गिलोय का उपयोग, फायदा एवं गिलोय की खेती

प्राचीन समय में कई बीमारियों का उपचार करने के लिए जड़ी-बूटियों का उपयोग किया जाता था। समय के साथ बदलाव आया, लेकिन आज भी कई बीमारियों में जड़ी-बूटियों का उपयोग किया जाता है। गिलोय ( Giloy ) प्राचीन जड़ी-बूटियों में से एक है। इसे गुडूची, छिन्नरुहा, चक्रांगी आदि कई नामों से जाना जाता है। इसकी बहुवर्षीय आयु और अमृत के समान गुणकारी होने के कारण इसका नाम अमृता है। गिलोय का वैज्ञानिक नाम टीनोस्पोरा कार्डिफ़ोलिया ( Tinospora Cardifolia ) है। गिलोय भारतीय की मूल निवासी तथा औषधीय पौधा है जो चढ़ाई वाली लता के रूप में पहचानी जाती है। यह झाड़ी लगभग 30 फीट लंबी हो सकती है और इसकी तने पतली और हरे रंग की होती हैं, जबकि पत्तियाँ छोटी और हरी होती हैं। गिलोय का फल मटर के बीज जैसा दिखता है और इसका तना हरा होता है जो एक रस्सी जैसा दिखता है। इसकी पत्तियाँ स्वाद में कसैली, कड़वी और तीखी होती हैं।

गर्मियों में गिलोय पौधे पर छोटे-छोटे पीले फूल लगते हैं, जो नर पौधे में गुच्छों के रूप में और मादा पौधे में एकाएक मौजूद होते हैं। यह फूलों की पहचान करने का एक तरीका है जिसके माध्यम से गिलोय के नर और मादा पौधे को अलग किया जा सकता है।

गिलोय के नर पौधे में फूलों के गुच्छे पाए जाते हैं, जो कई छोटे पीले फूलों से मिलकर बने होते हैं। वे सम्पूर्ण गिलोय पौधे पर एक साथ देखे जा सकते हैं। गिलोय के मादा पौधे में फूल एकाएक प्रकट होते हैं, जिनका आकार और संरचना नर पौधों के फूलों से थोड़ा अलग होता है। ये फूल एकाएक खुलते हैं और गिलोय के मादा पौधे पर एकाएक देखे जा सकते हैं।

यह फूलों की विशेषता गिलोय के प्रजनन तत्वों की पहचान करने में मदद करती है और पौधे के वृद्धि और प्रजनन की प्रक्रिया को समझने में मदद करती है।

गिलोय की एक खास विशेषता है कि जब यह किसी पेड़ पर चिपककर उगती है, तो उस पेड़ के कई औषधीय गुण गिलोय के औषधीय गुणों में समाहित हो जाते हैं। इसी कारण से नीम के पेड़ पर मौजूद गिलोय की बेल को लाभकारी और सर्वोत्तम माना जाता है।

गिलोय एक परस्पर संयोजनी पौधा है और यह अन्य पेड़ों के साथ जुड़कर उगती है। जब यह नीम के पेड़ पर चिपकती है, तो उस पेड़ के वनस्पतिक गुण गिलोय के औषधीय गुणों को प्रभावित कर सकते हैं। नीम खुद एक प्रमुख औषधीय पौधा है और उसमें कई स्वास्थ्य लाभकारी गुण पाए जाते हैं। जब गिलोय नीम के साथ जुड़ती है, तो इससे एक संयोजनी अद्यात्मिक गुणसूत्र पैदा होता है जो स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है। नीम और गिलोय का संयोजन आयुर्वेदिक उपचार में आमतौर पर उपयोग किया जाता है।

बहुत पुरानी गिलोय में तना जितनी मोटा हो सकता है, उसी स्थान से जड़ें निकलकर नीचे लटकती हैं। ये जड़ें खेतों की चट्टानों या मेड़ों पर जमीन में समाती हैं और अन्य लताओं को जन्म देती हैं।

गिलोय में पाए जाने वाले पोषक तत्व ( Nutrients Found in Giloy )

गिलोय में गिलोइन नामक ग्लूकोसाइड ( Glucoside ) पाया जाता है, जो इसके औषधीय गुणों के लिए महत्वपूर्ण होता है। गिलोय एंटीऑक्सीडेंट ( Antioxidant ), एंटी-इंफ्लेमेटरी ( Anti-inflammatory ) और कैंसर-रोधी गुणों ( Anti-Cancer Properties ) का स्रोत है। इसके अलावा, गिलोय में मैगनीज ( Manganese ), पामेरिन ( Palmarin ), टीनोस्पोरिन ( Tenosporin ) और टीनोस्पोरिक एसिड ( Tenosporic acid ) जैसे विभिन्न विटामिन ( Vitamins ) और औषधीय यौगिक पाए जाते हैं।

आयरन (Iron): गिलोय में आयरन होता है जो मांसपेशियों के लिए महत्वपूर्ण होता है और शरीर के रक्त कोशिकाओं के निर्माण में मदद करता है। यह हीमोग्लोबिन के उत्पादन में भी मदद करता है, जो शरीर के सभी ऊतकों को ऑक्सीजन पहुंचाने में महत्वपूर्ण होता है।

फॉस्फोरस (Phosphorus): गिलोय में फॉस्फोरस होता है जो हड्डियों, दांतों और शरीर की कोशिकाओं के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह ऊर्जा के उत्पादन और चयापचय में भी मदद करता है।

जिंक (Zinc): गिलोय में जिंक होता है जो शारीरिक विकास और रक्त प्रवाह के लिए आवश्यक होता है। यह इम्यून सिस्टम को मजबूत रखने में मदद करता है और विषाणुओं के खिलाफ रोग प्रतिरोध में मदद करता है। यह घावों को भरने में भी मदद करता है।

मैग्नीशियम (Magnesium): गिलोय में मैग्नीशियम होता है जो शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए आवश्यक होता है। यह मांसपेशियों, हड्डियों, दांतों और न्यूरोलॉजिकल फंक्शन को सुधारने में मदद करता है। यह हृदय स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाने में मदद करता है।

गिलोय के सेवन के स्वास्थ्यवर्धक फायदे ( Health Benefits of Consuming Giloy )

गिलोय एक आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी है जिसे कई स्वास्थ्य लाभों के लिए जाना जाता है। यह भारत और अन्य एशियाई देशों में प्राचीन काल से उपयोग की जाती रही है।

गिलोय के कुछ प्रमुख स्वास्थ्य लाभों में शामिल हैं:

इम्यूनिटी को बढ़ावा देना (Boosting Immunity): गिलोय एक शक्तिशाली इम्यूनिटी बूस्टर है। यह सफेद रक्त कोशिकाओं के उत्पादन को बढ़ाकर और रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करके काम करता है। इससे संक्रमण से लड़ने की क्षमता बढ़ जाती है।

डायबिटीज को नियंत्रित करना (Controlling Diabetes): गिलोय रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है। यह इंसुलिन के उत्पादन को बढ़ाकर और इंसुलिन के प्रति संवेदनशीलता को बढ़ाकर काम करता है। इससे मधुमेह के लक्षणों को कम करने में मदद मिल सकती है।

कैंसर से बचाव (Cancer Prevention): गिलोय कैंसर कोशिकाओं के विकास और प्रसार को रोकने में मदद कर सकता है। यह कैंसर कोशिकाओं के ऑक्सीडेटिव तनाव को बढ़ाकर और एपोप्टोसिस (Apoptosis) को प्रेरित करके काम करता है। इससे कैंसर के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।

हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाना (Improves Heart Health): गिलोय रक्तचाप को कम करने और कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है। यह हृदय रोगों के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है।

कब्ज को दूर करना (Relieves Constipation): गिलोय एक रेचक है जो पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने में मदद करता है। यह कब्ज को दूर करने और पाचन प्रक्रिया को सुचारू करने में मदद कर सकता है।

त्वचा को स्वस्थ रखना (Keeping Skin Healthy): गिलोय एक एंटीऑक्सिडेंट है जो त्वचा को मुक्त कणों से होने वाले नुकसान से बचाने में मदद करता है। यह त्वचा को स्वस्थ और चमकदार बनाए रखने में मदद कर सकता है।

गिलोय का सेवन आमतौर पर सुरक्षित माना जाता है। हालांकि, गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली महिलाओं और किसी भी अन्य स्वास्थ्य समस्या से पीड़ित लोगों को गिलोय का सेवन करने से पहले अपने डॉक्टर से बात करनी चाहिए।

गिलोय का सेवन करने के कई तरीके हैं। इसे जूस, काढ़ा, चूर्ण या कैप्सूल के रूप में लिया जा सकता है। गिलोय का सेवन शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से बात करना महत्वपूर्ण है।

गिलोय के कुछ अन्य संभावित लाभ

गिलोय के कुछ अन्य संभावित लाभों में शामिल हैं:
1. शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करना
2. सूजन को कम करना
3. माइग्रेन से बचाव
4. अस्थमा के लक्षणों को कम करना
5. केंद्रीय तंत्रिका तंत्र के कार्यों में सुधार करना
6. आंखों की रोशनी में सुधार करना

गिलोय का सेवन कैसे करें
गिलोय का सेवन कई तरह से किया जा सकता है। इसका सबसे आम तरीका इसका जूस बनाकर पीना है। गिलोय का जूस बनाने के लिए, गिलोय की जड़ों को धोकर अच्छी तरह से पीस लें। फिर इस पेस्ट को थोड़े से पानी में मिलाकर उबाल लें। उबालने के बाद इसे छान लें और इसका जूस तैयार है।
गिलोय का काढ़ा भी बनाया जा सकता है। इसके लिए, गिलोय की जड़ों को पानी में डालकर उबाल लें। उबालने के बाद इसे छान लें और इसका काढ़ा तैयार है।
गिलोय का चूर्ण भी लिया जा सकता है। इसके लिए, गिलोय की जड़ों को सुखाकर पीस लें। फिर इस चूर्ण को पानी या दूध के साथ ले सकते हैं।

गिलोय के कैप्सूल भी बाजार में उपलब्ध हैं। इन कैप्सूलों को डॉक्टर की सलाह के अनुसार ले सकते हैं।

गिलोय का सेवन करने से पहले अपने डॉक्टर से बात कर लें।
गिलोय का सेवन सीमित मात्रा में करें।

गिलोय की बागवानी ( Giloy’s Gardening )

गिलोय के फायदों को देखते हुए पिछले कुछ सालों से लोगों में जागरूकता बढ़ी है। गिलोय एक विशेष प्रकार की लता है जो अपने आप में ही रोगों के खिलाफ लड़ने की क्षमता रखती है। इसकी वनस्पतिक विशेषताओं के कारण, इसे विभिन्न स्थानों पर पाया जा सकता है और इसे अपने घर में भी उगाया जा सकता है। गिलोय की खेती करने से आप अपने घर में स्वस्थ और उपयोगी पौधा प्राप्त कर सकते हैं, जिससे आप इसके औषधीय गुणों का उपयोग कर सकते हैं। यह आपको आनंददायक अनुभव प्रदान करेगा और आपके घर की सुंदरता को बढ़ाएगा। 

गिलोय की खेती के लिए किसान गिलोय की कलम या पौधे का उपयोग कर सकते हैं। गिलोय की कलम को वर्षा ऋतु में लगाया जाता है। गिलोय के पौधे को 2 से 3 वर्ष में एक बार कटाई की जा सकती है। 

गिलोय की बागवानी में मिट्टी, तापमान एवं जलवायु ( Soil, Temperature and Climate in Giloy’s Gardening )

यह लता आमतौर पर जंगली स्थानों, खेतों, घरों और पहाड़ों की चट्टानों पर पाया जाता है। यह मिट्टी के अनुसार विभिन्न प्रकार की जगहों में उगाया जा सकता है, लेकिन बारिश और जलभराव में इसका विकास ठीक से नहीं हो पाता है।

गिलोय की बागवानी के लिए दोमट मिट्टी सबसे अच्छी होती है। यह मिट्टी अच्छी जल निकासी वाली होनी चाहिए। गिलोय की जड़ें पानी में डूबने से सड़ सकती हैं, इसलिए जल जमाव वाली मिट्टी में इसकी खेती नहीं करनी चाहिए।

गिलोय की खेती के लिए मिट्टी का पीएच मान 6.0 से 7.0 के बीच होना चाहिए। यदि मिट्टी का पीएच मान बहुत कम या बहुत अधिक है, तो गिलोय की वृद्धि प्रभावित हो सकती है।

गिलोय की खेती के लिए 20 डिग्री सेल्सियस से 30 डिग्री सेल्सियस का तापमान सबसे उपयुक्त होता है। गिलोय की जड़ें 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे के तापमान में मर सकती हैं।

गिलोय की खेती के लिए आर्द्र जलवायु सबसे अच्छी होती है। गिलोय को पर्याप्त मात्रा में पानी की आवश्यकता होती है। हालांकि, गिलोय की जड़ों को पानी में डूबने से बचाना चाहिए।

गिलोय की बागवानी तैयारी एवं पौध रोपण ( Preparation and Planting in Giloy’s Gardening )

गिलोय की बागवानी के लिए मिट्टी को अच्छी तरह से तैयार करना आवश्यक है। इसके लिए, मिट्टी को 20 सेंटीमीटर गहरा खोदना चाहिए। मिट्टी को खोदने के बाद, उसमें अच्छी तरह से गोबर की खाद या कम्पोस्ट मिला देना चाहिए।

गिलोय की बागवानी के लिए पौध रोपण का सबसे अच्छा समय मानसून का मौसम होता है। इस समय मिट्टी में पर्याप्त नमी होती है, जो गिलोय के पौधों के लिए आवश्यक होती है।

गिलोय के पौधों को 2 से 3 मीटर की दूरी पर लगाया जाना चाहिए। पौधों को लगाने से पहले, मिट्टी में एक छेद खोदना चाहिए। छेद की गहराई और चौड़ाई पौध के तने के आकार के अनुसार होनी चाहिए।

पौधे को छेद में रखते समय, ध्यान रखें कि पौधे का तना मिट्टी से 2 से 3 सेंटीमीटर ऊपर हो। पौधे को मिट्टी से अच्छी तरह से ढक दें और फिर उसे पानी दे दें।

एक हेक्टेयर भूमि के लिए लगभग 2500 कटिंग्स की आवश्यकता होती है।

यदि आप बीज से गिलोय को उगाना चाहते हैं, तो ध्यान दें कि बीज उत्पादन में कटिंग्स की तुलना में दोगुना समय लगता है।

गिलोय के कटे हुए मृत तने में कभी-कभी नमी मिलने पर या बरसात के समय गिलोय उग आती है, तो अंकुरित भाग को दोनों ओर से 2 इंच तक काट लें और कलम को सीधे मिट्टी में इस प्रकार दबा दें कि अंकुरित हरा पौधा बाहर आ जाए। इस तरह से भी गिलोय को बिना किसी मेहनत के लगाया जा सकता है।

गिलोय की उन्नत किस्में ( Improved Varieties of Giloy )

गिलोय की कई उन्नत किस्में उपलब्ध हैं। इन किस्मों को उनकी उत्पादकता, रोग प्रतिरोधकता और अन्य गुणों के आधार पर विकसित किया गया है।

गिलोय की कुछ उन्नत किस्में निम्नलिखित हैं:

1. गिलोय सुपर किस्म (Giloy Super Variety): यह किस्म बहुत अधिक उत्पादक होती है। इस किस्म के पौधे 2 से 3 साल में 20 से 25 किलो तक गिलोय का उत्पादन कर सकते हैं।
2. गिलोय गोल्ड किस्म (Giloy Gold variety): यह किस्म रोग प्रतिरोधी होती है। इस किस्म के पौधे अन्य किस्मों की तुलना में कम बीमारियों से प्रभावित होते हैं।
3. गिलोय रजत किस्म (Giloy Silver variety): यह किस्म जल्दी बढ़ने वाली होती है। इस किस्म के पौधे अन्य किस्मों की तुलना में जल्दी बढ़ते हैं और फल देते हैं।

गिलोय के उपयोगी भाग ( Useful Parts of Giloy )

गिलोय की लता के तीन भागों का उपयोग औषधीय रूप से किया जाता है:

तना (Stem): गिलोय का तना सबसे अधिक उपयोगी भाग होता है। तने को ताजा या सूखा कर उपयोग किया जा सकता है। तने का रस, काढ़ा, चूर्ण आदि कई तरह से तैयार किया जा सकता है।
पत्तियां (Leaves): गिलोय की पत्तियां भी औषधीय गुणों से भरपूर होती हैं। पत्तियों का रस, काढ़ा, चूर्ण आदि तैयार किया जा सकता है।
जड़ें (Roots): गिलोय की जड़ें भी औषधीय गुणों से भरपूर होती हैं। जड़ों का काढ़ा, चूर्ण आदि तैयार किया जा सकता है।

गिलोय के तने में सबसे अधिक मात्रा में औषधीय गुण पाए जाते हैं। तने में एंटीऑक्सीडेंट ( Antioxidant ), एंटी-इंफ्लेमेटरी ( Anti-Inflammatory, ), एंटी-वायरल ( Anti-Viral ), एंटी-बैक्टीरियल ( Anti-Bacterial ), एंटी-फंगल ( Anti-Fungal ), इम्यूनोमॉड्यूलेटरी ( Immunomodulatory ), और एंटी-कैंसर (Anti-Cancer ) जैसे गुण पाए जाते हैं।

गिलोय की बागवानी में देखभाल (Care in Giloy Gardening)

गिलोय की बागवानी में इन बातों का ध्यान देने से आप स्वस्थ और उत्पादक गिलोय के पौधे उगा सकते हैं।

गिलोय की बागवानी में निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए:

सूर्य का प्रकाश (Sunlight): गिलोय को पूर्ण सूर्य के प्रकाश की आवश्यकता होती है। इसलिए, पौधों को ऐसे स्थान पर लगाएं जहां उन्हें पर्याप्त सूर्य का प्रकाश मिल सके।

खाद (Fertilizer): गिलोय की वृद्धि के लिए नियमित रूप से खाद देनी चाहिए। खाद देने से पौधे स्वस्थ और मजबूत होते हैं।

पानी (Water): गिलोय को नियमित रूप से पानी देना चाहिए। हालांकि, गिलोय की जड़ों को पानी में डूबने से बचाना चाहिए।

खरपतवार (Weeds): गिलोय के पौधों के आसपास खरपतवार को निकालना चाहिए। खरपतवार पौधों को आवश्यक पोषक तत्वों और पानी से वंचित कर सकते हैं।

नई वृद्धि को प्रोत्साहित करने और इसके आकार को बनाए रखने के लिए अपने गिलोय के पौधे की नियमित रूप से छँटाई करें।

याद रखें कि गिलोय एक चढ़ने वाला पौधा है और इसे चढ़ने के लिए किसी चीज़ की आवश्यकता होगी, जैसे बाड़ या या ऊँचा पेड़।

गिलोय की कटाई ( Harvesting Giloy )

कटाई का समय (Harvesting Time): गिलोय की कटाई का सबसे अच्छा समय सितंबर से नवंबर का महीना होता है। इस समय गिलोय के तने में औषधीय गुणों की मात्रा अधिक होती है।

कटाई की आयु (Harvesting Age): केवल चार से पांच वर्ष पुरानी बेलों को ही काटना चाहिए। इससे पौधे को नुकसान नहीं होता और वह फिर से उगने में सक्षम होता है।

कटाई की मात्रा (Harvesting Quantity): एक पौधे से लगभग 10 किलो गिलोय की बेल निकलती है। चार से पांच वर्ष बाद प्रति हेक्टेयर (कम से कम 100 लतायें) 1000 किलोग्राम ताजी और 250 किलोग्राम सूखी उपज प्राप्त होती है।

गिलोय की कटाई के लिए, एक तेज चाकू या कैंची का उपयोग करना चाहिए। तने को 20 से 25 सेंटीमीटर लंबा काटना चाहिए। तने को काटने के बाद, उसे धूप में सूखाना चाहिए। गिलोय का तना सूखने में लगभग 15 से 20 दिन लगते हैं।

सूखे हुए तने को एक हवाबंद कंटेनर (Airtight Container) में रखना चाहिए। गिलोय का तना सूखे हुए रूप में लगभग 2 साल तक सुरक्षित रहता है।

गिलोय की कटाई के बाद, पौधे को फिर से उगने के लिए छोड़ देना चाहिए। गिलोय के पौधे को 2 से 3 साल में एक बार कटाई की जा सकती है।

गिलोय के उत्पादक राज्य ( Giloy Producing States )

गिलोय भारत के सभी उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में पायी जाती है। गिलोय की खेती की बढ़ती मांग के कारण, भारत में गिलोय की खेती का क्षेत्रफल लगातार बढ़ रहा है।

गिलोय की प्रजाति म्यांमार, मलेशिया, वियतनाम, बांग्लादेश, उत्तरी अफ्रीका, दक्षिण अफ्रीका में भी पाई जाती है। हालांकि, भारत में गिलोय की खेती का सबसे बड़ा क्षेत्रफल है।

भारत में गिलोय की खेती कई राज्यों में की जाती है। गिलोय के प्रमुख उत्पादक राज्य निम्नलिखित हैं:

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh): उत्तर प्रदेश गिलोय का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है। राज्य में गिलोय की खेती लगभग 20,000 हेक्टेयर क्षेत्र में की जाती है। उत्तर प्रदेश में गिलोय की खेती मुख्य रूप से बुंदेलखंड, अवध, और पूर्वांचल क्षेत्रों में की जाती है।

मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh): मध्य प्रदेश गिलोय का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है। राज्य में गिलोय की खेती लगभग 15,000 हेक्टेयर क्षेत्र में की जाती है। मध्य प्रदेश में गिलोय की खेती मुख्य रूप से मालवा, निमाड़, और चंबल क्षेत्रों में की जाती है।

छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh): छत्तीसगढ़ गिलोय का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है। राज्य में गिलोय की खेती लगभग 10,000 हेक्टेयर क्षेत्र में की जाती है। छत्तीसगढ़ में गिलोय की खेती मुख्य रूप से बस्तर, सरगुजा, और रायपुर क्षेत्रों में की जाती है।

राजस्थान (Rajasthan): राजस्थान गिलोय का चौथा सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है। राज्य में गिलोय की खेती लगभग 5,000 हेक्टेयर क्षेत्र में की जाती है। राजस्थान में गिलोय की खेती मुख्य रूप से अजमेर, जयपुर, और जोधपुर क्षेत्रों में की जाती है।

बिहार (Bihar): बिहार गिलोय का पांचवां सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है। राज्य में गिलोय की खेती लगभग 4,000 हेक्टेयर क्षेत्र में की जाती है। बिहार में गिलोय की खेती मुख्य रूप से गया, मुजफ्फरपुर, और पटना क्षेत्रों में की जाती है।

इन राज्यों के अलावा, गिलोय की खेती अन्य राज्यों में भी की जाती है, जिनमें झारखंड, उड़ीसा , पश्चिम बंगाल, और महाराष्ट्र शामिल हैं।

गिलोय की बागवानी में लागत और कमाई ( Cost and Earning in Giloy Gardening )

गिलोय की बागवानी में लागत की बात करें तो बीज या पौधे की कीमत, खाद और उर्वरक की कीमत, सिंचाई की लागत और श्रम की लागत ( जिसमें बुवाई, निराई-गुड़ाई, सिंचाई और कटाई शामिल हैं। श्रम की लागत क्षेत्र और मौसम के आधार पर भिन्न होती है। ) इन सभी कारकों को मिलाकर एक हेक्टेयर में कुल लागत लगभग 50,000 रुपये से 1,00,000 रुपये तक हो सकती है।

गिलोय की बागवानी में आमदनी/कमाई की बात करें तो गिलोय की खेती से लगभग 250 किलोग्राम से 500 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर सूखी गिलोय प्राप्त होती है। गिलोय की कीमत लगभग 1,000 रुपये से 2,000 रुपये प्रति किलोग्राम तक है।

इसकी अधिक मांग, कम उत्पादकता और बहुगुणी होने के कारण गिलोय की बागवानी एक लाभदायक व्यवसाय है। गिलोय की खेती में अपेक्षाकृत कम लागत और अधिक लाभ होता है। गिलोय की मांग बढ़ रही है, इसलिए इसकी खेती से आय में वृद्धि की संभावना है।

इस प्रकार, एक हेक्टेयर में गिलोय की खेती से लगभग 250,000 रुपये से 10,00,000 रुपये तक की आय अर्जित की जा सकती है।

आप शबला सेवा की मदद कैसे ले सकते हैं? ( How Can You Take Help of Shabla Seva? )

  1. आप हमारी विशेषज्ञ टीम से खेती के बारे में सभी प्रकार की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
  2. हमारे संस्थान के माध्यम से आप बोने के लिए उन्नत किस्म के बीज प्राप्त कर सकते हैं।
  3. आप हमसे टेलीफोन या सोशल मीडिया के माध्यम से भी जानकारी और सुझाव ले सकते हैं।
  4. फसल को कब और कितनी मात्रा में खाद, पानी देना चाहिए, इसकी भी जानकारी ले सकते हैं।
  5. बुवाई से लेकर कटाई तक, किसी भी प्रकार की समस्या उत्पन्न होने पर आप हमारी मदद ले सकते हैं।
  6. फसल कटने के बाद आप फसल को बाजार में बेचने में भी हमारी मदद ले सकते हैं।
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