नीबू का उपयोग, फायदा एवं नीबू की खेती

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इसका रंग पीला या हरा तथा स्वाद खट्टा होता है। इसके रस में % साइट्रिक अम्ल होता है। किण्वन पद्धति के विकास के पहले नीबू ही साइट्रिक अम्ल का सर्वप्रमुख स्रोत था। विटामिन C से भरपूर नीबू स्फूर्तिदायक और रोग निवारक फल है।

नीबू में पाए जाने वाले पोषक तत्व ( Nutrients Found in Lemon )

नीबू मेंपोटेशियम ( Potassium ), लोहा ( Iron ), सोडियम ( Sodium ), मैगनेशियम ( Magnesium ), तांबा ( Copper ), फास्फोरस ( Phosphorus ) और क्लोरीन ( Chlorine ) तत्त्व तो हैं ही, प्रोटीन ( Protein ), वसा ( Fat ) और कार्बोज ( Carbone ) भी पर्याप्त मात्रा में हैं। विटामिन C से भरपूर नीबू शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के साथ ही एंटी आक्सीडेंट( Anti-oxidants ) का काम भी करता है और कोलेस्ट्राल ( Cholesterol ) भी कम करता है।

नींबू के स्वास्थ्यवर्धक फायदे ( Health Benefits of Lemon )

  1.   वजन कम करने के लिए विटामिन-सी से भरपूर नींबू बेहद मददगार होता है।
  2.   एनीमिया, किडनी स्‍टोन, पाचन संबंधी समस्याओं के खतरे को कम कर सकता है।
  3.   नीबू फैटी लिवर को ठीक करने में सहायक होता है।
  4.   नींबू की अम्लता अच्छे पाचन और इष्टतम मल त्याग को प्रोत्साहित करने के लिए डाइजेस्टिव सिस्‍टम          और लिवर में तंत्रिकाओं को जगाती है।
  5.   नींबू पानी पीने से किडनी हेल्‍दी रहती है, क्योंकि इसमें साइट्रेट की मात्रा अधिक होती है। साइट्रेट              कैल्शियम क्रिस्टल को नहीं बनने देता है जिससे किडनी स्‍टोन की समस्या नहीं होती है।

नीबू की खेती ( Lemon Cultivation )

खेत की अच्छी तरह से जोताई, क्रॉस जोताई और अच्छे से समतल करना चाहिए। पहाड़ी क्षेत्रों में ढलानों की बजाय मेंड़ पर रोपण किया जाता है। ऐसे क्षेत्रों में उच्च घनत्व रोपण भी संभव है।

नीबू की खेती के लिए मिट्टी, जलवायु एवं तापमान ( Soil, Climate and Temperature for Lemon Cultivation )

नीबू को हर तरह की मिट्टी में उगाया जा सकता है। इसकी खेती  के लिए मिट्टी का pH मान 5.5 से 7.5 होना चाहिए। नीबू हल्की क्षारीय और तेज़ाबी मिट्टी में भी उगाया जा सकता है। हल्की दोमट अच्छे जल निकास वाली मिट्टी नीबू की खेती के लिए बहुत अच्छी होती है। नीबू की खेती लिए 20 से 30 सेंटीग्रेड औसत तापमान उपयुक्त होता है। 75 से 200 सेंटीमीटर की बारिश वाले क्षेत्र में नींबू की खेती अच्छी होती है। जिन क्षेत्रों में लंबे समय तक सर्दी होती है और पाला पड़ने की संभावना रहती है, वहां नींबू की बागवानी सही नहीं होती है।

नीबू की खेती की तैयारी एवं बुवाई का समय ( Preparation and Sowing Time for Lemon Farming )

खेत की अच्छी तरह से जोताई, क्रॉस जोताई और अच्छे से समतल करना चाहिए। पहाड़ी क्षेत्रों में ढलानों की बजाय मेंड़ पर रोपण किया जाता है। ऐसे क्षेत्रों में उच्च घनत्व रोपण भी संभव है। रोपण का मौसम जून से अगस्त तक है।

नींबू की उन्नत किस्में ( Improved Varieties of Lemon )

नींबू की किस्मों में कागजी, कलान, सीडलेस लेमन, रंगपुर लाइन, विक्रम प्रोमालिनी मुख्य किस्में होती हैं, जो कम समय में फल देने के लिए तैयार हो जाती हैं। नीबू वर्गीय फलों को सबसे ज्यादा बडिंग और ग्राफ्टिंग विधि द्वारा लगाया जाता है।

नींबू का बीज की मात्रा बीजोपचार एवं पौधे बनाने की विधि ( Lemon Seed Treatment and Plant Preparation Method )

208 पौधे प्रति एकड़ की घनत्व बना कर रखनी चाहिए। पॉटिंग मिट्टी को गीला कर लें ताकि यह नम हो, लेकिन ध्यान रखें लथपथ नहीं हो। गमले को अंदर से 2 से 3 इंच मिट्टी से भर लें। अब आप नींबू के बीजों को मिट्टी में लगा दें। ध्यान रहे कि बीज नमीयुक्त हो एवं मिट्टी में आधा इंच अंदर हो. स्प्रे बोतल कि सहायत से पानी का छिड़काव करें। अब आप प्लास्टिक की मदद से पॉट को कवर करें, किनारों को एक अच्छे रबर बैंड के साथ सील करें और एक पेंसिल की मदद से एक छोटा सा छेद प्लास्टिक पर कर दें। गमले को गर्म, धूप स्थान में रखें। आप मिट्टी पर पानी का छिड़काव करते रहें, ध्यान रखें की मिट्टी सूखे नहीं और ना ही ज्यादा गीली हो लगभग दो हफ्तों के बाद, जब अंकुर उभर आता है, तो प्लास्टिक को निकाल दे। सुनिश्चित करें कि यह प्रति दिन कम से कम छह से आठ घंटे तक हल्के धूप में रखें और और बीचबीच में जैविक खाद डालते रहें। ध्यान रखें कि नए पौधे बीमारियों से दूर रहें,आवश्यक हो तो कीटनाशकों का उपयोग करें। जब पौधे बड़े होने लगे तो उसे बड़े गमले में लगा दें नये पौधों को पुराने पौधों की तुलना में अधिक पानी की जरूरत होती है।

नींबू की खेती में सिंचाई और उर्वरक प्रबंधन ( Irrigation and Fertilizer Management in Lemon Cultivation )

नींबू की फसल को नियमित अंतराल पर सिंचाई की आवश्यकता होती है। सर्दियों और गर्मियों में जीवन रक्षक सिंचाई जरूर देनी चाहिए। फूल आने के समय, फल लगने के समय और पौधे के अच्छे विकास के लिए सिंचाई आवश्यक है। ज्यादा सिंचाई से जड़ गलन और तना गलन की बीमारियों का खतरा होता है। उच्च आवृत्ति की सिंचाई फायदेमंद होती है। नमकीन पानी फसल के लिए हानिकारक होता है। बसंत ऋतु में अकेली जड़ों को पानी देना पौधे को प्रभावित नहीं करता। 3 वर्ष के पौधे में वर्ष में दो बार फूल आने से पहले 5 किलो/पौधे के हिसाब से वर्मी कंपोस्ट, गोबर खाद देना चाहिए। नींबू के पौधे 10 वर्ष से अधिक होने पर वर्ष में एक बार 250 ग्राम डीएपी (DAP) 150 ग्राम नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटेशियम) जरूर दें।

नींबू की खेती करने वाले राज्य ( Lemon Cultivating States )

इसकी खेती पूरे भारत में की जाती है। इसकी खेती तमिलनाडु, गुजरात, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, असम, आंध्र प्रदेश, राजस्थान आदि राज्यों में किया जाता है।

नींबू की खेती में लागत एवं कमाई (Cost and Earning in Lemon Cultivation)

नींबू की खेती में कई वर्षों तक नींबू की बागवानी से उपज ले सकते हैं। मंडी की बात की जाए तो 20 रुपये प्रति किलो से लेकर 80 रुपए प्रति किलो तक नींबू का बाजार भाव मिल जाता है। एक हेक्टेयर में नींबू की खेती करके किसान प्रतिवर्ष 5 से 6 लाख रुपये आसानी से कमा सकते हैं।

आप शबला सेवा की मदद कैसे ले सकते हैं? ( How Can You Take Help of Shabla Seva? )

  1. आप हमारी विशेषज्ञ टीम से खेती के बारे में सभी प्रकार की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
  2. हमारे संस्थान के माध्यम से आप बोने के लिए उन्नत किस्म के बीज प्राप्त कर सकते हैं।
  3. आप हमसे टेलीफोन या सोशल मीडिया के माध्यम से भी जानकारी और सुझाव ले सकते हैं।
  4. फसल को कब और कितनी मात्रा में खाद, पानी देना चाहिए, इसकी भी जानकारी ले सकते हैं।
  5. बुवाई से लेकर कटाई तक, किसी भी प्रकार की समस्या उत्पन्न होने पर आप हमारी मदद ले सकते हैं।
  6. फसल कटने के बाद आप फसल को बाजार में बेचने में भी हमारी मदद ले सकते हैं।

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