अनानास का उपयोग, फायदा एवं अनानास की खेती

अनानास को अंग्रेज़ी में Pineapple कहते हैं और अनानास का वैज्ञानिक नाम Ananas comosus है। यह एक खाद्य उष्णकटिबन्धीय पौधा है। यह मुख्य रूप से  दक्षिणी ब्राज़ील एवं पैराग्वे का फल है। इसके ताजे फल को कभी भी काटकर खाया जा सकता है और रस निकाल कर भी सेवन किया जाता है।इसके फलो का तना काफी मोटा और गांठे अधिक मजबूत पाई जाती है और तना पत्तियों से भरा होता है, इस तरह से यह पूरा एक गठीला फल है। इसके फलो को सीधे तौर पर खाने के अलावा सलाद, जूस, जैम, केक और जेली आदि के रूप में भी करते है।

अनानास में पाए जाने वाले पोषक तत्व ( Nutrients Found in Pineapple )

अनानास में कार्बोहाइड्रेट्स ( Carbohydrates ), सोडियम ( Sodium ), पोटैशियम ( Potassium ), मैग्नीशियम ( Magnesium ), आयरन ( Iron ), सेलेनियम ( Selenium ), फॉस्फोरस ( Phosphorus ), ज़िंक ( Zinc ), कॉपर ( Copper ), राइबोफ्लेविन ( Riboflavin ), प्रोटीन ( Protein ), फैट ( Fat ), शुगर ( Sugar ), फाइबर ( Fiber ), विटामिन ( Vitamin ) C, थायमीन ( Thiamine ), नियासिन ( Niacin ), फोलेट ( Folate ), विटामिन B6, B-कैरोटीन ( B-Carotene ), कॉलिन ( Choline ) और ऊर्जा ( Energy ) आदि पाए जाते हैं।

अनानास के सेवन के स्वास्थ्यवर्धक फायदे ( Health Benefits of Consuming Pineapple )

अनानास विटामिन, खनिज, एंजाइम और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता है, जो विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं को रोकने और प्रतिरक्षा को बढ़ावा देने में मदद करता है।

अनानास के कुछ प्रमुख स्वास्थ्य लाभ:

1. पाचन में सुधार करता है:
अनानास में ब्रोमेलेन नामक एंजाइम होता है जो प्रोटीन को पचाने में मदद करता है, जिससे पाचन प्रक्रिया सुचारू हो जाती है।
यह कब्ज, अपच, गैस और एसिडिटी जैसी पाचन समस्याओं से राहत दिलाने में भी मदद करता है।

2. रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि:
अनानास विटामिन सी का अच्छा स्रोत है, जो रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करता है।
यह एंटीऑक्सीडेंट से भी भरपूर है जो शरीर को मुक्त कणों से होने वाले नुकसान से बचाता है।

3. हड्डियों को मजबूत बनाता है:
अनानास में मैंगनीज, कैल्शियम और फास्फोरस जैसे खनिज होते हैं जो हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करते हैं।
यह ऑस्टियोपोरोसिस जैसी हड्डियों की बीमारियों को रोकने में भी सहायक है।

4. सूजन कम करता है:
अनानास में मौजूद ब्रोमेलैन एंजाइम सूजन को कम करने में मदद करता है।
यह गठिया, जोड़ों के दर्द और मांसपेशियों में दर्द जैसी सूजन संबंधी समस्याओं से राहत दिलाने में भी सहायक है।

5. हृदय स्वास्थ्य में सुधार:
अनानास में पोटैशियम होता है जो ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में मदद करता है।
यह फाइबर का भी अच्छा स्रोत है जो कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में मदद करता है।

6. कैंसर से बचाव:
अनानास में एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो कैंसर को रोकने में मदद करते हैं।
अध्ययनों से पता चला है कि अनानास में मौजूद ब्रोमेलैन एंजाइम कैंसर कोशिकाओं के विकास को रोकने में सहायक हो सकता है।

7. मधुमेह को नियंत्रित करने में सहायक:
अनानास में फाइबर होता है जो रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करता है।
यह मधुमेह के रोगियों के लिए फायदेमंद हो सकता है।

8. वजन कम करने में मददगार:
अनानास में कैलोरी कम और फाइबर अधिक होता है, जो वजन घटाने में मदद कर सकता है।

अनानास की खेती ( Pineapple Farming )

अनानास एक स्वादिष्ट और पौष्टिक फल है, जिसकी खेती भारत में बड़े पैमाने पर की जाती है। यह उष्णकटिबंधीय जलवायु में पनपता है और इसकी खेती के लिए कुछ विशेष परिस्थितियों की आवश्यकता होती है। अनानास की खेती के लिए बारिश का मौसम सबसे अच्छा होता है। पर्याप्त सिंचाई सुविधा होने पर इसकी खेती जनवरी से मार्च और मई से अगस्त के बीच की जा सकती है।

अनानास की खेती में मिट्टी, तापमान एवं जलवायु ( Soil, Temperature and Climate in Pineapple Farming )

अनानास की खेती के लिए धूप की पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए। अनानास की खेती समुद्र तल से 1000 मीटर तक की ऊंचाई पर की जा सकती है।

मिट्टी (Soil) –
अनानास की खेती के लिए बलुई दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है।
मिट्टी का पीएच मान 5.0 से 6.0 के बीच होना चाहिए।
मिट्टी में जैविक पदार्थों की मात्रा पर्याप्त होनी चाहिए।
मिट्टी में जल निकास की अच्छी व्यवस्था होनी चाहिए।

तापमान (Temperature) –
अनानास गर्म जलवायु में उगने वाला फल है।
इसकी खेती के लिए 15 डिग्री सेल्सियस से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान सबसे अनुकूल माना जाता है।
अधिक तापमान से फल का विकास रुक जाता है और कम तापमान से फल खराब हो जाता है।

जलवायु (Climate) –
अनानास आर्द्र जलवायु में अच्छी तरह उगता है।
इसकी खेती के लिए 75% से 80% तक की आर्द्रता सबसे अनुकूल मानी जाती है।
अत्यधिक वर्षा से फल में पानी की मात्रा बढ़ जाती है और कम वर्षा से फल सूख जाता है।

अनानास की खेती में मिट्टी की तैयारी एवं बुवाई ( Soil Preparation and Sowing in Pineapple Farming )

मिट्टी की तैयारी (Soil Preparation) –

जुताई: अनानास की खेती के लिए खेत में गहरी जुताई की आवश्यकता होती है। इससे मिट्टी भुरभुरी हो जाती है और जड़ों का विकास आसानी से हो पाता है।
जैविक खाद: खेत की जुताई करते समय मिट्टी में सड़ा हुआ गोबर, वर्मीकम्पोस्ट, या कोई जैविक खाद मिला देना चाहिए। इससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और पौधों को आवश्यक पोषक तत्व मिलते हैं।
मिट्टी का मिश्रण: मिट्टी में एक भाग पीट काई, एक भाग रेत और एक भाग पेर्लाइट से बना आर्किड मिश्रण भी काम करता है। यह मिश्रण मिट्टी को भुरभुरा बनाता है और जल निकास में सुधार करता है।
पीएच मान: अनानास की खेती के लिए मिट्टी का पीएच मान 5.5 से 6.5 के बीच होना चाहिए। यदि मिट्टी का पीएच मान इस सीमा से बाहर है, तो इसे चूना या सल्फर मिलाकर समायोजित किया जा सकता है।

बुवाई (Sowing) –

समय: भारत में अनानास की रोपाई दो बार की जाती है, जिसमें पहली रोपाई जनवरी से मार्च के बीच और दूसरी रोपाई मई से जुलाई के बीच की जाती है।
रोपाई के तरीके:
सकर: अनानास के पौधे के आधार से निकलने वाले सकर को रोपाई के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
चौंरी: अनानास के फल के ऊपरी भाग से निकलने वाली चौंरी को रोपाई के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
बीज: अनानास के बीजों को भी रोपाई के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन यह तरीका कम प्रचलित है।

रोपाई की दूरी: अनानास की रोपाई पंक्तियों में की जाती है। पंक्तियों के बीच की दूरी 90 सेंटीमीटर और पौधों के बीच की दूरी 60 सेंटीमीटर होनी चाहिए।

रोपाई के बाद देखभाल: रोपाई के बाद पौधों को नियमित रूप से पानी देना चाहिए। खरपतवारों को समय पर निकालना चाहिए। रोगों और कीटों से बचाव के लिए आवश्यक उपाय किए जाने चाहिए।

अनानास की उन्नत किस्में ( Improved Varieties of Pineapple )

भारत में अनानास की कई उन्नत किस्में उगाई जाती हैं, जिनमें से कुछ प्रमुख किस्में इस प्रकार हैं:

1. केव: यह देर से पकने वाली किस्म है और भारत में अनानास की सबसे लोकप्रिय किस्म है। केव अनानास रीढ़ रहित और आकार में बड़ा होता है। फल का वजन 1.5 किलोग्राम से 3 किलोग्राम के बीच होता है। यह किस्म पूरे भारत में उगाई जाती है, लेकिन यह केरल, पश्चिम बंगाल और असम में सबसे अधिक लोकप्रिय है।

2. मॉरीशस: यह किस्म मध्यम आकार की होती है और इसका फल रेशेदार और मीठा होता है। फल का वजन 1 किलोग्राम से 1.5 किलोग्राम के बीच होता है। यह किस्म मुख्य रूप से केरल और मेघालय में उगाई जाती है।

3. जलधूप: यह किस्म जल्दी पकने वाली होती है और इसका फल रसदार और मीठा होता है। फल का वजन 1 किलोग्राम से 1.5 किलोग्राम के बीच होता है। यह किस्म मुख्य रूप से महाराष्ट्र, गुजरात और आंध्र प्रदेश में उगाई जाती है।

4. रेड स्पैनिश: यह किस्म रीढ़दार और लाल रंग की होती है। फल का वजन 1 किलोग्राम से 1.5 किलोग्राम के बीच होता है। यह किस्म मुख्य रूप से कर्नाटक और तमिलनाडु में उगाई जाती है।

5. क्यू: यह किस्म रीढ़ रहित और पीले रंग की होती है। फल का वजन 1 किलोग्राम से 1.5 किलोग्राम के बीच होता है। यह किस्म मुख्य रूप से बिहार, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में उगाई जाती है।

6. लखट: यह किस्म रीढ़दार और गहरे हरे रंग की होती है। फल का वजन 1 किलोग्राम से 1.5 किलोग्राम के बीच होता है। यह किस्म मुख्य रूप से उत्तर-पूर्वी राज्यों में उगाई जाती है।

इन किस्मों के अलावा, भारत में अनानास की कई अन्य उन्नत किस्में भी उगाई जाती हैं, जैसे:

  • एमडी-2: यह किस्म रोगों और कीटों के प्रतिरोधी है और इसका फल रसदार और मीठा होता है।
  • पूसा अननस-1: यह किस्म जल्दी पकने वाली है और इसका फल रेशेदार और मीठा होता है।
  • पूसा अननस-2: यह किस्म रीढ़ रहित और पीले रंग की होती है। फल का वजन 1 किलोग्राम से 1.5 किलोग्राम के बीच होता है।

अनानास की खेती में क्राउन अथवा बीज एवं उपचार ( Seed and Seed Treatment in Pineapple Farming )

अनानास की खेती में बीज का उपयोग नहीं किया जाता है। इसकी जगह क्राउन (मुकुट), सकर (शाखा), और गुटी पुत्तल (स्लिप) का उपयोग किया जाता है।

क्राउन:

  • यह अनानास के फल के शीर्ष पर स्थित मुकुट जैसा भाग होता है।
  • क्राउन से अनानास का पौधा तैयार करने के लिए, इसे फल से सावधानीपूर्वक अलग करें।
  • क्राउन को 24 घंटे के लिए पानी में भिगोकर रखें।
  • इसके बाद, इसे एक गमले में रोपें।
  • गमले में मिट्टी का मिश्रण होना चाहिए, जिसमें रेत, पीट काई और वर्मीकम्पोस्ट शामिल हों।
  • क्राउन को जड़ें जमाने के लिए 18 डिग्री सेल्सियस से 25 डिग्री सेल्सियस तापमान पर रखें।
  • जड़ें जमने के बाद, इसे खेत में रोपित किया जा सकता है।

सकर:

  • ये अनानास के पौधे के आधार से निकलने वाली शाखाएं होती हैं।
  • सकर से अनानास का पौधा तैयार करने के लिए, इसे सावधानीपूर्वक पौधे से अलग करें।
  • सकर को 24 घंटे के लिए पानी में भिगोकर रखें।
  • इसके बाद, इसे एक गमले में रोपें।
  • गमले में मिट्टी का मिश्रण होना चाहिए, जिसमें रेत, पीट काई और वर्मीकम्पोस्ट शामिल हों।
  • सकर को जड़ें जमाने के लिए 18 डिग्री सेल्सियस से 25 डिग्री सेल्सियस तापमान पर रखें।
  • जड़ें जमने के बाद, इसे खेत में रोपित किया जा सकता है।

गुटी पुत्तल:

  • यह एक विशेष तकनीक है, जिसमें सकर को जड़ें जमाने के लिए मिट्टी में गाड़ा जाता है, लेकिन इसे पौधे से अलग नहीं किया जाता है।
  • जब सकर में जड़ें जम जाती हैं, तो इसे पौधे से अलग करके खेत में रोपित किया जाता है।

उपचार:

  • अनानास के पौधों को रोगों और कीटों से बचाने के लिए उचित उपचार करना महत्वपूर्ण है।
  • रोगों से बचाव के लिए, फफूंदनाशक का उपयोग किया जा सकता है।
  • कीटों से बचाव के लिए, कीटनाशक का उपयोग किया जा सकता है।
  • जैविक कीट नियंत्रण के तरीकों का भी उपयोग किया जा सकता है, जैसे कि नीम का तेल और गोबर का खाद

अनानास की खेती में देखभाल ( Care in Pineapple Farming )

अनानास एक उष्णकटिबंधीय फल है, इसलिए इसे गर्म और धूप वाली जलवायु की आवश्यकता होती है। अनानास की खेती में देखभाल के कुछ महत्वपूर्ण पहलू इस प्रकार हैं:

पानी:

  • अनानास के पौधे अपनी पत्तियों के माध्यम से कुछ पानी अवशोषित करने में सक्षम होते हैं।
  • उन्हें बहुत अधिक पानी की आवश्यकता नहीं होती है, इसलिए पानी देने से पहले मिट्टी सूखने तक प्रतीक्षा करें
  • पानी देते समय पत्तियों और मिट्टी दोनों को पानी दें
  • ड्रिप सिंचाई पद्धति का उपयोग करना सबसे उपयुक्त है।

खाद:

  • अनानास के पौधों को नियमित रूप से खाद देने की आवश्यकता होती है।
  • गोबर की खाद, वर्मीकम्पोस्ट, और रासायनिक उर्वरक का उपयोग किया जा सकता है।
  • खाद की मात्रा और प्रकार मिट्टी की उर्वरता और पौधों की उम्र पर निर्भर करता है।

निराई-गुड़ाई:

  • खरपतवारों को नियमित रूप से हटाना महत्वपूर्ण है।
  • निराई-गुड़ाई हाथ से या कृषि यंत्रों द्वारा की जा सकती है।

रोग और कीट:

  • अनानास के पौधे रोगों और कीटों के प्रति संवेदनशील होते हैं।
  • रोगों से बचाव के लिए फफूंदनाशक का उपयोग किया जा सकता है।
  • कीटों से बचाव के लिए कीटनाशक का उपयोग किया जा सकता है।
  • जैविक कीट नियंत्रण के तरीकों का भी उपयोग किया जा सकता है, जैसे कि नीम का तेल और गोबर का खाद

अन्य महत्वपूर्ण बातें:

  • अनानास के पौधों को सहारा देने के लिए ट्रेलिस का उपयोग किया जा सकता है।
  • फलों को पक्षियों और जानवरों से बचाने के लिए जाल का उपयोग किया जा सकता है।

अनानास की खेती में सिंचाई और उर्वरक ( Irrigation and Fertilizer in Pineapple Farming )

सिंचाई:

  • जैसा कि आपने कहा, यदि अनानास के पौधे की रोपाई बरसात के मौसम में की जाती है, तो उसे अधिक सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती है।
  • ड्रिप सिंचाई पद्धति अपनाना सबसे उपयुक्त है क्योंकि यह पानी बचाता है और मिट्टी में नमी को बनाए रखने में मदद करता है।
  • पौधों के अंकुरित होने के बाद, 10 से 15 दिन के अंतराल पर सिंचाई करें।
  • मिट्टी की नमी की नियमित रूप से जांच करें और आवश्यकतानुसार सिंचाई करें।

खाद:

  • अनानास के पौधों को नियमित रूप से खाद देने की आवश्यकता होती है।
  • गोबर की खाद एक अच्छा विकल्प है, और आपको प्रति हेक्टेयर लगभग 250 क्विंटल खाद डालनी चाहिए।
  • आप वर्मीकम्पोस्ट खाद का भी उपयोग कर सकते हैं, जो एक जैविक खाद है जो मिट्टी की उर्वरता और जल धारण क्षमता में सुधार करता है।
  • रासायनिक उर्वरक का भी उपयोग किया जा सकता है, लेकिन उर्वरक की मात्रा और प्रकार मिट्टी की उर्वरता और पौधों की उम्र पर निर्भर करता है।

अनानास की खेती में कटाई ( Harvesting in Pineapple Farming )

अनानास को कटाई के लिए तभी तैयार माना जाता है जब फल पूरी तरह से पक जाए। अनानास को कच्चा तोड़ने पर वह पकेगा नहीं

अनानास के पकने में 18 से 32 महीने लग सकते हैं। अनानास के आकार और रंग में परिवर्तन पकने का विश्वसनीय संकेतक नहीं होता है।

अनानास के पकने के कुछ संकेत इस प्रकार हैं:

  • सुगंध: पके हुए अनानास में मीठी सुगंध होती है।
  • रंग: पके हुए अनानास का रंग हल्का पीला या नारंगी हो जाता है।
  • स्पर्श: पके हुए अनानास को दबाने पर थोड़ा नरम महसूस होता है।

अनानास की कटाई के लिए कुछ सुझाव इस प्रकार हैं:

  • एक तेज चाकू या कैंची का उपयोग करें।
  • फल को डंठल से सावधानीपूर्वक काटें
  • फल को हाथों से न तोड़ें

अनानास को कटाई के बाद तुरंत खाया जा सकता है या फ्रिज में संग्रहीत किया जा सकता है। अनानास को कई दिनों तक फ्रिज में संग्रहीत किया जा सकता है।

अनानास के पकने के कुछ महत्वपूर्ण लक्षण ( Some Important Signs of Ripeness of Pineapple )

गंध:

  • पके हुए अनानास में मीठी सुगंध होती है। यदि अनानास में कोई गंध नहीं है, तो यह पका हुआ नहीं है।
  • गंध जितनी तेज होगी, अनानास उतना ही पका हुआ होगा।

आकार:

  • पका हुआ अनानास गोल किनारों और अच्छी तरह से विकसित आंखों के साथ अच्छी तरह से विकसित होना चाहिए।
  • आंखें अनानास पर ज्यामितीय आकृतियों से बने खुरदुरे वृत्तों के नुकीले केंद्र हैं।
  • पके हुए अनानास की आंखें भरी हुई और कुछ हद तक चपटी होती हैं।

रंग:

  • पके हुए अनानास का रंग हल्का पीला या नारंगी होता है।
  • हल्के हरे रंग के अनानास अभी भी पक रहे हैं
  • गहरे भूरे रंग के अनानास अधिक पक गए या खराब हो सकते हैं।

स्पर्श:

  • पका हुआ अनानास को दबाने पर थोड़ा नरम महसूस होता है।
  • अगर अनानास बहुत सख्त है, तो यह पका हुआ नहीं है।
  • अगर अनानास बहुत नरम है, तो यह अधिक पक गया या खराब हो सकता है।

आवाज:

  • पके हुए अनानास को थपथपाने पर खोखली आवाज आती है।
  • अगर अनानास को थपथपाने पर ठोस आवाज आती है, तो यह पका हुआ नहीं है।

अनानास की खेती में लाभ ( Benefits in Pineapple Farming )

अनानास एक लाभदायक फसल हो सकती है।
अनानास की बाजार में अच्छी मांग है।
अनानास की खेती पूरे वर्ष भर की जा सकती है।
अनानास एक बार लगाने के बाद कई वर्षों तक फल देता है।

अनानास की खेती करने वाले राज्य ( Pineapple Farming States )

भारत में अनानास की बागवानी कई राज्यों में की जाती है, जिनमें केरल, पश्चिम बंगाल, असम, कर्नाटक, मणिपुर, त्रिपुरा, उत्तर प्रदेश, बिहार, मेघालय, मणिपुर, आंध्र प्रदेश, मिजोरम, और हिमाचल प्रदेश शामिल हैं। असम अनानास का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है।

भारत अनानास का दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है और निर्यात में 8.5% हिस्सेदारी रखता है। भारत से अनानास का निर्यात मुख्य रूप से यूरोपीय संघ, संयुक्त राज्य अमेरिका, मध्य पूर्व, और दक्षिण पूर्व एशिया को किया जाता है।

अनानास की खेती में लागत एवं कमाई ( Cost and Earning in Pineapple Farming )

अनानास की खेती में कुल लागत कई कारकों पर निर्भर करती है, जैसे:

बीज या पौधे: बीज से अनानास उगाना धीमा होता है, इसलिए अधिकांश किसान पौधे खरीदते हैं, जो अधिक महंगे होते हैं।
खाद और उर्वरक: अनानास को स्वस्थ विकास के लिए खाद और उर्वरक की आवश्यकता होती है।
मजदूरी: रोपण, निराई-गुड़ाई, कटाई और विपणन के लिए मजदूरों की आवश्यकता होती है।
अन्य: उपकरण, परिवहन, और भंडारण जैसी अन्य लागतें भी होंगी।
इन कारकों के आधार पर, अनानास की खेती में कुल अनुमानित लागत 1 लाख रुपये से 2.5 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर है।

अनानास की खेती में कमाई कई कारकों पर निर्भर करती है, जैसे:

फलों की बिक्री: अनानास की बिक्री किसानों के लिए आय का मुख्य स्रोत है। अनानास की बाजार में अच्छी मांग है और इसकी कीमत 150 रुपये से 200 रुपये प्रति किलो तक हो सकती है।
प्रसंस्करण: कुछ किसान अनानास का जूस, जैम, और अन्य उत्पादों में प्रसंस्करण करते हैं। प्रसंस्कृत अनानास की कीमत ताजे अनानास से अधिक हो सकती है।
पर्यटन: कुछ किसान अपने खेतों को पर्यटकों के लिए खोलते हैं और प्रवेश शुल्क या उत्पादों की बिक्री से आय प्राप्त करते हैं।

इन कारकों के आधार पर, अनानास की खेती में कुल अनुमानित कमाई 4 लाख रुपये से 11 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर होती है।

आप शबला सेवा की मदद कैसे ले सकते हैं? ( How Can You Take Help of Shabla Seva? )

  1. आप हमारी विशेषज्ञ टीम से खेती के बारे में सभी प्रकार की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
  2. हमारे संस्थान के माध्यम से आप बोने के लिए उन्नत किस्म के बीज प्राप्त कर सकते हैं।
  3. आप हमसे टेलीफोन या सोशल मीडिया के माध्यम से भी जानकारी और सुझाव ले सकते हैं।
  4. फसल को कब और कितनी मात्रा में खाद, पानी देना चाहिए, इसकी भी जानकारी ले सकते हैं।
  5. बुवाई से लेकर कटाई तक, किसी भी प्रकार की समस्या उत्पन्न होने पर आप हमारी मदद ले सकते हैं।
  6. फसल कटने के बाद आप फसल को बाजार में बेचने में भी हमारी मदद ले सकते हैं।
kisan-credit-card

संपर्क

अधिक जानकारी के लिए हमसे संपर्क करें +91 9335045599 ( शबला सेवा )

आप नीचे व्हाट्सएप्प (WhatsApp) पर क्लिक करके हमे अपना सन्देश भेज सकते है।

Become our Distributor Today!

Get engaged as our distributor of our high quality natural agricultural products & increase your profits.

Translate »