मशरूम का उपयोग, फायदा एवं मशरूम की खेती

भारत देश के कई राज्यों में मशरूम को कुकुरमुत्ता के नाम से भी जाना जाता है। यह एक तरह का कवकीय क्यूब होता है, जिसे खाने में सब्जी, अचार और पकोड़े जैसी चीजों को बनाने के इस्तेमाल किया जाता है। मशरूम के अंदर कई तरह के पोषक तत्व पाये जाते है, जो मानव शरीर के लिए काफी लाभदायक होते है। मशरूम ( Mushroom ) कवक से बना एक मांसल, बीजाणु-युक्त फलने वाला पिण्ड है। इसके आकार के बारे में कहा जाय तो लगभग एक छत्ते के आकार का होता है। इन्हें हिन्दी में ‘छत्रक’, ‘खुम्ब’ या ‘खुम्भी’ ‘सुक्कर’ ‘भुछत्री’ भी कहते हैं। अंतराष्ट्रीय वैज्ञानिकों के अनुसार इसकी लगभग 10000 किस्में हमारी धरती पर मौजूद है। इसमें मौजूद पौषक तत्व आपके शरीर को कई खतरनाक बीमारियों से बचा कर रखते है। इसके अलावा इसका सेवन इम्यून सिस्टम को भी मजबूत करता है। इसके बीज की कीमत लगभग 75 रुपए प्रति किलोग्राम होती है, जो कि ब्रांड ( Brand ) और किस्म के अनुसार बदलती रहती है।

मशरूम में पाए जाने वाले पोषक तत्व ( Nutrients Found in Mushroom )

मशरूम में विटामिन ( Vitamin ) B, विटामिन D, पोटैशियम ( Potassium ), कॉपर (Copper), आयरन ( Iron ) और सेलेनियम ( Selenium ) भरपूर मात्रा में होता है।

मशरूम के सेवन से स्वास्थ्य में लाभ ( Health Benefits of Consuming Mushroom )

1. इसमें बीटा ग्लाइसीन ( Glycine ) और लिनॉलिक एसिड ( Linoleic Acid ) होता है, जो आपको प्रोस्टेट ( Protest ) और ब्रेस्ट कैंसर ( Breast Cancer ) के खतरे को कम करता है।

2. मशरूम का सेवन करने से वजन जल्द से जल्द कम करने में मदद मिलती है। आप इसे उबाल कर ब्रेकफास्ट (breakfast) में शामिल कर सकते है।

3. मशरूम में कार्बोहाइड्रेट्स ( Carbohydrates ) की मात्रा कम होने के कारण यह ब्लड शुगर लेवल ( Blood Sugar Level ) को कंट्रोल ( Control ) करने में मददगार होते है। डायबिटीज ( Diabetes ) मरीजों के लिए यह सबसे अच्छा फूड है।

4. सेलिनियम ( Selenium ) से भरपूर मशरूम इम्यून ( Immune ) पॉवर को बढ़ाने के साथ-साथ सर्दी-खांसी और जुकाम जैसी समस्याओं को शरीर से दूर रखते है।

5. इसमें पाएं जाने वाले न्यूट्रिएंट्स ( Nutrients ) और एंजाइम ( Enzymes ) दिल के रोगों का खतरा कम करते है। इसलिए हफ्ते में कम से कम 3 बार इसका सेवन जरूर करें।

मशरूम की खेती ( Mushroom Cultivation )

मशरूम की खेती के लिए तापमान एवं जलवायु ( Temperature and Climate for Mushroom Cultivation)

मशरूम के कवक जाल के फैलाव के लिए 22-26 डिग्री सेल्सियस तापमान की आवश्यकता होती है। इस तापमान पर कवक जाल बहुत तेजी से फैलता है। बाद में इसके लिए 14-18 डिग्री सेल्सियस तापमान ही उपयुक्त रहता है। 

मशरूम की उन्नत किस्में ( Advanced Varieties of Mushrooms )

मशरूम की उन्नत किस्में हैं।

ऑएस्‍टर मशरूम (Oyster Mushroom)

बटन मशरूम (Button Mushroom)

दूधिया मशरूम (Milky Mushroom)

पैडीस्ट्रा मशरूम (Paddy Straw Mushroom)

शिटाके मशरूम (Shiitake Mushroom)

मशरूम की खेती के लिए ट्रैनिंग ( Training for Mushroom Cultivation )

सरकार भी मशरूम के उत्पादन को कई योजनाओं के ज़रिए बढ़ावा दे रही है। मशरूम की खेती के लिए किसान अपने नज़दीकी कृषि विज्ञान केंद्र या फिर कृषि विश्वविद्यालय में प्रशिक्षण ले सकते हैं। यही नहीं, ICAR-मशरूम अनुसंधान निदेशालय द्वारा मशरूम की खेती पर ऑनलाइन ट्रेनिंग भी दी जा रही है, जिसकी पूरी जानकारी आप इस लिंक dmrsolan.icar.gov.in पर जाकर देख सकते हैं।

प्रक्रिया ( Process)

इसकी खेती करने के लिए आपको एक कमरे की जरुरत होती है, लेकिन आप चाहें तो लकड़ियों का एक जाल बनाकर भी उसके नीचे मशरूम उगाना आरम्भ कर सकते हैं। 

मशरूम की खेती के लिए खाद बनाने की विधि ( Composting Method for Mushroom Cultivation)

मशरूम की खेती करने के लिए खाद की जरुरत होती है, जिसके लिए आप गेहूं या धान के भूसे का उपयोग कर सकते है। इसके लिए आपको भूसे को कीटाणु रहित बनाना होगा। ताकि इसमें मौजूद कीटाणु एवं अशुद्धियाँ दूर हो जाए। आपको लगभग 1500 लीटर पानी में 1.5 किलोग्राम फार्मलीन एवं 150 ग्राम बेबिस्टीन मिलाना होता है। इसमें दोनों रसायन या कीटनाशकों को एक साथ मिलाना होता है।इसके बाद इसे पानी में 1  र रखना पड़ता है, जिससे ये खाद या भूसा आपके लिए मशरूम उगाने का माध्यम बनकर तैयार हो जायेगा। 

परतों की तैयारी ( Preparation of Layers )

 खाद बनाने के बाद आपको भूसे को बार-बार पलटना पड़ता है। जिसके बाद ये बुवाई करने के लिए तैयार हो     जाता है। 16 बाई 18 (16*18) का एक पॉलिथीन बैग लेकर इसमें परतों के हिसाब से बुवाई करते हैं, जैसे की पहले भूसा उसके ऊपर बीज और इसी तरह से 3–4 परतें बना लेते हैं। 

पानी और हवा से सावधान ( Careful of Water and Wind )

इस बैग के नीचे दोनों कोने पर छेद कर लें, जिससे बचा हुआ पानी निकल जाये। इतना ही नहीं इस पन्नी के बैग को कसकर बांध लें। जिससे इसमें कहीं भी हवा की गुंजाइस ना रहे।  इसके बीज या भूसे का अनुपात हर एक परत में बराबर होना आवश्यक है। 

फसल मिलने का समय  ( Harvest Time )

इसकी फसल अधिकतम 30 से 40 दिनों के भीतर काटने के लिए तैयार हो जाती है, उसके बाद आपको इसका फल दिखाई देने लगता है, जिसे आप आसानी से हाथ से ही तोड़ सकते हैं।

मशरूम की खेती करने वाले राज्य ( Mushroom Cultivating States )

देश के कई राज्यों के किसान मशरूम की खेती कर अच्छी आमदनी कर रहे हैं। पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में व्यापारिक स्तर पर मशरूम की खेती होती है।

मशरूम की खेती में लागत और मुनाफा (Cost and Profit in Mushroom Cultivation)

मात्र 20 से 25 हजार की लागत में 10 बाई 10 के रूम में कोई भी किसान मशरूम का उत्पादन कर सकता है। बाजार में मशरूम की कीमत 100 से 300 रुपए प्रति किलो तक है। जो इसकी लागत का तीन से पांच गुना मुनाफा है। एक बार मशरूम निकल जाने पर काम आ चुके भूसे को खली के साथ मिलाकर दुधारू पशुओं को खिलाने से दुग्ध उत्पादन बढ़ता है। इस भूसे को आर्गेनिक खाद के रूप में भी खेतों की उर्वरकता बढ़ाने में काम में लिया जा सकता है। मशरूम की खेती बंद कमरों में की जाती है, इसलिए इस पर कम व ज्यादा बारिश, ओलों का कोई फर्क नहीं पड़ता। इसका उत्पादन 25 से 30 दिन के अंदर शुरू हो जाता है, जो 2 माह तक चलता है। ट्रायल में 100 रुपए किलो के बीज से भूसे में शुरुआत कर सकते हैं।

 

आप शबला सेवा की मदद कैसे ले सकते हैं? ( How Can You Take Help of Shabla Seva? )

  1. आप हमारी विशेषज्ञ टीम से खेती के बारे में सभी प्रकार की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
  2. हमारे संस्थान के माध्यम से आप बोने के लिए उन्नत किस्म के बीज प्राप्त कर सकते हैं।
  3. आप हमसे टेलीफोन या सोशल मीडिया के माध्यम से भी जानकारी और सुझाव ले सकते हैं।
  4. फसल को कब और कितनी मात्रा में खाद, पानी देना चाहिए, इसकी भी जानकारी ले सकते हैं।
  5. बुवाई से लेकर कटाई तक, किसी भी प्रकार की समस्या उत्पन्न होने पर आप हमारी मदद ले सकते हैं।
  6. फसल कटने के बाद आप फसल को बाजार में बेचने में भी हमारी मदद ले सकते हैं।
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