हैरो से खेत की जुताई करें। इसके बाद उस खेत की रोटावेटर से जुताई कर खेत को समतल कर लें।

जीरे की उन्नत किस्में ( Improved Varieties of Cumin )

जीरे की उन्नत किस्मों में RZ-19, RZ-209, GC-4, RZ-223, CJDC-94 आदि जीरे की प्रमुख किस्में हैं।

बीज की मात्रा एवं बीज उपचार ( Seed Quantity and Seed Treatment )

जीरे की एक हेक्टेयर फसल के लिए लगभग 4-5 किलोग्राम बीज की आवश्यकता होती है। जीरे की बुवाई से पहले कार्बेन्डिज़म ( Carbendazim ) 50% WP 2 ग्राम प्रति किग्रा या कार्बोक्सिन ( Carboxin ) 37.5% + थीरम ( Thiram ) 37.5% WP 2 ग्राम प्रति किग्रा बीज की दर से मिलाकर बीज का उपचार करें।

सिंचाई और उर्वरक प्रबंधन ( Irrigation and Fertilizer Management )

जीरे की फसल में बुवाई के तुरन्त बाद हल्की सिंचाई करें। इसके बाद 6-7 दिन बाद सिंचाई कर दें। इसके बाद खेत में नमी की मात्रा के अनुसार सिंचाई करें। जीरे की फसल में स्प्रिंकलर विधि ( Sprinkler System ) से सिंचाई करने से अधिक लाभ मिलता है। जीरे की फसल के लिए खेत की तैयारी से पहले 1 एकड़ खेत में 5-6 टन गोबर की खाद अच्छी तरह मिला लें। फसल में पहली सिंचाई के बाद 50 किग्रा यूरिया प्रति हेक्टेयर प्रयोग करें।

जीरे के उत्पादक राज्य ( Cumin Producing States )

सबसे ज्यादा जीरे की खेती राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र राज्य में होती है।

जीरे की खेती में लागत और कमाई ( Cost and Earning in Cumin Cultivation )

उपज की बात करें तो जीरे की औसत उपज 7-8 क्विंटल प्रति हेक्टेयर होती है। जीरे की खेती में प्रति हेक्टेयर करीब 30 से 35 हजार रुपए खर्च होता है। जीरे की कीमत 200 रुपये प्रति किलो मानें तो 1 से 1.5 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर शुद्ध लाभ होता है।

आप शबला सेवा की मदद कैसे ले सकते हैं? ( How can you take help of Shabla Seva? )

  1. आप हमारी विशेषज्ञ टीम से खेती के बारे में सभी प्रकार की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
  2. हमारे संस्थान के माध्यम से आप बोने के लिए उन्नत किस्म के बीज प्राप्त कर सकते हैं।
  3. आप हमसे टेलीफोन या सोशल मीडिया के माध्यम से भी जानकारी और सुझाव ले सकते हैं।
  4. फसल को कब और कितनी मात्रा में खाद, पानी देना चाहिए, इसकी भी जानकारी ले सकते हैं।
  5. बुवाई से लेकर कटाई तक, किसी भी प्रकार की समस्या उत्पन्न होने पर आप हमारी मदद ले सकते हैं।
  6. फसल कटने के बाद आप फसल को बाजार में बेचने में भी हमारी मदद ले सकते हैं।
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