खरबूजा का उपयोग, फायदा एवं खरबूजा की खेती

खरबूजा (Muskmelon) का वैज्ञानिक नाम कुकुमिस मेलो ( Cucumis Melo) है। खरबूजा कुकुरबिटेसी (Cucurbitaceae) कुल से संबंधित है, जिसमें फल और सब्जियां जैसे कद्दू, ककड़ी, लौकी शामिल हैं। खरबूजे की उत्पत्ति अफ्रीका में या दक्षिणपश्चिम एशिया की गर्म घाटियों में हुई, विशेष रूप से ईरान और भारत में, जहां से वे धीरे-धीरे यूरोप में पश्चिमी रोमन साम्राज्य के अंत की ओर दिखाई देने लगे।

यह एक कद्दूवर्गीय फसल है, जिसे नगदी फसल के रूप में उगाया जाता है। इसके फल को विशेष रूप से खाने के लिए इस्तेमाल करते हैं, जो स्वाद में अधिक स्वादिष्ट होता है। खरबूजा गर्मियों में पानी से भरपूर फलों में से एक होता है।

खरबूजे के बारे में कुछ रोचक तथ्य:
यह फल हल्के पीले रंग से लेकर नारंगी रंग के होते हैं।
मूल रूप से तरबूज एक लंबी बेल पर लगता है।
इस फल की आकृति गोल या आयताकार होती है।
इसके अंदर के बीज सफेद रंग के होते हैं।
खरबूजा एक फल है। यह पकने पर हरे से पीले रंग के हो जाते हैं, हलांकी यह कई रंगों में उपलब्ध है।
मूल रूप से इसके फल लंबी लताओं में लगते हैं।

खरबूजे के उपयोग:
खरबूजा को ताजा खाया जाता है।
इसका उपयोग जूस, स्मूदी और आइसक्रीम बनाने के लिए किया जाता है।
इसका उपयोग मिठाई और सलाद में भी किया जाता है।
खरबूजे के बीजों को भुनाकर खाया जाता है।

खरबूजा में पाए जाने वाले पोषक तत्व ( Nutrients Found in Muskmelon )

खरबूजा में 96% पानी के साथ-साथ विटामिन ( Vitamin ) A, विटामिन B6, विटामिन C, शर्करा ( Sugar ), ऊर्जा, कार्बोहाइड्रेट ( Carbohydrates ), फैट ( Fat ), कोलेस्ट्रोल ( Cholesterol ), डाइटरी फाइबर ( Dietary fiber ), मैग्नीशियम ( Magnesium ), पोटेशियम ( Potassium ), फाइबर ( Fiber ), लाइकोपीन ( Lycopene ) और कैरोटीनॉयड ( Carotenoid ) का एक स्त्रोत है।

खरबूजा के सेवन के स्वास्थ्वर्धक फायदे ( Health Benefits of Consuming Muskmelon )

खरबूजा, जो गर्मियों का एक स्वादिष्ट फल है, न केवल अपनी मिठास और ताजगी के लिए जाना जाता है, बल्कि यह कई स्वास्थ्य लाभों से भी भरपूर होता है।

रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है: विटामिन ए और सी से भरपूर होने के कारण, खरबूजा आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने और संक्रमण से लड़ने में मदद करता है।
पाचन स्वास्थ्य सुधारता है: फाइबर से भरपूर होने के कारण, खरबूजा पाचन क्रिया को सुचारू रूप से चलाने, कब्ज को दूर करने और पेट के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करता है।
हृदय स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है: पोटेशियम और मैग्नीशियम रक्तचाप को नियंत्रित करने और हृदय गति को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं, जिससे हृदय रोग का खतरा कम होता है।
त्वचा और आंखों के लिए फायदेमंद: विटामिन ए और सी त्वचा को स्वस्थ और चमकदार बनाए रखने में मदद करते हैं, जबकि कैरोटीनॉयड आंखों की रोशनी को बेहतर बनाने में मदद करते हैं।
कैंसर से बचाता है: लाइकोपीन एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट है जो कैंसर कोशिकाओं के विकास को रोकने में मदद करता है।
वजन घटाने में सहायक: खरबूजा कैलोरी में कम और पानी से भरपूर होता है, जो इसे वजन घटाने के लिए एक आदर्श भोजन बनाता है।
तनाव कम करता है: मैग्नीशियम तनाव और चिंता को कम करने में मदद करता है, जिससे मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होता है।

खरबूजा की खेती (Muskmelon Cultivation)

खरबूजा की खेती करना भी अपेक्षाकृत आसान है। यदि आप खरबूजा की खेती शुरू करने के इच्छुक हैं, तो यहां कुछ महत्वपूर्ण जानकारी दी गई है। खरबूजा वार्षिक, गर्म समय वाला पौधा है।

खरबूजा की खेती के लिए मिटटी, तापमान एवं जलवायु (Soil, Temperature and Climate for Muskmelon Cultivation)

खेत का चयन करते समय, यह सुनिश्चित करें कि यह धूप से भरपूर हो और हवा का अच्छा प्रवाह हो।

मिट्टी:
खरबूजा रेतीली-दोमट मिट्टी में अच्छी तरह से उगता है, जिसमें जल निकासी अच्छी हो। मिट्टी का pH 6.0 से 6.8 के बीच होना चाहिए। मिट्टी में कार्बनिक पदार्थों की मात्रा 2-3% होनी चाहिए। भारी मिट्टी, जलभराव वाली मिट्टी, और अम्लीय मिट्टी खरबूजा की खेती के लिए अनुकूल नहीं होती हैं।

तापमान:
खरबूजा गर्म जलवायु वाला पौधा है। बीज अंकुरण के लिए 20 से 25 डिग्री सेल्सियस तापमान उपयुक्त होता है। पौधे की वृद्धि और फल विकास के लिए 25 से 35 डिग्री सेल्सियस तापमान अनुकूल होता है। 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान फल उत्पादन को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है।

जलवायु:
खरबूजा शुष्क जलवायु वाला पौधा है। अधिक वर्षा फल विकास को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकती है। 50-60% आर्द्रता खरबूजा की खेती के लिए अनुकूल होती है। तेज हवाएं और धूल भरी आंधियां भी फल उत्पादन को नुकसान पहुंचा सकती हैं।

खरबूजा की खेती की तैयारी एवं बुवाई का समय (Preparation and Sowing Time for Muskmelon Cultivation)

बुवाई से पहले मिट्टी की अच्छी तरह से तैयारी करें और उसमें खाद डालें।

खेत की तैयारी:
खेत का चयन: धूप से भरपूर और अच्छी जल निकासी वाली रेतीली-दोमट मिट्टी वाला खेत चुनें।
मिट्टी की तैयारी: खेत की गहरी जुताई करें और मिट्टी को भुरभुरा बना लें।
खाद: गोबर की खाद या कंपोस्ट खाद 20 से 25 टन प्रति हेक्टेयर की दर से डालें।
सिंचाई: बुवाई से पहले खेत को अच्छी तरह से सींच लें।

बुवाई का समय:
खरबूजा की बुवाई का समय क्षेत्र और जलवायु के अनुसार भिन्न होता है।
उत्तर भारत: फरवरी-मार्च
दक्षिण भारत: जून-जुलाई
पूर्वोत्तर भारत: फरवरी-मार्च
पश्चिमी भारत: फरवरी-मार्च

बुवाई की विधि:
बीजों को 2 से 3 सेंटीमीटर गहरे और 60 से 90 सेंटीमीटर के अंतराल पर बोएं।
दो पौधों को एक गड्ढे में रखें और बाद में कमजोर पौधे को हटा दें।

खरबूजा की उन्नत किस्में (Improved varieties of Muskmelon)

उच्च उपज देने वाली किस्मों का चयन करें। अपनी क्षेत्रीय जलवायु और मिट्टी की स्थिति के लिए उपयुक्त किस्म का चयन करें। रोगों के प्रतिरोधी किस्मों का चयन करें। अपनी पसंद के अनुसार फल के आकार, रंग, स्वाद और रस के आधार पर किस्म का चयन करें।

1. पूसा शरबती:
यह भारत की सबसे लोकप्रिय खरबूज किस्मों में से एक है। यह एक मध्यम-देर से परिपक्व होने वाली किस्म है जो 80 से 90 दिनों में तैयार होती है। गूदा नारंगी रंग का, मीठा, रसदार और कुरकुरा होता है। यह किस्म परिवहन के लिए अच्छी है और इसकी उपज भी अच्छी होती है।

2. पूसा मधुरस:
यह एक प्रारंभिक परिपक्व होने वाली किस्म है जो 70 से 80 दिनों में तैयार होती है। फल गोल, चपटे और गहरे हरे रंग के धारीदार होते हैं। गूदा नारंगी रंग का, मीठा और रसदार होता है। यह किस्म कम पानी वाली परिस्थितियों में भी अच्छी तरह से बढ़ती है और बाजार में जल्दी बिक्री के लिए अच्छी है।

3. हरा मधु:
यह एक और लोकप्रिय प्रारंभिक परिपक्व होने वाली किस्म है जो 65 से 70 दिनों में तैयार होती है। फल गोल, मध्यम आकार के (1 से 1.5 किलोग्राम) और हरे रंग के होते हैं। गूदा नारंगी रंग का, मीठा और रसदार होता है। यह किस्म घरेलू उपयोग और स्थानीय बाजारों के लिए उपयुक्त है।

4. दुर्गापुरामधु:
यह एक देर से परिपक्व होने वाली किस्म है जो 90 से 100 दिनों में तैयार होती है।
फल गोल, बड़े आकार के (2 से 3 किलोग्राम) और हरे रंग के होते हैं। गूदा नारंगी रंग का, मीठा, रसदार और सुगंधित होता है। यह किस्म उच्च उपज देने वाली और लंबी दूरी तक परिवहन के लिए अच्छी होती है।

5. पंजाबसुनहरी:
यह एक मध्यम-देर से परिपक्व होने वाली किस्म है जो 80 से 90 दिनों में तैयार होती है। फल गोल, मध्यम आकार के (1.5 से 2 किलोग्राम) और सुनहरे रंग के होते हैं।
गूदा नारंगी रंग का, मीठा और रसदार होता है। यह किस्म उत्तर भारत में लोकप्रिय है और इसकी उपज भी अच्छी होती है।

अन्य उल्लेखनीय किस्में:
पंजाबहाइब्रिड 1: यह एक रोग प्रतिरोधी किस्म है जो अच्छी उपज देती है।
हाइब्रिडस्वर्ण: यह एक स्वादिष्ट और सुगंधित किस्म है जो बाजार में जल्दी बिकती है।
अर्काराजहंस: यह एक देर से परिपक्व होने वाली किस्म है जो उच्च उपज देती है।
अर्काजीत: यह एक रोग प्रतिरोधी और सूखा प्रतिरोधी किस्म है।
लखनऊसफेदा: यह एक स्वादिष्ट और रसदार किस्म है जो स्थानीय बाजारों में लोकप्रिय है।
हिसारसरस: यह एक प्रारंभिक परिपक्व होने वाली किस्म है जो घरेलू उपयोग के लिए अच्छी है।

खरबूजा की खेती में बीज की मात्रा (Seed Quantity in Muskmelon Cultivation)

आम तौर पर, खरबूजा की खेती में प्रति हेक्टेयर 400 ग्राम से 1 किलोग्राम बीजों की आवश्यकता होती है। बीजों को बुवाई से पहले 24 घंटे के लिए पानी में भिगो दें।

खरबूजा की खेती में बीज की मात्रा कई कारकों पर निर्भर करती है, जैसे कि:

  • किस्म: विभिन्न किस्मों के बीजों का आकार अलग-अलग होता है, जिसके लिए बुवाई की दर में अंतर होता है।
  • बुवाई की विधि: यदि आप बीजों को सीधे खेत में बो रहे हैं, तो आपको थोड़े अधिक बीजों की आवश्यकता होगी। यदि आप रोपाई लगा रहे हैं, तो आप कम बीजों का उपयोग कर सकते हैं।
  • अंकुरण दर: कुछ बीजों की अंकुरण दर दूसरों की तुलना में अधिक होती है। यदि आप बीजों की अंकुरण दर के बारे में निश्चित नहीं हैं, तो आप थोड़े अधिक बीज बो सकते हैं।

खरबूजा की खेती में सिंचाई और उर्वरक प्रबंधन (Irrigation and Fertilizer Management in Muskmelon Cultivation)

खरबूजा एक गर्म जलवायु वाला पौधा है जिसे उचित वृद्धि और फल विकास के लिए अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी और नियमित सिंचाई की आवश्यकता होती है। उर्वरक प्रबंधन भी खरबूजा की पैदावार और गुणवत्ता को प्रभावित करता है। नियमित रूप से सिंचाई करें, खासकर फल विकास के दौरान। खरपतवारों को नियंत्रित करें और समय पर कीटों और रोगों का प्रबंधन करें।

सिंचाई:
खरबूजा को बुवाई के बाद, फल लगने के बाद और फल विकास के दौरान नियमित सिंचाई की आवश्यकता होती है।
सिंचाई करते समय, मिट्टी को गीला करें, लेकिन पानी जमा न होने दें।
ड्रिप इरिगेशन जैसी जल-कुशल सिंचाई विधियों का उपयोग करना बेहतर होता है।
सुबह जल्दी या शाम को सिंचाई करें ताकि पानी के वाष्पीकरण को कम किया जा सके।

उर्वरक प्रबंधन:
खरबूजा को नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटेशियम (एनपीके) सहित सभी प्रमुख पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है।
खेत की तैयारी के समय गोबर की खाद या कंपोस्ट खाद 20-25 टन प्रति हेक्टेयर की दर से डालें।

खरबूजा की खेती करने वाले राज्य ( Muskmelon Cultivating States )

भारत में खरबूजा एक लोकप्रिय ग्रीष्मकालीन फल है। इसकी खेती पूरे देश में विभिन्न जलवायु परिस्थितियों में की जाती है।

खरबूजा उत्पादन के मामले में भारत के कुछ प्रमुख राज्य इस प्रकार हैं:

राजस्थान: राजस्थान भारत में खरबूजा का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है। यहां की जलवायु और मिट्टी खरबूजा की खेती के लिए अनुकूल है। राजस्थान के जयपुर, जोधपुर, बीकानेर, और नागौर जिले खरबूजा उत्पादन के लिए प्रसिद्ध हैं।

हरियाणा: हरियाणा भी खरबूजा उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान देता है। यहां की हिसार, करनाल, और जींद जिले खरबूजा उत्पादन के लिए प्रसिद्ध हैं।

गुजरात: गुजरात में भी खरबूजा की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। यहां के अहमदाबाद, सूरत, और वडोदरा जिले खरबूजा उत्पादन के लिए प्रसिद्ध हैं।

मध्य प्रदेश: मध्य प्रदेश में भी खरबूजा की खेती काफी लोकप्रिय है। यहां के ग्वालियर, छिंदवाड़ा, और इंदौर जिले खरबूजा उत्पादन के लिए प्रसिद्ध हैं।

महाराष्ट्र: महाराष्ट्र में भी खरबूजा की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। यहां के अहमदनगर, औरंगाबाद, और नाशिक जिले खरबूजा उत्पादन के लिए प्रसिद्ध हैं।

उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश में भी खरबूजा की खेती काफी लोकप्रिय है। यहां के आगरा, मथुरा, और कानपुर जिले खरबूजा उत्पादन के लिए प्रसिद्ध हैं।

आंध्र प्रदेश: आंध्र प्रदेश में भी खरबूजा की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। यहां के कृष्णा और गुंटूर जिले खरबूजा उत्पादन के लिए प्रसिद्ध हैं।

कर्नाटक: कर्नाटक में भी खरबूजा की खेती काफी लोकप्रिय है। यहां के बंगलुरु, मैसूर, और चामराजनगर जिले खरबूजा उत्पादन के लिए प्रसिद्ध हैं।

तमिलनाडु: तमिलनाडु में भी खरबूजा की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। यहां के मदुरै, तिरुचिरापल्ली, और विल्लुपुरम जिले खरबूजा उत्पादन के लिए प्रसिद्ध हैं।

इन राज्यों के अलावा, खरबूजा की खेती भारत के अन्य कई राज्यों में भी की जाती है।

खरबूजा की खेती में लागत एवं कमाई (Cost and Earning in Muskmelon Cultivation)

खरबूजा की खेती एक लाभदायक व्यवसाय हो सकता है। यदि आप उचित तरीके से खेती करते हैं और अच्छी गुणवत्ता वाले फल उगाते हैं, तो आप अच्छी कमाई कर सकते हैं। खरबूजा की खेती में 20 से 25 टन प्रति हेक्टेयर उपज होती है।

खरबूजा की खेती में एक हेक्टेयर खरबूजा की खेती में औसतन लागत 25000 रूपये से 35000 रूपये प्रति हेक्टेयर आती है।

एक हेक्टेयर खरबूजा की खेती से औसत कमाई वास्तव में ₹ 2,00,000 रूपये से 5,00,000 रूपये प्रति हेक्टेयर के बीच हो सकती है।

आप शबला सेवा की मदद कैसे ले सकते हैं? ( How Can You Take Help of Shabla Seva? )

  1. आप हमारी विशेषज्ञ टीम से खेती के बारे में सभी प्रकार की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
  2. हमारे संस्थान के माध्यम से आप बोने के लिए उन्नत किस्म के बीज प्राप्त कर सकते हैं।
  3. आप हमसे टेलीफोन या सोशल मीडिया के माध्यम से भी जानकारी और सुझाव ले सकते हैं।
  4. फसल को कब और कितनी मात्रा में खाद, पानी देना चाहिए, इसकी भी जानकारी ले सकते हैं।
  5. बुवाई से लेकर कटाई तक, किसी भी प्रकार की समस्या उत्पन्न होने पर आप हमारी मदद ले सकते हैं।
  6. फसल कटने के बाद आप फसल को बाजार में बेचने में भी हमारी मदद ले सकते हैं।
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