लहसुन का उपयोग, फायदा एवं लहसुन की खेती

kisan-credit-card

लहसुन प्याज एक प्रजाति है। लहसुन पुरातन काल से दोनों, पाकावौषधीय प्रयोजनों के लिए प्रयोग किया जा रहा है। इसकी एक विशेष गन्ध होती है, तथा स्वाद तीक्ष्ण होता है जो पकाने से काफी हद तक बदल कर मृदुल हो जाता है। भारत के ही आयुर्वेदाचार्य की बदौलत लहसुन के गुणों को वैज्ञानिकों ने कसौटी पर कसा तथा यूनान, मिस्र आदि देश के लोगों को इसके दिव्य गुणों से परिचित करवाया। वहीं से यह कंद अपने अमृतोपम गुणों के कारण दुनियाभर में लोकप्रिय हो गया। भोजन में लहसुन का प्रयोग मनुष्य प्राचीन समय से ही करता आ रहा है।

लहसुन में पाए जाने पोषक तत्व ( Nutrients Found in Garlic )

लहसुन  में प्रोटीन ( Protein ), वसा ( Fat ), कार्बोज ( Carbohydrates ), खनिज पदार्थ ( Minerals ), चूना ( Lime ), लोहा ( Iron ) होता है। इसके अतिरिक्त विटामिन ( Vitamin ) A, विटामिन B , विटामिन C एवं सल्फ्यूरिक एसिड ( Sulphuric Acid ) विशेष मात्रा में पाई जाती है।

लहसुन के स्वास्थवर्धक फायदे एवं उपयोग ( Health Benefits and Uses of Garlic )

लहसुन को अपने रोजमर्रा के भोजन में शामिल करना बेहद आसान है। लहसुन बहुत सारे स्वादिष्ट पकवानों, खासतौर पर सूप और सॉस में डाला जाता है। लहसुन का तीखा स्वाद सब्जियों में घुलकर जबरदस्त पंच देता है। लहसुन का सेवन कई तरीके से किया जा सकता है। आप उसे साबुत निगल सकते हैं या फिर पाउडर, उसका सत और तेल निकालकर भी इस्तेमाल कर सकते हैं। हालांकि, ये बार भी ध्यान में रखनी चाहिए कि लहसुन के सेवन के कुछ निगेटिव पहलू भी हैं। अधिक लहसुन खाने से आपके मुंह से बदबू आ सकती है। इसके अलावा कुछ लोगों को इससे एलर्जी भी होती है। अगर आपको खून से जुड़ी बीमारियां हैं या फिर आप खून को पतला करने की दवाएं ले रहे हों, तो लहसुन का सेवन बढ़ाने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। वैसे आप लहसुन को सब्जी में डालकर खा सकते हैं। लहसुन की चटनी या अचार बना सकते हैं। लहसुन का हलवा बना सकते हैं या फिर उसे भूनकर या फिर साबुत भी खा सकते हैं। 

    1.   डॉक्टर हार्ट से जुड़ी समस्याएं होने पर लहसुन के सेवन की सलाह देते हैं क्योंकि लहसुन खून को पतला बनाए रखने में मदद करता है।
    2.   लहसुन का सेवन करने वालों को सर्दी-जुकाम कम होता है।
    3.   लहसुन के पुराने सत की हाई डोज रोज लेने से जुखाम-बुखार से आप जल्दी ठीक होते हैं।
    4.   लहसुन खाने से हाइपरटेंशन और हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों की सेहत में सुधार आता है
    5.   लहसुन के सेवन से कुल और एलडीएल कॉलेस्ट्रॉल में गिरावट देखी गई है।
    6.   इसके सेवन से अल्जाइमर और डिमेंशिया के खतरे से भी बचाव होता है।
    7.   संक्रामक बीमारियों में लहसुन बेहद कारगर तरीके से काम करता है। ये कहा जा सकता है कि लहसुन आपकी उम्र बढ़ाने में मदद करता है। 
    8.   लहसुन हमारे शरीर से लेड का जहर और उससे होने वाली समस्याओं से निपटने में बेहद कारगर है। 
    9.   लहसुन के सेवन से महिलाओं में एस्ट्रोजेन का लेवल सुधरता है। इससे हड्डियों की सेहत में भी सुधार देखा गया है।

लहसुन की खेती ( Garlic Cultivation )

लहसुन की खेती के लिए न अधिक गर्मी का मौसम हो और न ही अधिक ठंड का मौसम हो। ऐसे में अक्टूबर का महीना लहसुन की खेती के लिए उपयुक्त माना जाता है। इस मौसम में लहसुन का कंद निर्माण बेहतर होता है।

लहसुन की खेती के लिए मिटटी, तापमान एवं जलवायु ( Soil, Temperature and Climate for Garlic cultivation )

इसकी खेती के लिए दोमट भूमि अच्छी रहती है। लहसुन की खेती हेतु ज्यादा गर्म जलवायु ठीक नहीं रहती, इसकी खेती के लिए थोड़ी शीतल जलवायु को बेहतर बताया गया है। मिटटी का सही चयन भी इस फसल के लिए जरूरी है। लहसुन की खेती को दोमट या फिर चिकनी मिट्टी पर किया जा सकता है, ये दोनों मिट्टियां सर्वश्रेष्ठ होती हैं। इसकी खेती को क्षेत्र के अनुकूल मौसम के अनुसार की जाती है। उत्तर भारत क्षेत्र की बात की जाए तो यहां अक्टूबर-नवम्बर माह में लहसुन की बुवाई होती है। वहीँ पर्वतीय क्षेत्रों में मार्च-अप्रैल माह में बुवाई का समय होता है। 

लहसुन की खेती की तैयारी एवं बुवाई ( Preparation and Sowing of Garlic cultivation )

यदि आप लहसुन की बुवाई करने जा रहे हैं तो यह जांच लें कि खेत में नमी तो नहीं हैं, ऐसे स्थिति होने पर पहले खेत का पलेवा ज़रूर कर दें। समतल क्यारियों में, मेंड़ों पर या पौधशाला में आप लहसुन की कलियों को रोपितकर इसकी खेती कर सकते हैं| पौधशाला में लहसुन की खेती का ज्यादा प्रचलन नहीं है, ज्यदातर क्षेत्रों में समतल क्यारियों और मेंड़ों पर ही इसकी खेती की जाती है| यदि आप समलत क्यारियों में लहसुन की खेती करते हैं तो इसकी कलियों को 12 सेंटीमीटर लाइन से लाइन तथा 8-10 सेंटीमीटर पौधे से पौधे की दूरी पर रोपित करना चाहिए| यदि अगर आप मेंड़ों पर इसकी फसल उगाना चाहते हैं तो 45-50 सेंटीमीटर चौड़ी मेंड़ बनाइए, जिसके बीच सिंचाई एवं जल निकलने हेतु 30 सेंटीमीटर की नाली जरूर बनाएं| बुवाई करते वक़्त मेंड़ों पर कलियों के बीच 12 सेंटीमीटर की दूरी अवश्य अवश्य रखिए|

लहसुन की उन्नत किस्में ( Improved Varieties of Garlic )

यमुना सफेद 1 (जी-1)

यमुना सफेद 2 (जी-50)

यमुना सफेद 3 (जी-282)

यमुना सफेद 4 (जी-323)

एग्रीफाउंड सफेद, एग्रीफाउंड पर्वती

लहसुन की खेती में बीज की मात्रा एवं बीज उपचार ( Seed Quantity and Seed Treatment in Garlic cultivation )

लहसुन की फसल में क्लोवे रोटीग को रोकने के लिए, रोपण के समय में मॅनकोझेब या कार्बेन्डाजिम + मॅनकोझेब @ 2 से 2.5 ग्राम प्रति 1 किलो बीज के साथ उपचार करें।

लहसुन की खेती में सिंचाई एवं खाद उर्वरक  ( Irrigation and Manure Fertilizer in Garlic cultivation )

लहसुन की खेती के लिए समय पर सिचाई करना अतिआवश्यक है| बुवाई के समय यदि खेत नमी नहीं है तो आप बुवाई के कुछ देर बाद ही हल्की सिंचाई कर सकते हैं, वहीँ अगर खेत में नमी है तो बुवाई के 1 सप्ताह बाद सिंचाई करना शुरू करें| नमी के अनुसार सिंचाई करते रहें| जब लहसुन की फसल परिपक्व हो जाये टैब खुदाई के 9-10 दिन पहले सिंचाई करना बंद कर दें| लहसुन की अच्छी फसल के लिए अच्छा खाद होना सबसे जरूरी है| आप जैविक खाद से अच्छी फसल प्राप्त कर सकते हैं| यदि आप एक हेक्टेयर जमीन पर खेती कर रहे हैं तो मिटटी में जल संरक्षण की क्षमता को बढ़ाने के लिए बुवाई से 10-15 दिन पहले 250-300 कुन्तल गोबर की सड़ी खाद मिटटी में अच्छी तरह से मिला दें| 

लहसुन के उत्पादक राज्य ( Garlic Producing States )

देश में मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, पंजाब, असम, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल प्रमुख लहसुन उत्पादक राज्य हैं। 

लहसुन की खेती लागत एवं कमाई ( Cost and Earning in Garlic Cultivation )

एक बीघा जमीन पर लहसुन की खेती करते हैं तो आप 7-8 कुन्तल लहसुन का उत्पादन कर सकते हैं| यदि मंडी में लहसुन का भाव 80-150 के आस-पास रहा तो आप 1 लाख रुपए की कमाई कर सकते हैं|

आप शबला सेवा की मदद कैसे ले सकते हैं? ( How Can You Take Help of Shabla Seva? )

  1. आप हमारी विशेषज्ञ टीम से खेती के बारे में सभी प्रकार की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
  2. हमारे संस्थान के माध्यम से आप बोने के लिए उन्नत किस्म के बीज प्राप्त कर सकते हैं।
  3. आप हमसे टेलीफोन या सोशल मीडिया के माध्यम से भी जानकारी और सुझाव ले सकते हैं।
  4. फसल को कब और कितनी मात्रा में खाद, पानी देना चाहिए, इसकी भी जानकारी ले सकते हैं।
  5. बुवाई से लेकर कटाई तक, किसी भी प्रकार की समस्या उत्पन्न होने पर आप हमारी मदद ले सकते हैं।
  6. फसल कटने के बाद आप फसल को बाजार में बेचने में भी हमारी मदद ले सकते हैं।

संपर्क

अधिक जानकारी के लिए हमसे संपर्क करें +91 9335045599 ( शबला सेवा )

आप नीचे व्हाट्सएप्प (WhatsApp) पर क्लिक करके हमे अपना सन्देश भेज सकते है।

Become our Distributor Today!

Get engaged as our distributor of our high quality natural agricultural products & increase your profits.

Translate »