बंदगोभी/पत्तागोभी का उपयोग, फायदा एवं पत्तागोभी की खेती

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बंदगोभी (Cabbage), जिसे पत्तागोभी भी कहा जाता है, एक हरी पत्तेदार सब्जी है जो गोभी परिवार का सदस्य है।
बंदगोभी/पत्तागोभी एक बहुमुखी और पौष्टिक सब्जी है जिसका कई अलग-अलग तरीकों से आनंद लिया जा सकता है। पत्तागोभी को कच्चा या पकाकर खाया जा सकता है। यह स्वस्थ आहार के लिए बहुत अच्छा है।

बंदगोभी/पत्तागोभी का उपयोग विभिन्न प्रकार के व्यंजनों में किया जा सकता है, जिनमें शामिल हैं:

सलाद: पत्तागोभी को कच्चा काटकर सलाद में मिलाया जा सकता है। यह कोलस्लॉ का एक प्रमुख घटक है, एक कटा हुआ सलाद जिसमें अक्सर गाजर और मेयोनेज़ शामिल होते हैं।
सूप: गोभी का उपयोग सूप में स्वाद और पोषण जोड़ने के लिए किया जा सकता है। यह सब्जी सूप में एक लोकप्रिय घटक है।
मुख्य व्यंजन: पत्तागोभी को मुख्य व्यंजन के रूप में पकाया जा सकता है। इसे भाप में पकाया जा सकता है, तला जा सकता है, भूना जा सकता है या स्टू में पकाया जा सकता है। भरवां पत्तागोभी एक लोकप्रिय व्यंजन है जिसमें पत्तागोभी के सिरों को कीमा, चावल और सब्जियों से भरा जाता है।

बंदगोभी/पत्तागोभी में पाये जाने वाले पोषक तत्व ( Minerals Found in Cabbage )

बंदगोभी/पत्तागोभी में पाए जाने वाले कुछ प्रमुख पोषक तत्वों में शामिल हैं जिनमे विभिन्न प्रकार के विटामिन, खनिज और अन्य पोषक तत्व पाए जाते हैं। पत्तागोभी में विटामिन (Vitamins) में विटामिन A, विटामिन B6, विटामिन C और विटामिन K आदि पाए जाते हैं। पत्तागोभी में खनिजों में पोटेशियम (Potassium), मैग्नीशियम (Magnesium), कैल्शियम (Calcium) और आयरन (Iron) आदि पाए जाते हैं। पत्तागोभी में अन्य पोषक तत्वों में फाइबर (Fiber), एंटीऑक्सीडेंट (Antioxidants) और ग्लूकोसिनोलेट (Glucosinolates) भी होते हैं।

बंदगोभी/पत्तागोभी के स्वास्थ्यवर्धक फायदे ( Health Benefits Of Cabbage )

बंदगोभी/पत्तागोभी एक बेहतरीन सब्जी है जो पोषक तत्वों से भरपूर होती है। इसका नियमित सेवन स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद होता है।

हृदय रोग: रक्तचाप को नियंत्रित करने, कोलेस्ट्रॉल कम करने और रक्त वाहिकाओं को स्वस्थ रखने में मदद करता है।
कैंसर: एंटीऑक्सीडेंट और ग्लूकोसिनोलेट कैंसर कोशिकाओं के विकास को रोकने में मदद करते हैं।
मधुमेह: रक्त में शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करता है।
सूजन: सूजन को कम करने और गठिया और अन्य सूजन संबंधी बीमारियों के लक्षणों को कम करने में मदद करता है।
पाचन: पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने, कब्ज को दूर करने और मल त्याग को नियमित करने में मदद करता है।
वजन घटाना: कैलोरी कम और फाइबर अधिक होने के कारण, यह वजन घटाने में मददगार हो सकता है।
त्वचा: विटामिन C और A त्वचा को स्वस्थ रखने और झुर्रियों को कम करने में मदद करते हैं।
हड्डियां: कैल्शियम और मैग्नीशियम हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करते हैं।
रोग प्रतिरोधक क्षमता: विटामिन C रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने में मदद करता है।

बंदगोभी/पत्तागोभी की खेती ( Cabbage Cultivation )

बंदगोभी/पत्तागोभी की खेती में अपनी क्षेत्रीय जलवायु और मिट्टी की स्थिति के अनुसार खेती के तरीकों में बदलाव करें। कृषि विज्ञान केंद्रों या अनुभवी किसानों से सलाह लें।

बंदगोभी/पत्तागोभी की खेती के लिए जलवायु और मिट्टी ( Climate and soil for Cabbage Cultivation )

जलवायु (Climate):

बंदगोभी/पत्तागोभी ठंडी जलवायु में पनपती है। 10 से 25 डिग्री सेल्सियस तापमान इसके लिए आदर्श होता है। यह हल्की ठंड को सहन कर सकती है, लेकिन बहुत अधिक गर्मी या ठंड इसके लिए हानिकारक होती है। 60 से 80% सापेक्ष आर्द्रता इसके लिए उपयुक्त होती है।

मिट्टी (Soil):

बंदगोभी/पत्तागोभी अच्छी जल निकासी वाली, दोमट या बलुई दोमट मिट्टी में अच्छी तरह से उगती है। मिट्टी का पीएच मान 6.0 से 7.0 के बीच होना चाहिए। मिट्टी में कार्बनिक पदार्थों की मात्रा अच्छी होनी चाहिए। मिट्टी को भुरभुरा और नम रखना चाहिए।

बंदगोभी/पत्तागोभी की खेती के लिए खेत की तैयारी ( Field Preparation for Cabbage)

खेत की तैयारी (Field Preparation):

बंदगोभी/पत्तागोभी की खेती के लिए खेत की अच्छी तरह से तैयारी करना महत्वपूर्ण है।
खेत को समतल और भुरभुरा बनाना चाहिए।
मिट्टी में खरपतवारों को हटा देना चाहिए।
मिट्टी की उर्वरता को बनाए रखने के लिए खाद और उर्वरक का प्रयोग करें।

खेत की तैयारी के चरण (Field preparation steps):

जुताई (Ploughing):
खेत की 2 से 3 बार गहरी जुताई करें।
जुताई से मिट्टी भुरभुरी हो जाएगी और जल निकासी भी बेहतर होगी।

खाद और उर्वरक (Manure and Fertilizer):
गोबर की खाद, यूरिया, सुपर फॉस्फेट और पोटाश खाद का उचित मात्रा में प्रयोग करें।
खाद और उर्वरक को मिट्टी में अच्छी तरह से मिला दें।

समतल करना (Leveling):
खेत को समतल कर लें।
समतल करने से पानी का समान वितरण होगा और खरपतवारों को भी नियंत्रित करना आसान होगा।

बुवाई (Sowing):
खेत की तैयारी के बाद बीजों की बुवाई करें।
बीजों को 3 से 4 सेंटीमीटर गहराई और 10 से 15 सेंटीमीटर की दूरी पर बोएं।

कुछ महत्वपूर्ण बातें (Some important points):

खेत की तैयारी करते समय मिट्टी की नमी का ध्यान रखें।
मिट्टी बहुत अधिक गीली या सूखी नहीं होनी चाहिए।
खेत की तैयारी के लिए उचित कृषि यंत्रों का प्रयोग करें।

बंदगोभी/पत्तागोभी की खेती में बीज की मात्रा एवं बोने की विधि ( Seed Quantity and Method of Sowing in Cabbage Cultivation )

बीज की मात्रा (Seed Quantity):

बंदगोभी/पत्तागोभी की खेती में बीज की मात्रा विभिन्न कारकों पर निर्भर करती है, जैसे कि:

किस्म: कुछ किस्मों में दूसरों की तुलना में अधिक बीज की आवश्यकता होती है।
बुवाई का समय: जल्दी बुवाई के लिए अधिक बीज की आवश्यकता होती है।
मिट्टी की उर्वरता: उपजाऊ मिट्टी में कम बीज की आवश्यकता होती है।
सिंचाई की सुविधा: सिंचाई की सुविधा होने पर कम बीज की आवश्यकता होती है।
सामान्य तौर पर, एक हेक्टेयर में 200 से 250 ग्राम बीज की आवश्यकता होती है।

बीजों को बुवाई से पहले 24 घंटे के लिए पानी में भिगो दें।

बोने की विधि (Sowing Method):

बंदगोभी/पत्तागोभी को दो तरीकों से बोया जा सकता है:
बीज बोना:
बीजों को 3 से 4 सेंटीमीटर गहराई और 10 से 15 सेंटीमीटर की दूरी पर बोएं।
बीजों को मिट्टी से ढक दें और हल्के से दबा दें।
रोपाई:
बीजों को पहले नर्सरी में बोया जाता है।
20 से 25 दिनों के बाद, जब रोपों में 4 से 5 पत्तियां आ जाएं, तो उन्हें रोपाई कर दें।
रोपों को 45 से 60 सेंटीमीटर की दूरी पर लगाएं।

कुछ महत्वपूर्ण बातें (Some important points):

बीजों को बोने या रोपाई करने का समय मौसम पर निर्भर करता है।
उत्तरी भारत में, बीजों को जुलाई से अगस्त और सितंबर से अक्टूबर में बोया जाता है।
दक्षिणी भारत में, बीजों को अक्टूबर से नवंबर और फरवरी से मार्च में बोया जाता है।
बुवाई या रोपाई के बाद, मिट्टी को अच्छी तरह से पानी दें।

बंदगोभी/पत्तागोभी की खेती में उर्वरकों की मात्रा ( Amount of Fertilizers in Cabbage Cultivation )

बंदगोभी/पत्तागोभी की खेती में उर्वरकों की मात्रा विभिन्न कारकों पर निर्भर करती है, जैसे कि:

मिट्टी की उर्वरता: उपजाऊ मिट्टी में कम उर्वरक की आवश्यकता होती है।
जलवायु: ठंडी जलवायु में अधिक उर्वरक की आवश्यकता होती है।
किस्म: कुछ किस्मों में दूसरों की तुलना में अधिक उर्वरक की आवश्यकता होती है।
उर्वरक का प्रकार: विभिन्न प्रकार के उर्वरकों में पोषक तत्वों की मात्रा अलग-अलग होती है।

सामान्य तौर पर, बंदगोभी/पत्तागोभी की खेती में निम्नलिखित उर्वरकों की मात्रा की आवश्यकता होती है:

नाइट्रोजन: 100 से 150 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर
फास्फोरस: 50 से 75 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर
पोटेशियम: 75 से 100 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर

उर्वरकों का प्रयोग (Use of Fertilizers):

उर्वरकों का प्रयोग मिट्टी की जांच के बाद ही करना चाहिए।
उर्वरकों को मिट्टी में अच्छी तरह से मिला देना चाहिए।
उर्वरकों का प्रयोग खंडों में करना चाहिए।
पहली बार बुवाई के बाद, दूसरी बार रोपाई के बाद और तीसरी बार फल बनने के समय उर्वरक डालना चाहिए।

कुछ महत्वपूर्ण बातें (Some Important Points):

उर्वरकों का अत्यधिक प्रयोग मिट्टी और पौधों के लिए हानिकारक हो सकता है।
उर्वरकों का प्रयोग करते समय सावधानी बरतें।
उर्वरकों को बच्चों और पालतू जानवरों की पहुंच से दूर रखें।

बंदगोभी/पत्तागोभी की की उन्नत किस्में ( Improved Varieties of Cabbage )

बंदगोभी/पत्तागोभी की कई उन्नत किस्में हैं, जिनमें से कुछ इस प्रकार हैं:

1. पूसा मुक्ता:
यह एक उन्नत किस्म है जो पूसा कृषि विश्वविद्यालय, नई दिल्ली द्वारा विकसित की गई है।
यह किस्म 60 से 70 दिनों में तैयार हो जाती है।
इसका फल गोल, हरा और चमकदार होता है।
यह किस्म रोगों और कीटों के प्रति प्रतिरोधी है।

2. पंत गोभी 1:
यह एक उन्नत किस्म है जो गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर द्वारा विकसित की गई है।
यह किस्म 70 से 80 दिनों में तैयार हो जाती है।
इसका फल गोल, हरा और भारी होता है।
यह किस्म शीतकालीन मौसम के लिए उपयुक्त है।

3. कल्याण गोभी 1:
यह एक उन्नत किस्म है जो भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली द्वारा विकसित की गई है।
यह किस्म 60 से 70 दिनों में तैयार हो जाती है।
इसका फल गोल, हरा और चमकदार होता है।
यह किस्म कम तापमान के प्रति सहनशील है।

4. पूसा ड्रमहेड:
यह एक उन्नत किस्म है जो पूसा कृषि विश्वविद्यालय, नई दिल्ली द्वारा विकसित की गई है।
यह किस्म 80 से 90 दिनों में तैयार हो जाती है।
इसका फल गोल, हरा और भारी होता है।
यह किस्म परिवहन के लिए उपयुक्त है।

5. हरियाणा गोभी 1:
यह एक उन्नत किस्म है जो हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार द्वारा विकसित की गई है।
यह किस्म 60 से 70 दिनों में तैयार हो जाती है।
इसका फल गोल, हरा और चमकदार होता है।
यह किस्म रोगों और कीटों के प्रति प्रतिरोधी है।

इनके अलावा, कुछ अन्य उन्नत किस्में भी हैं, जैसे कि:
गोल्डन एकर
प्राइड ऑफ इंडिया
कोपन हेगन
गंगा
पूसा सिंथेटिक
श्रीगणेश गोल
कावेरी
बजरंग
मिड सीजन मार्केट
सितंबर अर्ली
अर्ली ड्रम हेड
लेट लार्ज ड्रम हेड

इन किस्मों का चयन करते समय, निम्नलिखित बातों का ध्यान रखें:

अपनी क्षेत्रीय जलवायु और मिट्टी की स्थिति
फल का आकार और रंग
फल का वजन
रोगों और कीटों के प्रति प्रतिरोध
बाजार की मांग

बंदगोभी/पत्तागोभी की खेती में सिंचाई ( Irrigation in Cabbage Cultivation )

सिंचाई (Irrigation):

बंदगोभी/पत्तागोभी को नियमित रूप से पानी की आवश्यकता होती है।
मिट्टी को हमेशा नम रखें, लेकिन जलभराव से बचें।
बुवाई के बाद तुरंत सिंचाई करें।
गर्मी के मौसम में 3-4 दिनों के अंतराल पर और सर्दियों में 7-10 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें।
सुबह या शाम के समय सिंचाई करें।
फव्वारा सिंचाई का प्रयोग करें।
जलभराव से बचने के लिए मिट्टी में जल निकासी की व्यवस्था करें।

सिंचाई के कुछ महत्वपूर्ण तरीके:

फव्वारा सिंचाई: यह सिंचाई का सबसे अच्छा तरीका है। इसमें पानी को बारीक बूंदों के रूप में पौधों पर छिड़का जाता है।
क्यारी सिंचाई: इस विधि में, क्यारियों में पानी भरा जाता है।
बाढ़ सिंचाई: इस विधि में, खेत में पानी भर दिया जाता है।

सिंचाई करते समय ध्यान रखने योग्य बातें:

सिंचाई करते समय मिट्टी की नमी का ध्यान रखें।
पानी को पौधों की जड़ों तक पहुंचने दें।
पत्तियों पर पानी न डालें।
जलभराव से बचें।
सिंचाई के लिए स्वच्छ और ताजे पानी का प्रयोग करें।

बंदगोभी/पत्तागोभी की खेती में कीट और रोग ( Pests and Diseases in Cabbage Cultivation ):

तना छेदक, गोभी की इल्ली, माहू और सफेद मक्खी जैसे कीटों से बचाव करें।
क्लब रूट, पत्ता झुलसा रोग, और सफेद सड़न जैसे रोगों से बचाव करें।

बंदगोभी/पत्तागोभी की खेती में कटाई ( Harvesting in Cabbage Cultivation ):

बुवाई के 60 से 90 दिनों के बाद, जब गोभी सख्त और भारी हो जाए, तो कटाई करें।
कटाई के बाद गोभी को छायादार जगह पर रखें।

बंदगोभी/पत्तागोभी की खेती में उत्पादन ( Production in Cabbage Cultivation ):

उचित देखभाल और प्रबंधन से, प्रति हेक्टेयर 20 से 30 टन उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।

बंदगोभी/पत्तागोभी के उत्पादक राज्य ( Producing States of Cabbage )

भारत में बंदगोभी/पत्तागोभी के प्रमुख उत्पादक राज्य हैं:

पश्चिम बंगाल: यह भारत का सबसे बड़ा बंदगोभी/पत्तागोभी उत्पादक राज्य है।
उड़ीसा: यह भारत का दूसरा सबसे बड़ा बंदगोभी/पत्तागोभी उत्पादक राज्य है।
मध्य प्रदेश: यह भारत का तीसरा सबसे बड़ा बंदगोभी/पत्तागोभी उत्पादक राज्य है।
बिहार: यह भारत का चौथा सबसे बड़ा बंदगोभी/पत्तागोभी उत्पादक राज्य है।
असम: यह भारत का पांचवां सबसे बड़ा बंदगोभी/पत्तागोभी उत्पादक राज्य है।

इन राज्यों में बंदगोभी/पत्तागोभी की खेती के लिए अनुकूल जलवायु और मिट्टी है।

भारत में अन्य प्रमुख उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु और केरल आदि हैं।

बंदगोभी/पत्तागोभी की खेती में लागत और कमाई ( Cost and Earnings in Cabbage Farming )

बंदगोभी/पत्तागोभी की खेती एक लाभदायक व्यवसाय है।

बंदगोभी/पत्तागोभी की खेती में लागत:

बंदगोभी/पत्तागोभी की खेती में लागत विभिन्न कारकों पर निर्भर करती है, जैसे कि खेत का आकार, बीज की मात्रा, उर्वरक और कीटनाशक, सिंचाई, मजदूरी और अन्य खर्चे आदि।

सामान्य तौर पर, एक हेक्टेयर में बंदगोभी/पत्तागोभी की खेती में 50,000 से 70,000 रुपये की लागत आती है।

बंदगोभी/पत्तागोभी की खेती में कमाई:

बंदगोभी/पत्तागोभी की खेती में कमाई भी विभिन्न कारकों पर निर्भर करती है, जैसे कि उत्पादन और बाजार भाव आदि।

सामान्य तौर पर, एक हेक्टेयर में बंदगोभी/पत्तागोभी की खेती से 1.5 लाख से 2 लाख रुपये की कमाई होती है।

आप शबला सेवा की मदद कैसे ले सकते हैं? ( How Can You Take Help of Shabla Seva? )

  1. आप हमारी विशेषज्ञ टीम से खेती के बारे में सभी प्रकार की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
  2. हमारे संस्थान के माध्यम से आप बोने के लिए उन्नत किस्म के बीज प्राप्त कर सकते हैं।
  3. आप हमसे टेलीफोन या सोशल मीडिया के माध्यम से भी जानकारी और सुझाव ले सकते हैं।
  4. फसल को कब और कितनी मात्रा में खाद, पानी देना चाहिए, इसकी भी जानकारी ले सकते हैं।
  5. बुवाई से लेकर कटाई तक, किसी भी प्रकार की समस्या उत्पन्न होने पर आप हमारी मदद ले सकते हैं।
  6. फसल कटने के बाद आप फसल को बाजार में बेचने में भी हमारी मदद ले सकते हैं।

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