औषधीय खेती के नुस्खे से गरीबी का इलाज

औषधीय खेती के नुस्खे से गरीबी का इलाज
गोरखपुर : कभी जिस भूमि को किसान बेकार मानते थे, जिन फल और लताओं को अनुपयोगी समझा ज
गोरखपुर : कभी जिस भूमि को किसान बेकार मानते थे, जिन फल और लताओं को अनुपयोगी समझा जाता था, उनका महत्व बदल गया है। अब फसलों को औने-पौने दाम पर बेचने की मजबूरी नहीं है। ऐसा संभव हुआ है सबला सेवा संस्थान की तत्परता व जागरूकता से। संस्था गरीब किसानों को औषधीय खेती का नुस्खा समझा रही है जो गरीबी उन्मूलन का कारगर हथियार साबित हो रही है। संस्था के प्रयासों से जनपद के दर्जनों ही नहीं प्रदेश के सैकड़ों किसानों की आर्थिक स्थिति में प्रभावी बदलाव आया है।
छोटी जोत के किसान अपने छोटे से रकबे में गेहूं, धान और दलहन जैसी फसलों की खेती करके अक्सर नुकसान में रहते हैं। पादरी बाजार के अविनाश कुमार ने ऐसे किसानों की दशा और स्थिति में सुधार का बीड़ा उठाया है। इसके लिए उन्होंने सबला सेवा संस्था का गठन किया और तीन साल से इस दिशा में कार्य कर रहे हैं। उनका फोकस औषधीय खेती पर है। किसानों का इस खेती के प्रति लगाव बढ़े, इसके लिए संस्था किसानों को न केवल मुफ्त बीज उपलब्ध कराती है बल्कि प्रशिक्षण के साथ इसके लिए तकनीकी सहायता भी प्रदान करती है। फसल की नियमित निगरानी के लिए अविनाश खुद खेतों तक पहुंचते हैं। औषधीय खेती के लिए वह उस जगह या जमीन का चयन करते हैं जो आमतौर पर किसानों के लिए निष्प्रयोज्य या बेकार हो।

बीमारियों में फायदेमंद है फसल

संस्था बच, भूई आंवला और कौंच की खेती के लिए किसानों को प्रोत्साहित करती है। बच का उपयोग अफरा, शोध, कफ, बात, ज्वर, पेट की गर्मी और शूल आदि जैसी बीमारियों के इलाज में होता है जबकि भूई आवला का प्रयोग लीवर के सूजन, सिरोसिस, फैटी लिवर, बिलीरुबिन बढ़ने पर, पीलिया में, हेपेटाइटिस, किडनी क्रिएटिनिन बढ़ने पर, मधुमेह आदि में इस्तेमाल होता है। कौंच का इस्तेमाल तनाव खत्म करने के साथ, ऊर्जा का स्तर, शुक्राणु व रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में किया जाता है। कौंच से कोलस्ट्रॉल का स्तर कंट्रोल में रहता है।

कम लागत में होता है ज्यादा मुनाफा

अविनाश बताते हैं कि बच की खेती में एक एकड़ में दस हजार रुपये की लागत आती है जबकि मुनाफा तकरीबन 50 हजार का होता है। कौंच की खेती में लागत एक एकड़ में मात्र तीन हजार रुपये की आती है, मुनाफा 40 हजार रुपये तक का हो जाता है। पांच हजार रुपये प्रति एकड़ की लागत से भूई आवला की खेती करके 24 हजार तक का मुनाफा कमाया जा सकता है।

घर बैठे ही बिक जाती है फसल

किसानों को आर्थिक रूप से समृद्ध बनाने और गरीबी उन्मूलन के लिए काम कर रहे अविनाश न केवल किसानों को औषधीय खेती के लिए प्रेरित करते हैं बल्कि इन फसलों की खरीद के लिए बाजार भी उपलब्ध कराते हैं। वह किसानों को खेती की लागत और मुनाफे के बारे में समझाते हैं। चरगांवा, बेलघाट के किसान सुनील कुमार, गौरी शकर बंका और अवध बिहारी सिंह जैसे दर्जनों किसानों की आर्थिक स्थिति में बेहद बदलाव हुआ है। अविनाश नए वर्ष में इस कार्य को और तेजी से आगे बढ़ने की तैयारी में हैं।

संपर्क

अधिक जानकारी के लिए हमसे संपर्क करें +91 9430502802 ( डॉ अविनाश कुमार )

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