अनानास का उपयोग, फायदा एवं अनानास की खेती

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अनानास को अंग्रेज़ी में Pineapple कहते हैं और अनानास का वैज्ञानिक नाम Ananas comosus है। यह एक खाद्य उष्णकटिबन्धीय पौधा है। यह मुख्य रूप से  दक्षिणी ब्राज़ील एवं पैराग्वे का फल है। इसके ताजे फल को कभी भी काटकर खाया जा सकता है और रस निकाल कर भी सेवन किया जाता है।इसके फलो का तना काफी मोटा और गांठे अधिक मजबूत पाई जाती है और तना पत्तियों से भरा होता है, इस तरह से यह पूरा एक गठीला फल है। इसके फलो को सीधे तौर पर खाने के अलावा सलाद, जूस, जैम, केक और जेली आदि के रूप में भी करते है।

अनानास में पाए जाने वाले पोषक तत्व ( Nutrients Found in Pineapple )

अनानास में कार्बोहाइड्रेट्स ( Carbohydrates ), सोडियम ( Sodium ), पोटैशियम ( Potassium ), मैग्नीशियम ( Magnesium ), आयरन ( Iron ), सेलेनियम ( Selenium ), फॉस्फोरस ( Phosphorus ), ज़िंक ( Zinc ), कॉपर ( Copper ), राइबोफ्लेविन ( Riboflavin ), प्रोटीन ( Protein ), फैट ( Fat ), शुगर ( Sugar ), फाइबर ( Fiber ), विटामिन ( Vitamin ) C, थायमीन ( Thiamine ), नियासिन ( Niacin ), फोलेट ( Folate ), विटामिन B6, B-कैरोटीन ( B-Carotene ), कॉलिन ( Choline ) और ऊर्जा ( Energy ) आदि पाए जाते हैं।

अनानास के सेवन के स्वास्थ्यवर्धक फायदे ( Health Benefits of Consuming Pineapple )

अनानास का जूस पाचन में सहायक होता है।

अनानास का जूस हड्डियों को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करता है।

यह शरीर में पाए जाने वाले विषैले पदार्थो को भी बाहर निकालता है, इस तरह से यह एक औषधीय फल भी है।

अनानास में ब्रोमेलैन नामक एंजाइम होता है, जो दस्त में उपयोगी होता है।

अनानास में एंटी-ट्यूमर और एंटी-कैंसर जैसे  गुण पाए जाते हैं।

अनानास में ब्लड ग्लूकोज़ को कम करने वाला प्रभाव होता है।

अनानास घाव भरने में मददगार होता है।

अनानास के सेवन से दर्द में राहत मिलती है।

अनानास के सेवन से जोड़ों में सूजन कम होती है।

अनानास की बागवानी ( Pineapple Gardening )

अनानास की खेती के लिए बारिश का मौसम सबसे अच्छा होता है। पर्याप्त सिंचाई सुविधा होने पर इसकी खेती जनवरी से मार्च और मई से अगस्त के बीच की जा सकती है।

अनानास की बागवानी में मिट्टी, तापमान एवं जलवायु ( Soil, Temperature and Climate in Pineapple Gardening )

अनानास की बागवानी के लिए अधिक जीवांश वाली बलुई दोमट मिट्टी अच्छी होती है। इसके अलावा जल जमाव वाली भूमि में इसकी खेती नहीं करनी चाहिए। इसकी मिट्टी का पीएच मान 5 से 6 के बीच होना चाहिए। अनानास की खेती के लिए पर्याप्त वर्षा के साथ नम जलवायु का होना बहुत जरूरी है। इस प्रकार की जलवायु तटीय क्षेत्रों में पाई जाती है। इसकी खेती के लिए तापमान 20°C और 30 °C के बीच होना चाहिए। इसकी पत्तियाँ और जड़ें 25⁰C से 30⁰C पर सबसे अच्छी बढ़ती हैं।

अनानास की बागवानी में मिट्टी की तैयारी एवं बुवाई ( Soil Preparation and Sowing in Pineapple Cultivation )

खेत की जुताई करते समय मिट्टी में सड़ा हुआ गोबर, वर्मीकम्पोस्ट या कोई जैविक खाद मिला देना चाहिए। मिट्टी में एक भाग पीट काई, एक भाग रेत और एक भाग पेर्लाइट से बना आर्किड मिश्रण भी काम करता है। अनानास की बुआई के लिए खेत में गहरी जुताई करें। इसके बाद मिट्टी में सड़ा हुआ गोबर या कम्पोस्ट मिला दें और आखिरी जुताई का काम करें। भारत में अनानास की रोपाई दो बार की जाती है, जिसमें पहली रोपाई जनवरी से मार्च के बीच और दूसरी रोपाई मई से जुलाई के बीच की जाती है।

अनानास की उन्नत किस्में ( Improved Varieties of Pineapple )

भारत में अनानास की कई किस्में लोकप्रिय हैं। भारत में उगाई जाने वाली अनानास की अधिकांश किस्में जाइंट क्यू, केव, क्वीन, मॉरीशस, जलधूप, रेड स्पैनिश और लखट हैं।

मॉरीशस किस्म: अनानास की मॉरीशस किस्म को स्थानीय तौर पर वाजाकुलम किस्म के नाम से जाना जाता है। अनानास की यह किस्म केरल और मेघालय के कुछ हिस्सों में उगाई जाती है।  फल का आकार मध्यम एवं दो रंगों का होता है। एक लाल छिलके वाला और दूसरा गहरा पीला। लाल किस्म की तुलना में, पीला फल आयताकार, रेशेदार और मध्यम मिठास वाला होता है। यह देर से पकने वाली किस्म है जिसका आनंद आप जुलाई से अगस्त तक ले सकते हैं। अनानास की मॉरीशस किस्म मुख्य रूप से केरल में उगाई जाती है और कच्चे और पके फलों के रूप में घरेलू बाजारों में आपूर्ति की जाती है।

केव किस्म: केव देर से पकने वाली किस्म है और भारत में अनानास की सबसे लोकप्रिय किस्म है। केव अनानास रीढ़ रहित और आकार में बड़ा होता है। फल का वजन 1.5 किलोग्राम से 3 किलोग्राम के बीच होता है।

अनानास की बागवानी में क्राउन अथवा बीज एवं उपचार( Seed and Seed Treatment in Pineapple Gardening )

अनानास की खेती के लिए कोई बीज नहीं होता, बल्कि इसका पौधा अनानास के पौधे पर बनी शाखाओं से तैयार किया जाता है। इन पौधों को पुत्तल (सकर), गुटी पुत्तल (स्लिप) और क्राउन (मुकुट) आदि नामों से भी जाना जाता है। इसकी सकर किस्म जमीन में पत्तियों को निकालकर तैयार की जाती है, और जमीन से निकलने वाली शाखाओं पर स्लिप तैयार की जाती है।

फलों पर बनी शाखाओं पर क्राउन (मुकुट) तैयार किया जाता है। जैसे ही फल काटते हैं, अनानास स्लीप को धो लें। अनानास स्लीप को गीले पेपर टॉवल में हल्के से लपेटकर और प्लास्टिक के ज़िपर बैग में रखकर अंकुरित करें। ज़िपर बैग को लगातार गर्म जगह (18°C से 25°C)  पर रखें।

अनानास की बागवानी में देखभाल ( Care in Pineapple Gardening )

अनानास के लिए गर्म, धूप वाली स्थिति अच्छी होती है। अनानास के पौधे अपनी पत्तियों के माध्यम से कुछ पानी अवशोषित करने में सक्षम होते हैं। उन्हें बहुत अधिक पानी की आवश्यकता नहीं होती है, इसलिए पानी देने से पहले मिट्टी सूखने तक प्रतीक्षा करें फिर पत्तियों और मिट्टी को पानी दें।

अनानास की बागवानी में सिंचाई और उर्वरक ( Irrigation and Fertilizer in Pineapple Gardening )

अनानास के पौधे की रोपाई बरसात के मौसम में की जाती है, तो इसे अधिक सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती है। सिंचाई के लिए ड्रिप सिंचाई पद्धति अपनाना सबसे उपयुक्त है। पौधों के अंकुरित होने के बाद 10 से 15 दिन के अंतराल पर सिंचाई करनी चाहिए। अनानास में लगभग 250 क्विंटल गोबर की खाद/हेक्टेयर डालें या वर्मीकम्पोस्ट खाद का उपयोग कर सकते हैं।

अनानास की बागवानी में कटाई ( Harvesting Pineapple in Gardening )

फूल आने से लेकर पकने और फल बनने तक लगभग चार महीने लगते हैं। आप आम तौर पर वसंत/गर्मियों की शुरुआत में जड़ वाले मुकुट से दूसरे वर्ष की शरद ऋतु में पके अनानास की कटाई कर सकते हैं लेकिन कटाई आमतौर पर फूल आने के 4 महीने से अधिक समय बाद की जाती है। हालाँकि, यह निर्धारित करना मुश्किल है कि अनानास कटाई के लिए कब पक गया है। अनानास को तभी काटें जब वह पका हो। एक बार तोड़ने के बाद अनानास नहीं पकेंगे। अनानास को परिपक्व फल उत्पन्न करने में 18 से 32 महीने लगते हैं। यह बताना मुश्किल है कि अनानास कब पक गया है, अनानास के आकार और रंग परिवर्तन पकने के विश्वसनीय संकेतक नहीं हैं।

अनानास के पकने के कुछ महत्वपूर्ण लक्षण भी होते हैं। ( There are also Some Important Signs of Ripeness of Pineapple. )

मीठी गंध ( Sweet Smell ) – अगर इसमें कोई गंध नहीं है तो यह पका हुआ नहीं है।

अनानास का आकार ( Pineapple Shape ) – अनानास गोल किनारों और अच्छी तरह से विकसित आंखों के साथ अच्छी तरह से विकसित होना चाहिए। आँखें अनानास पर ज्यामितीय आकृतियों से बने खुरदुरे वृत्तों के नुकीले केंद्र हैं। ध्यान दें कि आंखें भरी हुई और कुछ हद तक चपटी होनी चाहिए।

अनानास की बागवानी करने वाले राज्य ( Pineapple Cultivating States )

भारत में अनानास की बागवानी केरल, पश्चिम बंगाल, असम, कर्नाटक, मणिपुर, त्रिपुरा, उत्तर प्रदेश, बिहार, मेघालय, मणिपुर, आंध्र प्रदेश, मिजोरम और हिमाचल प्रदेश में की जाती है। भारत अनानास निर्यात में 8.5% हिस्सेदारी रखता है।

अनानास की बागवानी में लागत एवं कमाई ( Cost and Earning in Pineapple Gardening )

भारत में अनानास की खेती की लागत लगभग 2 लाख से 2.5 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर है। एक वर्ष में एक हेक्टेयर में लगभग 3 टन से 4 टन तक फल मिल सकते हैं। अगर अनानास को बाजार में 150 से 200 रुपये प्रति किलो की दर से बेचा जाए तो किसान को लगभग 4 लाख रुपये का मुनाफा हो सकता है।

आप शबला सेवा की मदद कैसे ले सकते हैं? ( How Can You Take Help of Shabla Seva? )

  1. आप हमारी विशेषज्ञ टीम से खेती के बारे में सभी प्रकार की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
  2. हमारे संस्थान के माध्यम से आप बोने के लिए उन्नत किस्म के बीज प्राप्त कर सकते हैं।
  3. आप हमसे टेलीफोन या सोशल मीडिया के माध्यम से भी जानकारी और सुझाव ले सकते हैं।
  4. फसल को कब और कितनी मात्रा में खाद, पानी देना चाहिए, इसकी भी जानकारी ले सकते हैं।
  5. बुवाई से लेकर कटाई तक, किसी भी प्रकार की समस्या उत्पन्न होने पर आप हमारी मदद ले सकते हैं।
  6. फसल कटने के बाद आप फसल को बाजार में बेचने में भी हमारी मदद ले सकते हैं।

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