मैथी का उपयोग, फायदा एवं मैथी की खेती

kisan-credit-card

मैथी (Fenugreek), एक फूल वाला पौधा है जो फैबेसी (Fabaceae) परिवार से संबंधित है। मध्य युग में, मैथी का उपयोग यूरोप में औषधीय और पाक उद्देश्यों के लिए किया जाता था। मैथी को “पवित्र घास” माना जाता था और इसका उपयोग धार्मिक अनुष्ठानों में किया जाता था।

मैथी का उपयोग विभिन्न प्रकार के व्यंजनों में किया जाता है, जैसे कि करी, सब्जियां, और पराठे। आज, मैथी का उपयोग दुनिया भर में पाक, औषधीय और स्वास्थ्य पूरक उद्देश्यों के लिए किया जाता है। मैथी के बीजों से चाय बनाई जा सकती है। मैथी के विभिन्न भागों का उपयोग किया जाता है जैसे कि पत्तियां, बीज और अंकुरित बीज आदि।

  1. पत्तियां: ताजी पत्तियों का उपयोग सब्जी बनाने में किया जाता है, और सूखे पत्तों का उपयोग मसाले के रूप में किया जाता है।
  2. बीज: बीजों का उपयोग मसाले के रूप में, दवा के रूप में और आहार अनुपूरक के रूप में किया जाता है।
  3. अंकुरित बीज: अंकुरित बीजों का उपयोग सलाद और सैंडविच में किया जाता है।

मैथी में पाए जाने वाले पोषक तत्व ( Nutrients found in Fenugreek )

मैथी एक पौष्टिक जड़ी बूटी है जो कई आवश्यक पोषक तत्वों से भरपूर होती है। मैथी में विटामिन (Vitamins) में विटामिन C, विटामिन K और विटामिन B6 होता है। मैथी में खनिजों में मैग्नीशियम (Magnesium), पोटेशियम (Potassium), आयरन (Iron) और कैल्शियम (Calcium) आदि होता है। मैथी में अन्य पोषक तत्वों में फाइबर (Fiber), प्रोटीन (Protein), फोलेट (Folate)  और एंटीऑक्सीडेंट (Antioxidants) पाए जाते हैं।

मैथी के सेवन से होने वाले स्वास्थ्य लाभ ( Health Benefits of Consuming Fenugreek )

मैथी कई स्वास्थ्य लाभ प्रदान करता है।

  1. मैथी में फाइबर होता है जो पाचन क्रिया को बेहतर बनाने में मदद करता है।
  2. मैथी रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में मदद कर सकती है।
  3. मैथी कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में मदद कर सकती है।
  4. मैथी वजन घटाने में सहायक हो सकती है।
  5. मैथी स्तनपान कराने वाली महिलाओं में दूध उत्पादन को बढ़ावा दे सकती है।
  6. मैथी बालों के विकास को बढ़ावा देने में मदद कर सकती है।
  7. मैथी त्वचा के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है।

मैथी की खेती ( Fenugreek Cultivation )

मैथी भारत, उत्तरी अफ्रीका और भूमध्यसागरीय क्षेत्र में व्यापक रूप से उगाया जाता है। मैथी उगाना अपेक्षाकृत आसान है और इसे विभिन्न प्रकार की मिट्टी और जलवायु में उगाया जा सकता है।

मैथी की खेती में जलवायु ( Climate in Fenugreek Cultivation )

मैथी ठंडी और शुष्क जलवायु में अच्छी तरह से उगती है। मैथी को 10 से 25 डिग्री सेल्सियस तापमान की आवश्यकता होती है। मैथी को अधिक वर्षा की आवश्यकता नहीं होती है।

मैथी की खेती में भूमि ( Land for Fenugreek Cultivation )

मैथी को दोमट, बलुई दोमट और रेतीली दोमट मिट्टी में उगाया जा सकता है। मिट्टी का पीएच मान 6.0 से 7.0 होना चाहिए। मिट्टी अच्छी तरह से सूखा होनी चाहिए।

मैथी की उन्नत किस्में ( Improved Varieties of Fenugreek )

मैथी की खेती में मैथी की अच्छी किस्म के लिए किसान सलाहकार से सलाह लें। मैथी की उन्नत किस्मों में कसूरी मेथी, पूसा अर्ली बंचिंग, हिसार सोनाली, राजेंद्र क्रांति, एम् एच-103, पंत रागनी, सी.ओ-1, आर.ऍम.टी-1, आर.ऍम.टी-143 आदि हैं।

मैथी की खेती में बुवाई ( Sowing in Fenugreek Cultivation )

मेथी की बुवाई अक्टूबर-नवंबर में की जाती है। बीजों को 2 से 3 सेंटीमीटर गहराई और 10 से 15 सेंटीमीटर की दूरी पर बोया जाता है। बुवाई के बाद खेत में हल्की सिंचाई की जाती है। मैथी की खेती में बुवाई छिटकवा विधि, लाइन में दोनों तरीके से कर सकते हैं।

मैथी की खेती में खाद और उर्वरक ( Manure and Fertilizer in Fenugreek Cultivation )

मैथी की खेती में खाद में 10 से 15 टन गोबर की खाद प्रति हेक्टेयर की दर से दी जाती है। मैथी की खेती में उर्वरक में 20 से 30 किलोग्राम नाइट्रोजन, 40 से 50 किलोग्राम फास्फोरस और 20 से 30 किलोग्राम पोटेशियम प्रति हेक्टेयर की दर से भी दिया जाता है।

मैथी की खेती में सिंचाई ( Irrigation in Fenugreek Cultivation )

मैथी को कम सिंचाई की आवश्यकता होती है। पहली सिंचाई बुवाई के बाद की जाती है। बाद की सिंचाई 10 से 15 दिनों के अंतराल पर की जाती है।

मैथी की खेती में निराई-गुड़ाई ( Weeding in Fenugreek Cultivation )

खेत में खरपतवारों को नियमित रूप से हटाना चाहिए। निराई-गुड़ाई 2 से 3 बार की जाती है।

मैथी की खेती में रोग और कीट ( Diseases and Pests in Fenugreek Cultivation )

मैथी में जड़ सड़न, पत्ती धब्बा, और माहू जैसे रोग और कीट लगते हैं। इन रोगों और कीटों से बचाव के लिए उचित उपाय किए जाने चाहिए।

मैथी की खेती में कटाई ( Harvesting in Fenugreek Cultivation )

पत्तियों के लिए कटाई 30 से 40 दिन और बीजों के लिए 90 से 120 दिन में की जाती है। जब पौधे फूलने लगते हैं तो कटाई कर ली जाती है। 

मैथी की खेती में उपज ( Yield in Fenugreek Cultivation )

मैथी की उपज 10 से 15 क्विंटल प्रति हेक्टेयर होती है।

मैथी की खेती में लाभ ( Benefits of Fenugreek Cultivation )

मैथी की खेती कम लागत में की जा सकती है। मैथी की खेती कम समय में लाभकारी होती है।

मैथी की खेती करने वाले राज्य ( Fenugreek Cultivating States )

भारत में मेथी की खेती बिहार, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक और राजस्थान में की जाती है। इन राज्यों के अलावा मेथी की खेती करने वाले राज्य निम्नलिखित है।

राजस्थान: यह भारत में मेथी का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है। राजस्थान में मेथी की खेती मुख्य रूप से नागौर, सीकर, और बीकानेर जिलों में होती है।

गुजरात: यह भारत में मेथी का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है। गुजरात में मेथी की खेती मुख्य रूप से बनासकांठा, साबरकांठा, और कच्छ जिलों में होती है।

मध्य प्रदेश: यह भारत में मेथी का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है। मध्य प्रदेश में मेथी की खेती मुख्य रूप से ग्वालियर, चंबल, और शिवपुरी जिलों में होती है।

उत्तर प्रदेश: यह भारत में मेथी का चौथा सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है। उत्तर प्रदेश में मेथी की खेती मुख्य रूप से आगरा, मथुरा, और कानपुर जिलों में होती है।

पंजाब: यह भारत में मेथी का पांचवां सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है। पंजाब में मेथी की खेती मुख्य रूप से लुधियाना, फिरोजपुर, और बठिंडा जिलों में होती है।

मैथी की खेती में लागत और कमाई ( Cost and Earning in Fenugreek Cultivation )

मैथी की खेती में खाद, उर्वरक, बीज, सिंचाई, कटाई, मढ़ाई और अन्य सारे खर्चे मिलाकर कुल लागत 80 से 90 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर आती है।

मैथी की खेती में पत्तियां, बीज आदि मिलाकर कमाई 250000 से 350000 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर होती है।

आप शबला सेवा की मदद कैसे ले सकते हैं? ( How Can You Take Help of Shabla Seva? )

  1. आप हमारी विशेषज्ञ टीम से खेती के बारे में सभी प्रकार की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
  2. हमारे संस्थान के माध्यम से आप बोने के लिए उन्नत किस्म के बीज प्राप्त कर सकते हैं।
  3. आप हमसे टेलीफोन या सोशल मीडिया के माध्यम से भी जानकारी और सुझाव ले सकते हैं।
  4. फसल को कब और कितनी मात्रा में खाद, पानी देना चाहिए, इसकी भी जानकारी ले सकते हैं।
  5. बुवाई से लेकर कटाई तक, किसी भी प्रकार की समस्या उत्पन्न होने पर आप हमारी मदद ले सकते हैं।
  6. फसल कटने के बाद आप फसल को बाजार में बेचने में भी हमारी मदद ले सकते हैं।

संपर्क

अधिक जानकारी के लिए हमसे संपर्क करें +91 9335045599 ( शबला सेवा )

आप नीचे व्हाट्सएप्प (WhatsApp) पर क्लिक करके हमे अपना सन्देश भेज सकते है।

Become our Distributor Today!

Get engaged as our distributor of our high quality natural agricultural products & increase your profits.

Translate »