मटर का उपयोग, फायदा एवं मटर की खेती

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मटर की खेती दाल और सब्जी के लिये उगाई जाती है। मटर दाल की आवश्यकता की पूर्ति के लिये पीले मटर का उत्पादन करना अति महत्वपूर्ण है, जिसका प्रयोग दाल, बेसन एवं छोले के रूप में अधिक किया जाता है पीला मटर की खेती वर्षा आधारित क्षेत्र में अधिक लाभप्रद है इसका क्षेत्रफल मध्यप्रदेश में 2,64,000 हे।

मटर में पाए जाने वाले पोषक तत्व (Nutrients Found in Peas)

मटर में विटामिन ( Vitamin ) A, विटामिन B, विटामिन C, एंटीऑक्सीडेंट ( Antioxidants ), मैग्नीशियम ( Magnesium ) जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। मटर को फाइबर ( Fiber ) के गुणों से भी भरपूर माना जाता है। मटर में कैलोरी ( Calorie ) की मात्रा कम और प्रोटीन ( Protein ), आयरन ( Iron ) और फोलेट ( Folate ) की मात्रा अधिक पाई जाती है।

मटर के सेवन के स्वास्थवर्धक फायदे ( Health Benefits of Consuming Peas )

  1.   यह हमारे स्वास्थ्य के साथसाथ त्वचा और बालों के लिए भी काफी लाभकारी माना जाता है।
  2.   आपको मोटापे से छुटकारा पाने में मददगार साबित होता है।
  3.   मटर खाने के फायदे में कैंसर की समस्या से बचाव भी शामिल किया जाता है।
  4.   इसका नियमित इस्तेमाल रोगों से लड़ने की क्षमता को बढ़ाने में मददगार साबित हो सकता है।
  5.   मटर में कई खास तत्व पाए जाते हैं, जो हृदय संबंधी विकारों को दूर करने में सक्षम होते हैं। उनमें              खून को साफ करने का भी अद्भुत गुण पाया जाता है।
  6.   अल्जाइमर की बीमारी से संबंधित जोखिम कारकों को कम करने में सहायक होता हैं।
  7.   मटर का इस्तेमाल जोड़ों से संबंधित समस्या को दूर करने में सहायक साबित होता है।
  8.   मटर के सेवन से शरीर में कोलेस्ट्रॉल की अधिक मात्रा को नियंत्रित किया जाता है।
  9.   मटर में एंटीऑक्सीडेंट गुणों के साथसाथ एंटीहाइपर ग्लाइसेमिक (ब्लड शुगर को नियंत्रित करने            वाले) प्रभाव भी पाए जाते हैं
  10. मटर का उपयोग हड्डियों के लिए फायदेमंद साबित होता है।
  11. मटर में फाइबर, विटामिन और मिनरल्स की अच्छी मात्रा पाई जाती है, जो पेट संबंधी कई समस्याओं        को दूर करने में सहायक होते हैं। साथ ही पाचन प्रक्रिया को मजबूत करने का काम करते हैं।
  12. आंखों से संबंधित कई परेशानियों को दूर करने में सहायक होता है
  13. गर्भावस्था में हरी मटर खाने के लाभ बहुत ज्यादा होते हैं।
  14. त्वचा के संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए बेहद उपयोगी माना जाता है।
  15. मटर का सेवन इंफ्लामेशन से संबंधित समस्याओं से बचाव करता है
  16. मटर का उपयोग त्वचा को जवां बनाए रखने में लाभदायक साबित होता है
  17. एड़ियों के फटने से छुटकारा पाने में भी मददगार साबित होता है।
  18. इसमें पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट गुण केवल त्वचा को चमकदार बनाता है, बल्कि उसके बेहतर        स्वास्थ्य को बढ़ावा भी देता है।
  19. इसका इस्तेमाल त्वचा संबंधित कई विकारों को दूर करने में सहायक साबित हो सकता है। इसमें              त्वचा को आराम पहुंचाने का गुण भी शामिल है
  20. मटर का सेवन बालों की ग्रोथ में भी काफी सहायक साबित होता है।

मटर की खेती ( Pea Cultivation )

दलहनी सब्जियों में मटर का अपना एक महत्वपूर्ण स्थान है। मटर की खेती से जहां एक ओर कम समय में पैदावार प्राप्त की जा सकती है वहीं ये भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ाने में भी सहायक है। फसल चक्र के अनुसार यदि इसकी खेती की जाए तो इससे भूमि उपजाऊ बनती है। मटर में मौजूद राइजोबियम जीवाणु भूमि को उपजाऊ बनाने में सहायक है। शुरुआती किस्म के लिए 40 से 60 दिनों में कटाई की जा सकती है, मध्य सीजन की फसल 75 दिनों में और बाद की फसल की कटाई 100 दिनों में की जा सकती है।

मटर की खेती में मिट्टी, तापमान एवं जलवायु ( Soil, Temperature and Climate in Pea Cultivation )

मटर की खेती सभी प्रकार की भूमियों में की जा सकती है परंतु अधिक उत्पादन हेतु दोमट और बलुई भूमि जिसका पी. एच. मान. 6-7.5 हो तो अधिक उपयुक्त होती है। मटर के अंकुरण के लिए मिट्टी का इष्टतम तापमान 40 से 70° F होता है। यदि मिट्टी बहुत अधिक ठंडी (40 डिग्री से नीचे) है, तो बीजों को अंकुरित होने में अधिक समय लगता है और वे सड़ सकते हैं। यदि मिट्टी का तापमान बहुत अधिक है, तो अंकुरण रुक जाता है। इस खेती में बीज अंकुरण के लिए औसत 22 डिग्री सेल्सियस की जरूरत होती है, वहीं अच्छे विकास के लिए 10 से 18 डिग्री सेल्सियस तापमान बेहतर होता है।

मटर की खेती की तैयारी एवं बुवाई का समय ( Preparation and Sowing Time for Pea Cultivation)

खरीफ की फसल की कटाई के बाद भूमि की जुताई मिट्टी पलटने वाले हल करके 2-3 बार हैरो चलाकर अथवा जुताई करके पाटा लगाकर भूमि तैयार करनी चाहिए। धान के खेतों में मिट्टी के ढेलों को तोडऩे का प्रयास करना चाहिए। अच्छे अंकुरण के लिए मिट्टी में नमी होना जरुरी है। इसकी खेती के लिए अक्टूबरनवंबर माह का समय उपयुक्त होता है।

मटर की उन्नत किस्में ( Improved Varieties of Peas )

आर्केल, काशी शक्ति, पंत मटर 155, अर्ली बैजर, आजाद मटर 1, काशी नंदिनी, पूसा प्रगति, जवाहर मटर 1, काशी उदय, लिंकन, आजाद मटर 3, जवाहर मटर, टी 9, एन पी 29, काशी अगेती, अर्ली दिसंबर, टा 19, बोनविले, असौजी हैं। मटर की खेती करने के 3 तीन अलगअलग प्रकार के तरीके होते हैं स्नैप मटर, स्नो मटर और शेलिंग मटर।

मटर की खेती में बीज की मात्रा वं उपचार ( Seed Quantity and Seed Treatment in Pea Cultivation )

बीज दर लगभग 20 से 30 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर है। बीज जनित रोगो से बचाव हेतु फफूंदनाशक दवा थायरम + कार्बनडाजिम (2$1) 3 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज और रस चूसक कीटों से बचाव हेतु थायोमिथाक्जाम 3 ग्राम प्रति किलो ग्राम बीज दर से उपचार करें उसके बाद वायुमण्डलीय नत्रजन के स्थिरीकरण के लिये राइजोवियम लेग्यूमीनोसोरम और भूमि में अघुलशील फास्फोरस को घुलनशील अवस्था में परिवर्तन करने हेतु पी.एस.वी. कल्चर 5-10 ग्राम/कि.ग्रा. बीज की दर से उपचार करें जैव उर्वरकों को 50 ग्राम गुड को आधा लीटर पानी में गुनगुना कर ठंडा कर मिलाकर बीज उपचारित करें

मटर की खेती में सिंचाई एवं उर्वरक प्रबंधन ( Irrigation and Fertilizer Management in Pea Cultivation )

मटर की खेती में प्रारंभ में मिट्टी में नमी और शीत ऋतु की वर्षा के आधार पर 1-2 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है। पहली सिंचाई फूल आने के समय और दूसरी सिंचाई फलियां बनने के समय करनी चाहिए। इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि हल्की सिंचाई करें और फसल में पानी ठहरा रहे।

मटर की खेती करने वाले राज्य ( Pea Cultivating States )

भारत में प्रमुख हरी मटर उत्पादन राज्य:- कर्नाटक, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, पंजाब, असम, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, बिहार और उड़ीसा हैं। वार्षिक उत्पादन 8.3 लाख टन एवं उत्पादकता 1021 किग्रा/हेक्टेयर है। मटर उगाने वाले प्रदेशों में उत्तर प्रदेश प्रमुख हैं। उत्तरप्रदेश में 4.34 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में मटर उगाई जाती है, जो कुल राष्ट्रीय क्षेत्र का 53.7% है। इसके अतिरिक्त मध्य प्रदेश में 2.7 लाख है, उड़ीसा में 0.48 लाख, बिहार में 0.28 लाख हैं।

मटर की खेती में लागत एवं कमाई ( Cost and Earning in Pea Cultivation )

बाजार में सामान्यत मटर के भाव 20-80 रुपए प्रति किलो के हिसाब से होते हैं। यदि औसत भाव 40  रुपए प्रति किलो भी लगाए तो एक हेक्टेयर में 90000 हजार रुपए तथा इस प्रकार यदि 5 हेक्टेयर में इसकी बुवाई की जाए तो एक बार मेंलाख रुपए की कमाई की जा सकती है।

आप शबला सेवा की मदद कैसे ले सकते हैं? ( How Can You Take Help of Shabla Seva? )

  1. आप हमारी विशेषज्ञ टीम से खेती के बारे में सभी प्रकार की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
  2. हमारे संस्थान के माध्यम से आप बोने के लिए उन्नत किस्म के बीज प्राप्त कर सकते हैं।
  3. आप हमसे टेलीफोन या सोशल मीडिया के माध्यम से भी जानकारी और सुझाव ले सकते हैं।
  4. फसल को कब और कितनी मात्रा में खाद, पानी देना चाहिए, इसकी भी जानकारी ले सकते हैं।
  5. बुवाई से लेकर कटाई तक, किसी भी प्रकार की समस्या उत्पन्न होने पर आप हमारी मदद ले सकते हैं।
  6. फसल कटने के बाद आप फसल को बाजार में बेचने में भी हमारी मदद ले सकते हैं।

संपर्क

अधिक जानकारी के लिए हमसे संपर्क करें +91 9335045599 ( शबला सेवा )

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