सहजन का उपयोग, फायदा एवं सहजन की खेती

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सहजन एक बहु उपयोगी पेड़ है। इस पेड़ से जड़ी बूटी वाले गुण पाए जाते है। इसका पौधा लगभग 10 मीटर उचा होता है। इसे हिंदी में सहजना, सुजना, सेंजन और मुनगा आदि नामों से जाना जाता है।

सहजन में पाए जाने वाले पोषक तत्व (Nutrients Found in Drumstick)

इसमें 90 तरह के विटामिन्स ( Vitamin ), 35 तरह के दर्द निवारक गुण और 17 तरह के अमीनो एसिड ( Amino Acids ) पाए जाते हैं। इसमें 300 से अधिक रोगों के रोकथाम के गुण पाए जाते हैं।

सहजन के उपयोग एवं सहजन के स्वास्थ्वर्धक फायदे (Uses of Drumstick and Health Benefits of Drumstick)

यह पेड़ बहुत सारे पोषक तत्वों से भरपूर हैं इसका उपयोग विभिन्न भागो में विभिन्न तरीको से किया जाता है इसकी पत्तियों और फली की सब्जी बनती है। इसका उपयोग पानी को साफ़ करने के लिये भी किया जा सकता है। कभी कभी तो इसका उपयोग जड़ी बूटियों के लिए भी किया जाता है। सहजन का लगभग सभी भाग खाने में प्रयोग किये जाते हैं। सहजन (Drumstick tree) एक बहु उपयोगी पेड़ है। सहजन का लगभग सभी भाग खाने में प्रयोग किये जाते हैं।

1. इसका उपयोग कई जगहों पर लोग सब्जियों के रूप में करते है।

2. इसके लगभग सभी अंग खाये जाते है |

3. इसके बीजों का उपयोग औषधियों में भी किया जाता है।

4. हाथ की सफाई के लिए भी इसका उपयोग किया जाता है

5. इसकी फलियों को आग में भूनकर भी खाया जाता है ।

6. इसके पौधो से गूदा निकालकर कपड़ा और कागज उद्योग के कामो में भी उपयोग किया जाता है।

सहजन की खेती ( Drumstick Cultivation )

सहजन की खेती के लिए मिट्टी , तापमान एवं जलवायु ( Soil, Temperature and Climate for Drumstick Cultivation )

सहजन की खेती सभी प्रकार की मिट्टी में की जाती है। इसकी वृद्धि के लिए गर्म और नमीयुक्त जलवायु और फूल खिलने के लिए सूखा मौसम सटीक है। सहजन के फूल खिलने के लिए 25 से 30 डिग्री तापमान अनुकूल है। मोरिंगा या सहजन का पौधा सूखी बलुई या चिकनी बलुई मिट्टी जिसमे 6.2 से 7.0 पीएच हो, में अच्छी तरह बढ़ता है।

सहजन की उन्नत किस्में ( Improved Varieties of Drumstick )

सहजन की उन्नत किस्में जाफना, चैवाकाचेरी, धनराज, रोहित 1, पीकेएम 1 हैं।

पीकेएम-1 किस्म, सहजन की एक बहुत उन्नत किस्म है। अन्य किस्मों की तुलना में इसकी फली का स्वाद काफी बेहतर होता है। वही इस किस्म के पौधों से लगातार चार साल तक फली प्राप्त होती रहती है। पौधों में 90 से 100 दिनों बाद फूल आना शुरू हो जाता है।

सहजन की खेती के लिए सिंचाई  एवं रोपाई ( Irrigation and Transplanting for Drumstick Cultivation )

इसको ज्यादा पानी की भी जरूरत नहीं होती। सहजन के पौधे की बुआई गड्ढा बनाकर की जाती है। खेत को अच्छी तरह से खर पतवार साफ कर ले फिर 5 मीटर की दूरी पर गढ़ा बना ले। बीज को सीधे तैयार गड्ढ़ो में या फिर पॉलीथीन बैग में तैयार कर गड्ढ़ों में लगाया जा सकता है। सहजन के अच्छे उत्पादन के लिए समय पर सिंचाई करना बहुत ही आवश्यक होता है। 

सहजन की खेती में उर्वरक ( Fertilizer in Drumstick Cultivation )

रोपाई  के तीन महीने के बाद 100 ग्राम यूरिया, 100 ग्राम सुपर फास्फेट, 50 ग्राम पोटाश प्रति गड्ढा की दर से डालें तथा इसके तीन महीने बाद 100 ग्राम यूरिया प्रति गड्ढा दुबार से डालें।

सहजन की खेती में कोटोपचार ( Kotopchar in Drumstick Cultivation )

सहजन में मुख्य रूप से भुआ पिल्लू नामक कीट का प्रकोप होता है। यह कीट पूरे पौधे की पत्तियों को भारी नुकसान करता है तथा आसपास में भी फैल जाता है। इसको नियंत्रण करने के लिए डाइक्लोरोवास (नूभान) 0.5 मिली लीटर एक लीटर पानी में घोलकर पौधों पर छिडक़ाव करना होता है।

सहजन की खेती के करने वाले राज्य ( Drumstick Cultivation States )

सहजन की बाग एक बार लगाने पर 5-8 साल तक फसल मिलती है। सहजन की पत्तियां और फलियों के साथ बीज की भी काफी मांग रहती है। सहजन की खेती अभी तक आंध्रप्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक और मध्य प्रदेश में ज्यादा होती थी, लेकिन देश में आयुर्वेदिक दवाओं का इस्तेमाल बढ़ने के साथ सरकार कई योजनाओं के जरिए इन्हें उत्तर प्रदेश, झारखंड जैसे राज्यों में भी बढावा दिया जा रहा है। 

सहजन की खेती में लागत और कमाई (Cost and Earning in Drumstick Cultivation)

इसे 1 एकड़ की जमीन में भी लगाते हैं, तो इससे आप प्रतिवर्ष 6 लाख रूपये तक की कमाई आसानी से कर सकते हैं। इस तरह से सहजन की खेती करने के व्यवसाय से आप कम पैसों में अधिक फायदा प्राप्त कर सकते हैं। यह काफी लाभकारी पौधा होता हैं क्योंकि इसमें औषधीय गुण पाए जाते हैं।

डॉ अविनाश कुमार का सहजन की खेती में अनुभव (Dr. Avinash Kumar’s Experience for Drumstick Cultivation)

गोरखपुर के अविनाश कुमार ने 3 साल पहले  2020-2021 में इसकी खेती शुरू की है। उन्होंने बताया कि 15 हजार रुपए में तीन से चार किलो बीज और खेत की जुताई और बीज रोपाई में मजदूरी शामिल होगी। वे खेती में देसी खाद का प्रयोग करते हैं क्योंकि खेती प्राकृतिक तरीके से करते हैं। उन्होंने बताया कि एक साल में फली आने लगती है। आजकल बाजार में इसकी पत्तियों की काफी मांग है। इसकी पत्तियों की पहली कटाई 6 माह में की जाती है। उन्होंने बताया कि उनकी संस्था शबला सेवा संस्थान इसकी पत्तियां भी खरीद लेती है।

आप शबला सेवा की मदद कैसे ले सकते हैं? ( How Can You Take Help of Shabla Seva? )

  1. आप हमारी विशेषज्ञ टीम से खेती के बारे में सभी प्रकार की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
  2. हमारे संस्थान के माध्यम से आप बोने के लिए उन्नत किस्म के बीज प्राप्त कर सकते हैं।
  3. आप हमसे टेलीफोन या सोशल मीडिया के माध्यम से भी जानकारी और सुझाव ले सकते हैं।
  4. फसल को कब और कितनी मात्रा में खाद, पानी देना चाहिए, इसकी भी जानकारी ले सकते हैं।
  5. बुवाई से लेकर कटाई तक, किसी भी प्रकार की समस्या उत्पन्न होने पर आप हमारी मदद ले सकते हैं।
  6. फसल कटने के बाद आप फसल को बाजार में बेचने में भी हमारी मदद ले सकते हैं।

संपर्क

अधिक जानकारी के लिए हमसे संपर्क करें +91 9335045599 ( शबला सेवा )

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