भिंडी का उपयोग, फायदे एवं भिंडी की खेती

भिंडी एक लोकप्रिय सब्जी है जिसका सब्जियों में प्रमुख स्थान है इसे लोग लेडी फिंगर ( Lady Finger ) या ओकरा ( Okra ) भी कहते हैं। बनारस में इसे राम तरोई के नाम से भी जाना जाता है और छत्तीसगढ में इसे रामकलीय, मराठी में भेंडी, गुजराती में भींडा, फारसी में वामिया कहते हैं। भिंडी का वानस्पतिक नाम Abelmoschus Esculentus है। इसका वृक्ष लगभग 1 मीटर लम्बा होता है। भिंडी से निकलने वाला रेशेदार चिकना पदार्थ कई प्रकार के रोगों को ठीक करने में मदद करता है और भिंडी खाने से भूख बढ़ती है।

भिंडी में पाए जाने वाले पोषक तत्व ( Nutrients Found in Lady Finger/Okra )

मुख्य रुप से भिंडी में प्रोटीन ( Protein ), वसा ( Fat ), रेशा, कार्बोहाइड्रेट ( Carbohydrates ), खनिज लवणों जैसे कैल्शियम ( Calcium ), फास्फोरस ( Phosphorus ), पोटैशियम, सोडियम ( Sodium) और तांबा ( Copper ) के अतिरिक्त के अतिरिक्त विटामिन ( Vitamin ) A, विटामिन B, विटामिन C, थाईमीन ( Thiamine ) एवं रिबोफ्लेविन ( Riboflavin ) भी पाया जाता है। भिंडी के फल में आयोडीन की मात्रा अधिक होती है इसलिए भिंडी को बहुत पौष्टिक सब्‍जी माना जाता है। भिंडी में आयरन ( Iron ), जिंक ( Zinc ), मैग्नीशियम ( Magnesium ), सेलेनियम ( Selenium ) और मैंगनीज ( Manganese) भी मिलता है।

भिंडी के सेवन में स्वास्थ्यवर्धक फायदे ( Health Benefits of Consuming Lady Finger/Okra )

भिंडी में लेक्टिन नाम का एक खास प्रोटीन पाया जाता है, जो कैंसर के इलाज में मदद करती है।
भिंडी ब्लड शुगर को सामान्य रखने में मदद करती है और दिल की बीमारी के खतरे को कम करती है।
भिंडी में विटामिन सी काफी अधिक मात्रा में होता है। इससे यह हमारे इम्‍यून सिस्‍टम को मजबूत बनाकर खांसी व ठंड से बचाने में मदद करता है।
भिंडी में पर्याप्‍त मात्रा में विटामिन ए और बेटा केरोटीन पाया जाता है जो हमारी नजर के लिए काफी फायदेमंद होता है।
भिंडी में मौजूद फोलेट एक जरूरी पोषक तत्‍व है जो भ्रूण के मस्तिष्‍क विकास में अहम भूमिका निभाता है।

भिंडी की खेती ( Lady Finger/Okra Cultivation )

यह फसल ग्रीष्म तथा खरीफ, दोनों ही ऋतुओं में उगाई जाती है। भिंडी के लिये दीर्घ अवधि का गर्म व नम वातावरण श्रेष्ठ माना जाता है।

भिंडी की खेती में मिट्टी, तापमान एवं जलवायु/मौसम ( Soil, Temperature and Climate/Season in Lady Finger/Okra Cultivation )

भिंडी की खेती के लिए अच्छी जल निकासी वाली, रेतीली और दोमट दोनों ही मिट्टी उपयुक्त मानी जाती है। इसके लिए मिट्टी का पीएच मान 6  से 7 के आसपास होना चाहिए। भिंडी की खेती के लिए आर्द्र जलवायु उपयुक्त मानी जाती है। भिंडी एक उष्ण कटिबंधीय पौधा है जिसे उगाने के लिए गर्म परिस्थितियों की आवश्यकता होती है। सर्दियों में इस फसल की अधिक रख-रखाव करनी पड़ती है क्योंकि सर्दियों में पड़ने वाली पाला इसकी फसल को अधिक नुकसान पहुंचाती है। भिंडी की खेती के लिए 20 से 25 डिग्री सेल्सियस के बीच का तापमान उपयुक्त माना जाता है। ठंडे स्थानों पर इसकी खेती नहीं की जाती है। कम तापमान में इसके बीज ठीक से अंकुरित नहीं हो पाते हैं। इसके अलावा तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से अधिक होने पर पौधों के फूल गिरने की समस्या बनी रहती है।

भिंडी की खेती की तैयारी और बुवाई ( Preparation and Sowing of Lady Finger/Okra Cultivation )

भूमि की दो-तीन बार जुताई कर भुरभुरी कर तथा पाटा चलाकर समतल कर लेना चाहिए। इसके बाद खेत में गोबर की खाद डालकर मिट्टी को पोषण प्रदान करें। भिंडी के बीज सीधे खेत में बोए जाते हैं। ग्रीष्मकालीन भिंडी फरवरी-मार्च में बोई जाती है और बरसात के मौसम में भिंडी जून-जुलाई में बोई जाती है। यदि भिंडी की फसल लगातार लेनी हो तो फरवरी से जुलाई के बीच तीन सप्ताह के अन्तराल पर विभिन्न खेतों में भिंडी की बुआई की जा सकती है।

भिंडी की उन्नत किस्में ( Improved Varieties of Lady Finger/Okra )

भिंडी की उन्नत किस्में पूसा ए-4, परभनी क्रांति, पंजाब-7, अर्का अनामिका, वर्षा उपहार, हिसार उन्नत, वी.आर.ओ.6 आदि हैं।

भिंडी की खेती में बीज की मात्रा एवं बीज उपचार ( Seed Quantity and Seed Treatment in Lady Finger/Okra Cultivation )

1 एकड़ में 5 किलो भिंडी के बीज पर्याप्त होते हैं। किसान 5 किलो प्रति एकड़ की दर से बीज का प्रयोग करते हैं, यह अधिक लाभदायक होता है क्योंकि पौधे से पौधे की दूरी कम हो जाती है, जिससे भिंडी पौधों पर अधिक समय तक कच्ची अवस्था में रहती है और पकती नहीं है। बुवाई के पूर्व भिंडी के बीजों का उपचार करना चाहिए।

भिंडी की फसल की देखभाल ( Lady Finger/Okra Crop Care )

नियमित निराई-गुड़ाई करके खेत को खरपतवार मुक्त रखना चाहिए। पहली निराई बुआई के 15-20 दिन बाद करना आवश्यक है।

भिंडी की खेती में सिंचाई और उर्वरक प्रबंधन ( Irrigation and Fertilizer Management in Lady Finger/Okra Cultivation )

सिंचाई मार्च में 10-12 दिन, अप्रैल में 7-8 दिन और मई-जून में 4-5 दिन के अन्तर पर करें। बरसात में यदि बराबर वर्षा होती है तो सिंचाई की आवश्यकता नहीं पड़ती है । भिंडी की फसल में अच्छा उत्पादन लेने के लिए एक हेक्टेर क्षेत्र में लगभग 15-20 टन गोबर की खाद मिला देनी चाहिए।

भिंडी की खेती में फसल आने का समय एवं कटाई का समय ( Time of Harvest and Time of Harvesting in Lady Finger/Okra cultivation )

भिंडी की खेती में बोने के लगभग 25 दिन बाद से भिंडी आना शुरू हो जाती  है तथा पहली तुड़ाई लगभग 50  दिनों बाद शुरु हो जाती है।

भिंडी के उत्पादन स्थान ( Lady Finger/Okra Producing Places )

भारत दुनिया के 60% से अधिक भिंडी का उत्पादन करता है। भारत में भिंडी के उत्पादक राज्यों में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक और गुजरात है। यह व्यावसायिक रूप से भारत, तुर्की, ईरान, पश्चिम अफ्रीका, यूगोस्लाविया, बांग्लादेश, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, पश्चिम बंगाल, बर्मा, जापान, मलेशिया, ब्राजील, घाना, इथियोपिया, साइप्रस और दक्षिणी संयुक्त राज्य अमेरिका में उगाया जाता है।

भिंडी की खेती में लागत और कमाई ( Cost and Earning in Lady Finger/Okra Cultivation )

भिंडी की खेती में एक हेक्टेयर में लगभग सभी प्रकार के खर्चे मिलाकर 2 लाख रूपये की लागत आती है तथा लगभग 5 लाख रूपये तक की कमाई करके लगभग 3 लाख रूपये का शुद्ध लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

आप शबला सेवा की मदद कैसे ले सकते हैं? ( How Can You Take Help of Shabla Seva? )

  1. आप हमारी विशेषज्ञ टीम से खेती के बारे में सभी प्रकार की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
  2. हमारे संस्थान के माध्यम से आप बोने के लिए उन्नत किस्म के बीज प्राप्त कर सकते हैं।
  3. आप हमसे टेलीफोन या सोशल मीडिया के माध्यम से भी जानकारी और सुझाव ले सकते हैं।
  4. फसल को कब और कितनी मात्रा में खाद, पानी देना चाहिए, इसकी भी जानकारी ले सकते हैं।
  5. बुवाई से लेकर कटाई तक, किसी भी प्रकार की समस्या उत्पन्न होने पर आप हमारी मदद ले सकते हैं।
  6. फसल कटने के बाद आप फसल को बाजार में बेचने में भी हमारी मदद ले सकते हैं।
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