आम का उपयोग, फायदा एवं आम की खेती

इसका वैज्ञानिक नाम “मेंगीफेरा इंडिका” ( Mangifera indica ) है। इसकी विभिन्न प्रजातियाँ हैं, जिनमें प्रमुखतः दशहरी, लंगड़ा और चौसा आदि शामिल हैं। आम फल का उत्पादन भारत में सबसे अधिक होता है और यह फल अपनी सुंदरता, स्वाद और पोषण मूल्य के लिए प्रसिद्ध है। बांग्लादेश में आम के पेड़ को राष्ट्रीय पेड़ का दर्जा प्राप्त है। इस फल की प्रजाति पहले केवल भारतीय उपमहाद्वीप में मिलती थी, बाद में धीरे धीरे अन्य देशों में उगाई जाने लगी। आम ( Mango ) भारत, पाकिस्तान और फिलीपींस में राष्ट्रीय फल के रूप मान्यता प्राप्त करता है।

आम में पाए जाने वाले पोषक तत्व (Nutrients Found in Mango)

इसमें विटामिन A, विटामिन C, विटामिन E और फाइबर ( Fiber ) जैसे कई पोषक तत्व पाए जाते हैं।

आम के स्वास्थ्यवर्धक फायदे (Health Benefits of Mango)

आम पाचन में मदद करता है।

इम्युनिटी को मजबूत करने में मदद करता है।

ये त्वचा के लिए बहुत फायदेमंद है।

हृदय को स्वस्थ रखता है।

वजन कम करने में मदद करता है।

ब्लड प्रेशर कंट्रोल करता है।

आम की बागवानी (Mango Gardening)

आम की बागवानी के लिए समशीतोष्ण जलवायु काफी उपयुक्त होती है। आम की बाग लगाने के लिए जुलाई से सितंबर तक का महीना उपयुक्त माना जाता है।

आम की बागवानी के लिए मिट्टी, तापमान एवं जलवायु ( Soil, Temperature and Climate for Mango Gardening )

आम की बागवानी प्रत्येक किस्म की भूमि में की जा सकती है। आम की खेती उष्ण एव समशीतोष्ण दोनों प्रकार की जलवायु में की जाती है। आम की खेती समुद्र तल से 600 मीटर की ऊँचाई तक सफलता पूर्वक होती है इसके लिए 23.8 से 26.6 डिग्री सेंटीग्रेट तापमान अति उत्तम होता है। आम की खेती प्रत्येक किस्म की भूमि में की जा सकती है।

आम की बागवानी की तैयारी एवं बुवाई का समय ( Preparation and Sowing Time for Mango Gardening )

5 से 6 इंच वर्षा हो जाने के बाद गड्ढे तैयार कर लें। गड्ढे तैयार करने के बाद आम का रोपण करें। जुलाई से लेकर अगस्त के बीच आम का रोपण कभी नहीं करनी चाहिए, क्योंकि यह संपूर्ण वर्षा का मौसम है। आम की बुआई जून माह में करना सर्वोत्तम रहता है।

आम की उन्नत किस्में ( Improved Varieties of Mango )

आम की उन्नत किस्में बंगनपल्ली, हिमसागर, हाफूस, मालदा, दशहरी, चौसा, लंगड़ा, मनकुरद, मुसरद, बादामी आदि हैं। 

आम के बीज का उपचार एवं लगाने की विधि ( Treatment and Application of Mango Seeds )

कम लागत के मिट्टी के बर्तन बीज के कीटनाशक के साथ मिश्रण के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है या बीजों को एक पॉलिथीन शीट पर फैलाकर आवश्यक मात्रा में उसपर रसायन छिड़क कर किसानों द्वारा यांत्रिक रूप से मिलाया जा सकता है। बीज के पेट को निचली तरफ़ रख कर, बीज को नीचे की ओर डाल दें अच्छी तरह से पानी दें, और फिर मिट्टी के अनुसार, उसे हर दिन, या हर दूसरे दिन पानी दें: लगभग 4 से 6 सप्ताह के बाद, बीज अंकुर होगा

आम की बागवानी में सिंचाई और उर्वरक प्रबंधन ( Irrigation and Fertilizer Management in Mango Horticulture )

आम की बागवानी में बाग़ लगाने के प्रथम वर्ष सिंचाई 2-3 दिन के अन्तराल पर आवश्यकतानुसार करनी चाहिए। 2 से 5 वर्ष पर 4-5 दिन के अन्तराल पर आवश्यकता अनुसार करनी चहिये। जब पेड़ों में फल लगने लगे तो दो तीन सिंचाई करनी अति आवश्यक है। 100 ग्राम नाइट्रोजन, 50 ग्राम फास्फोरस एवं 100 ग्राम पोटाश प्रति पौधा प्रतिवर्ष डालना चाहिए। यह मात्रा 10 वर्ष के बाद 1 kg निश्चित कर देते हैं। इसके अतिरिक्त सड़ी हुई गोबर की खाद शुरू के 10 वर्षों तक 40-50 किग्रा. एवं 10 वर्ष के बाद 70-80 किग्रा. प्रति वृक्ष जुलाई में डालना चाहिए। यूरिया आधी मात्रा एवं फास्फोरस एवं पोटाश की पूरी मात्रा जुलाई में था यूरिया की शेष आधी मात्रा अक्टूबर में डालना चाहिए।

आम की बागवानी करने वाले के उत्पादक राज्य ( Producing States of Mango Planters )

व्यावसायिक खेती उत्तर प्रदेश, बिहार, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा और गुजरात के राज्य में किया जाता है। ताजा आंकड़े बताते हैं कि देश में आम का कुल क्षेत्रफल 2,460 हजार हेक्टेयर है जिससे 17,290 हजार मीट्रिक टन आम पैदा किया जाता है।

आम की बागवानी में लागत और कमाई (Cost and Earnings in Mango Cultivation)

आम की एक हेक्टेयर बाग से आप प्रतिवर्ष 2-3 लाख रुपये आसानी से कमा सकते हैं। इसके अलावा बाग में खेती कर 50 हजार से 1 लाख रुपये तक की आमदनी कर सकते हैं।

आप शबला सेवा की मदद कैसे ले सकते हैं? ( How Can You Take Help of Shabla Seva? )

  1. आप हमारी विशेषज्ञ टीम से खेती के बारे में सभी प्रकार की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
  2. हमारे संस्थान के माध्यम से आप बोने के लिए उन्नत किस्म के बीज प्राप्त कर सकते हैं।
  3. आप हमसे टेलीफोन या सोशल मीडिया के माध्यम से भी जानकारी और सुझाव ले सकते हैं।
  4. फसल को कब और कितनी मात्रा में खाद, पानी देना चाहिए, इसकी भी जानकारी ले सकते हैं।
  5. बुवाई से लेकर कटाई तक, किसी भी प्रकार की समस्या उत्पन्न होने पर आप हमारी मदद ले सकते हैं।
  6. फसल कटने के बाद आप फसल को बाजार में बेचने में भी हमारी मदद ले सकते हैं।
kisan-credit-card

संपर्क

अधिक जानकारी के लिए हमसे संपर्क करें +91 9335045599 ( शबला सेवा )

आप नीचे व्हाट्सएप्प (WhatsApp) पर क्लिक करके हमे अपना सन्देश भेज सकते है।

Become our Distributor Today!

Get engaged as our distributor of our high quality natural agricultural products & increase your profits.

Translate »