लहसुन का उपयोग, फायदा एवं लहसुन की खेती

लहसुन (Garlic), जिसे एलियम सैटिवम (Allium Sativum) के नाम से भी जाना जाता है, सदियों से अपनी औषधीय गुणों और स्वादिष्ट स्वाद के लिए जाना जाता रहा है। यह भारतीय व्यंजनों में एक महत्वपूर्ण घटक है और इसका उपयोग विभिन्न प्रकार के व्यंजनों में किया जाता है, जैसे कि करी, सूप, चटनी और अचार।

लहसुन और प्याज, दोनों ही एलियम (Allium) प्रजाति के सदस्य हैं, जो अपने तीखे स्वाद और विशिष्ट गंध के लिए जाने जाते हैं। लहसुन को कच्चा, पकाकर या पूरक के रूप में खाया जा सकता है। इसका उपयोग विभिन्न प्रकार के व्यंजनों में स्वाद और सुगंध जोड़ने के लिए किया जा सकता है। लहसुन का तेल भी कई स्वास्थ्य लाभ प्रदान करता है।

लहसुन छोटी, लौंग जैसी कलियों का समूह होता है। लहसुन का उपयोग कच्चा, पका हुआ, तला हुआ, चटनी, अचार में इस्तेमाल होता है। लहसुन एक बहुमुखी और लाभकारी घटक है जो आपके स्वास्थ्य और स्वाद दोनों को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है।

लहसुन में पाए जाने पोषक तत्व ( Nutrients Found in Garlic )

लहसुन में कई प्रकार के पोषक तत्व होते हैं जो इसे स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद बनाते हैं। लहसुन विटामिन (Vitamin) B6, विटामिन C और विटामिन A का एक अच्छा स्रोत है। लहसुन में मैंगनीज (Manganese), सेलेनियम (Selenium), फास्फोरस (Phosphorus), पोटेशियम (Potassium) और कैल्शियम (Calcium) जैसे खनिजों की अच्छी मात्रा होती है।

लहसुन में एलिसिन (Allicin) और डायलिल डिसुल्फाइड (Diallyl Disulfide) सहित कई अन्य यौगिक होते हैं जिनके स्वास्थ्य लाभ हो सकते हैं। लहसुन एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता है। लहसुन में प्रोटीन (Proteins), वसा (Fats) और कार्बोहाइड्रेट (Carbohydrates) भी होते हैं।

लहसुन के स्वास्थवर्धक फायदे एवं उपयोग ( Health Benefits and Uses of Garlic )

लहसुन के कई स्वास्थ्य लाभ हैं।

लहसुन रक्तचाप को कम करने में मदद कर सकता है।
लहसुन हृदय रोग के खतरे को कम करने में मदद कर सकता है।
लहसुन “खराब” (एलडीएल) कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में मदद कर सकता है।
लहसुन कुछ प्रकार के कैंसर के खतरे को कम करने में मदद कर सकता है।
लहसुन संक्रमण से लड़ने में मदद कर सकता है।
लहसुन में सूजन कम करने वाले गुण होते हैं।
लहसुन मस्तिष्क स्वास्थ्य में सुधार और उम्र से संबंधित मानसिक गिरावट को रोकने में मदद कर सकता है।

लहसुन का उपयोग

लहसुन का उपयोग विभिन्न व्यंजनों में किया जा सकता है। इसे कच्चा, पका हुआ, या भुना हुआ खाया जा सकता है।
लहसुन को सूप, स्टू, सॉस, ड्रेसिंग और मरीनेड में भी मिलाया जा सकता है।
लहसुन की खुराक के रूप में भी उपलब्ध है। लहसुन की खुराक लेने से पहले अपने डॉक्टर से बात करना महत्वपूर्ण है।

लहसुन की खेती ( Garlic Cultivation )

लहसुन की खेती के लिए न अधिक गर्मी का मौसम और न ही अधिक ठंड का मौसम उपयुक्त होता है।

अक्टूबर का महीना लहसुन की बुवाई के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। इस दौरान मौसम सुहावना होता है, जो लहसुन के कंद निर्माण के लिए अनुकूल होता है।
उत्तर भारत में लहसुन की बुवाई सितंबर से अक्टूबर के बीच की जाती है।
दक्षिण भारत में लहसुन की बुवाई अगस्त से सितंबर के बीच की जाती है।

लहसुन की खेती के लिए मिटटी, तापमान एवं जलवायु ( Soil, Temperature and Climate for Garlic Cultivation )

लहसुन के लिए समशीतोष्ण जलवायु सबसे अच्छी होती है।
ठंडी और शुष्क जलवायु भी लहसुन की खेती के लिए उपयुक्त होती है।
अत्यधिक गर्मी और बारिश लहसुन की फसल को नुकसान पहुंचा सकती है।

लहसुन के अंकुरण के लिए 15 से 20 डिग्री सेल्सियस का तापमान उपयुक्त होता है।
लहसुन की वृद्धि के लिए 10 से 25 डिग्री सेल्सियस का तापमान उपयुक्त होता है।

लहसुन की खेती के लिए दोमट मिट्टी सबसे अच्छी होती है।
मिट्टी का pH 6 से 7.5 के बीच होना चाहिए।
मिट्टी में जैविक खाद की अच्छी मात्रा होनी चाहिए।

लहसुन की खेती की तैयारी एवं बुवाई ( Preparation and Sowing of Garlic Cultivation )

खेत को 2 से 3 बार गहरी जुताई करके भुरभुरा बना लें।
जैविक खाद जैसे कि गोबर की खाद, कम्पोस्ट खाद आदि मिलाकर मिट्टी को उपजाऊ बना लें।

लहसुन की बुवाई कंद से की जाती है।
बुवाई के लिए स्वस्थ और रोगमुक्त कंदों का चयन करना चाहिए।
कंदों को 10 से 15 सेंटीमीटर की दूरी पर बोया जाना चाहिए।

स्वस्थ और रोगमुक्त कंदों का चयन करें।
बड़े कंदों को 2 से 3 टुकड़ों में काट लें।
कटे हुए कंदों को बुवाई से 24 घंटे पहले फफूंदनाशक के घोल में भिगोकर सुखा लें।

कंदों को 10 से 15 सेंटीमीटर की गहराई और 10 से 15 सेंटीमीटर की दूरी पर बोयें।
कंदों को अंकुर वाले सिरे को ऊपर की ओर रखकर बोयें।
बुवाई के बाद हल्की सिंचाई करें।

उत्तर भारत में लहसुन की बुवाई सितंबर से अक्टूबर के बीच की जाती है।
दक्षिण भारत में लहसुन की बुवाई अगस्त से सितंबर के बीच की जाती है।

लहसुन की उन्नत किस्में ( Improved Varieties of Garlic )

अपनी क्षेत्रीय जलवायु के लिए उपयुक्त किस्म का चयन करें। रोगों के प्रतिरोधी किस्मों का चयन करें।

भारत में लहसुन की कई उन्नत किस्में विकसित की गई हैं, जिनमें से कुछ प्रमुख किस्में निम्नलिखित हैं:

1. यमुना सफेद (जी-1):
यह किस्म उत्तर भारत के लिए उपयुक्त है।
यह जल्दी पकने वाली किस्म है, जो बुवाई के 150 से 160 दिन में तैयार हो जाती है।
इस किस्म के कंद सफेद और मोटे होते हैं।
इसकी औसत उपज प्रति हेक्टेयर 150 से 160 क्विंटल होती है।

2. एग्रीफाउंड सफेद (जी-41):
यह किस्म देशभर में उगाई जा सकती है।
यह मध्यम पकने वाली किस्म है, जो बुवाई के 165 से 170 दिन में तैयार हो जाती है।
इस किस्म के कंद सफेद, ठोस और मध्यम आकार के होते हैं।
इसकी औसत उपज प्रति हेक्टेयर 140 से 150 क्विंटल होती है।

3. लहसुन-6:
यह किस्म दक्षिण भारत के लिए उपयुक्त है।
यह जल्दी पकने वाली किस्म है, जो बुवाई के 135 से 140 दिन में तैयार हो जाती है।
इस किस्म के कंद सफेद और मोटे होते हैं।
इसकी औसत उपज प्रति हेक्टेयर 120 से 130 क्विंटल होती है।

4. एन-5:
यह किस्म देशभर में उगाई जा सकती है।
यह मध्यम पकने वाली किस्म है, जो बुवाई के 160 से 170 दिन में तैयार हो जाती है।
इस किस्म के कंद सफेद, मोटे और चमकदार होते हैं।
इसकी औसत उपज प्रति हेक्टेयर 150 से 160 क्विंटल होती है।

5. के-2:
यह किस्म उत्तर भारत के लिए उपयुक्त है।
यह जल्दी पकने वाली किस्म है, जो बुवाई के 145 से 150 दिन में तैयार हो जाती है।
इस किस्म के कंद सफेद, मोटे और लम्बे होते हैं।
इसकी औसत उपज प्रति हेक्टेयर 130 से 140 क्विंटल होती है।

इन उन्नत किस्मों के अलावा, लहसुन की कई अन्य किस्में भी उपलब्ध हैं। अपनी क्षेत्रीय जलवायु, मिट्टी और बाजार की मांग के अनुसार उपयुक्त किस्म का चयन करना महत्वपूर्ण है।

लहसुन की खेती में बीज की मात्रा एवं बीज उपचार ( Seed Quantity and Seed Treatment in Garlic Cultivation )

लहसुन की बुवाई से पहले बीज उपचार करना अत्यंत आवश्यक होता है। बीज उपचार से बीज जनित रोगों से बचाव होता है और अंकुरण दर में वृद्धि होती है। लहसुन की खेती में उचित मात्रा में बीज का उपयोग करना और बीज उपचार करना महत्वपूर्ण है। इससे अच्छी पैदावार और गुणवत्तापूर्ण लहसुन प्राप्त होता है।

बीज की मात्रा:

लहसुन की खेती में बीज की मात्रा मिट्टी की उर्वरता, जलवायु, किस्म और बुवाई की विधि पर निर्भर करती है।

सामान्यतः, प्रति हेक्टेयर निम्नलिखित मात्रा में बीज की आवश्यकता होती है:

दोमट मिट्टी: 1200 से 1500 किलोग्राम
रेतीली मिट्टी: 1000 से 1200 किलोग्राम
भारी मिट्टी: 1500 से 1800 किलोग्राम

लहसुन की खेती में सिंचाई एवं खाद उर्वरक  ( Irrigation and Manure Fertilizer in Garlic cultivation )

लहसुन की फसल को नियमित सिंचाई की आवश्यकता होती है। मिट्टी की नमी को बनाए रखना महत्वपूर्ण है।

सिंचाई की विधियाँ:
चल या ड्रिप सिंचाई सबसे उपयुक्त विधियाँ हैं।
क्यारियों में हल्की सिंचाई करें।
अंकुरण और फूल आने के समय अधिक सिंचाई की आवश्यकता होती है।
बारिश के मौसम में सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती है।

खाद:
गोबर की खाद: 20 से 25 टन प्रति हेक्टेयर
कम्पोस्ट खाद: 10 से 15 टन प्रति हेक्टेयर

उर्वरक:
यूरिया: 100 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर

खाद और उर्वरक देने की विधि:

खाद को बुवाई से पहले मिट्टी में अच्छी तरह मिलाकर दे दें।
यूरिया को बुवाई के 30 दिन बाद और फूल आने के समय दो बार दें।

लहसुन की खेती में कीट और रोग ( Pests and Diseases in Garlic Cultivation )

लहसुन की फसल को कई प्रकार के कीटों और रोगों का खतरा होता है।
उचित कीटनाशक और रोगनाशकों का उपयोग करके इनसे बचाव किया जा सकता है।

लहसुन की खेती में कटाई ( Harvesting in Garlic Cultivation )

लहसुन की फसल बुवाई के 4 से 5 महीने बाद तैयार हो जाती है।
पत्तियां पीली पड़ने लगें और कंद सूखने लगें तो फसल को काट लेना चाहिए।

लहसुन की खेती में उपज ( Yield in Garlic Cultivation )

लहसुन की औसत उपज प्रति हेक्टेयर 10 से 15 टन होती है।

लहसुन के उत्पादक राज्य ( Garlic Producing States )

लहसुन भारत में एक महत्वपूर्ण मसाला फसल है। मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र भारत के प्रमुख लहसुन उत्पादक राज्य हैं।

मध्य प्रदेश भारत का सबसे बड़ा लहसुन उत्पादक राज्य है।
राजस्थान भारत का दूसरा सबसे बड़ा लहसुन उत्पादक राज्य है।
गुजरात भारत का तीसरा सबसे बड़ा लहसुन उत्पादक राज्य है।
उत्तर प्रदेश भारत का चौथा सबसे बड़ा लहसुन उत्पादक राज्य है।
महाराष्ट्र भारत का पांचवां सबसे बड़ा लहसुन उत्पादक राज्य है।

इन राज्यों के अलावा, लहसुन का उत्पादन उड़ीसा, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, हरियाणा, पंजाब और पश्चिम बंगाल राज्यों में भी होता है।

लहसुन की खेती लागत एवं कमाई ( Cost and Earning in Garlic Cultivation )

लहसुन की खेती में लागत कई कारकों पर निर्भर करती है। औसतन, एक हेक्टेयर लहसुन की खेती में 50,000 से 1 लाख रुपये तक की लागत आ सकती है।
लहसुन की कमाई भी कई कारकों पर निर्भर करती है। अच्छी पैदावार और उचित बिक्री रणनीति के साथ, एक हेक्टेयर लहसुन से 2 लाख रुपये से 5 लाख रुपये तक का मुनाफा कमाया जा सकता है।

लहसुन एक कम अवधि वाली फसल है, जिससे किसानों को साल में दो बार फसल मिल सकती है। लहसुन की मांग साल भर बनी रहती है, जिससे किसानों को अच्छा बाजार मिलता है।
लहसुन औषधीय गुणों से भरपूर होता है, जिसके कारण इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। सरकार लहसुन की खेती को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चला रही है।

आप शबला सेवा की मदद कैसे ले सकते हैं? ( How Can You Take Help of Shabla Seva? )

  1. आप हमारी विशेषज्ञ टीम से खेती के बारे में सभी प्रकार की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
  2. हमारे संस्थान के माध्यम से आप बोने के लिए उन्नत किस्म के बीज प्राप्त कर सकते हैं।
  3. आप हमसे टेलीफोन या सोशल मीडिया के माध्यम से भी जानकारी और सुझाव ले सकते हैं।
  4. फसल को कब और कितनी मात्रा में खाद, पानी देना चाहिए, इसकी भी जानकारी ले सकते हैं।
  5. बुवाई से लेकर कटाई तक, किसी भी प्रकार की समस्या उत्पन्न होने पर आप हमारी मदद ले सकते हैं।
  6. फसल कटने के बाद आप फसल को बाजार में बेचने में भी हमारी मदद ले सकते हैं।

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