लाल भिंडी का उपयोग, फायदा एवं लाल भिंडी की खेती

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लाल भिंडी (Red Ladyfinger), जिसे लाल भिंडी के नाम से भी जाना जाता है, भिंडी की एक किस्म है जिसमें लाल रंग की फली होती है। यह हरी भिंडी की तुलना में एक अपेक्षाकृत नई किस्म है, और यह अभी भी कुछ क्षेत्रों में उपलब्ध नहीं है। लाल भिंडी हरी भिंडी के समान बनावट वाली होती है, लेकिन लाल भिंडी का स्वाद हरी भिंडी से थोड़ा मीठा और नमकीन होता है। यह हरी भिंडी की तुलना में अधिक पौष्टिक होती है।

गोरखपुर में लाल भिंडी (Lal Bhindi) की सफल खेती ( Successful Red Ladyfinger Cultivation in Gorakhpur )

गोरखपुर के शबला सेवा संस्थान के डॉ. अविनाश कुमार ने लाल भिंडी (Lal Bhindi) की सफल खेती करके एक नया मुकाम हासिल किया है। यह भिंडी बाजार में सामान्य भिंडी से कई गुना ज्यादा कीमत पर बिकती है। इसका बाजार मूल्य 400 रुपये प्रति किलो तक चल रहा है। लाल भिंडी भारत में धीरे-धीरे लोकप्रिय हो रही है। इसकी खेती से किसानों को डेढ़ से दोगुना मुनाफा मिल सकता है।

वाराणसी के भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों ने 8 से 10 सालों की कड़ी मेहनत के बाद लाल भिंडी (Lal Bhindi) की देशी किस्म ‘काशी लालिमा’ विकसित की है। यह किस्म पोषक तत्वों से भरपूर है और हरी भिंडी से भी ज्यादा स्वास्थ्यवर्धक है।

लाल भिंडी (Lal Bhindi) को हरी भिंडी की तरह ही पकाया जा सकता है। लाल भिंडी का उपयोग विभिन्न प्रकार के व्यंजनों में किया जाता है। इसे करी, सब्जी, और सलाद में इस्तेमाल किया जा सकता है। इसे तला, उबाला, या भूनकर खाया जा सकता है। यह सूप, स्टॉज और करी में भी एक अच्छा अतिरिक्त है।

लाल भिंडी में पाए जाने वाले पोषक तत्व ( Nutrients Found in Red Ladyfinger )

लाल भिंडी (Lal Bhindi) एक स्वादिष्ट और पौष्टिक सब्जी है जो कई पोषक तत्वों से भरपूर होती है। लाल भिंडी में विटामिन (Vitamins) में विटामिन A, विटामिन C, विटामिन K और विटामिन B6 होते हैं। लाल भिंडी (Lal Bhindi) में खनिजों में मैग्नीशियम (Magnesium), सोडियम (Sodium), कैल्शियम (Calcium), आयरन (Iron), पोटेशियम (Potassium) और मैंगनीज (Manganese) आदि होते हैं। लाल भिंडी (Lal Bhindi) में अन्य पोषक तत्वों में फाइबर (Fiber), फोलेट (Folate) और राइबोफ्लेविन (Riboflavin), नियासिन (Niacin), थियामिन (Thiamine), कार्बोहाइड्रेट (Carbohydrates), प्रोटीन (Proteins) और शर्करा (Sugars) आदि पाए जाते हैं।

लाल भिंडी के सेवन से होने वाले फायदे ( Benefits of Consuming Red Ladyfinger )

लाल भिंडी (Lal Bhindi) का चयन करते समय, दृढ़ और चमकदार फली वाली फली चुनें। फली को नरम, भूरा या चोटिल नहीं होना चाहिए। लाल भिंडी को कागज के तौलिये से ढककर प्लास्टिक की थैली में रेफ्रिजरेटर में रखें। इसे 3 से 4 दिनों तक स्टोर किया जा सकता है।

लाल भिंडी (Lal Bhindi) विटामिन ए का एक अच्छा स्रोत है, जो स्वस्थ दृष्टि के लिए आवश्यक है।

लाल भिंडी विटामिन सी का भी एक अच्छा स्रोत है, जो एक महत्वपूर्ण एंटीऑक्सीडेंट है जो प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने में मदद करता है।

लाल भिंडी विटामिन K का एक अच्छा स्रोत है, जो स्वस्थ हड्डियों के लिए आवश्यक है।

लाल भिंडी (Lal Bhindi) में पोटेशियम होता है, जो रक्तचाप को कम करने में मदद कर सकता है।

लाल भिंडी फाइबर का एक अच्छा स्रोत है, जो आपको पूर्ण महसूस कराने और वजन घटाने में मदद कर सकता है।

लाल भिंडी की खेती ( Red Ladyfinger Cultivation )

लाल भिंडी (Lal Bhindi), हरी भिंडी की तुलना में एक नई किस्म है, जो अपने लाल रंग और अनोखे स्वाद के लिए लोकप्रिय हो रही है। इसकी खेती हरी भिंडी की तरह ही की जा सकती है, और यह किसानों के लिए एक लाभदायक विकल्प बन सकती है।

अगर आप लाल भिंडी (Lal Bhindi), की खेती की शुरुआत करना चाहते हैं, तो आप शबला सेवा संस्थान से संपर्क कर सकते हैं। संस्थान आपको लाल भिंडी की खेती की पूरी जानकारी और उचित मूल्य पर बीज प्रदान करेगा। आप इन नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं: +91-9335045599, 9430502802।

लाल भिंडी की खेती में जलवायु और मिट्टी ( Climate and Soil in Red Ladyfinger Cultivation )

लाल भिंडी (Lal Bhindi) गर्म और उष्ण जलवायु में अच्छी तरह से उगती है। यह 20 से 30 डिग्री सेल्सियस के तापमान में पनपती है। दोमट मिट्टी, जिसमें जल निकासी की अच्छी व्यवस्था हो, लाल भिंडी की खेती के लिए सबसे उपयुक्त होती है। मिट्टी का पीएच मान 6.5 से 7.5 के बीच होना चाहिए।

लाल भिंडी की खेती में बुवाई और रोपण ( Sowing and Planting in Red Ladyfinger Cultivation )

लाल भिंडी (Lal Bhindi) की बुवाई बीजों द्वारा की जाती है। बीजों को 2 से 3 सेंटीमीटर की गहराई में और 30 से 40 सेंटीमीटर की दूरी पर बोया जाता है। रोपाई 15 से 20 दिनों के बाद की जाती है, जब पौधों में 4 से 5 पत्तियां होती हैं। बीजों को बोने के बाद मिट्टी को हल्के से दबा दें। बुवाई के बाद खेत में हल्की सिंचाई करें।

लाल भिंडी (Lal Bhindi) की खेती में बुवाई की विधि हरी भिंडी की बुवाई की विधि से थोड़ी अलग होती है। लाल भिंडी की उन्नत देशी किस्म ‘काशी लालिमा’ के बीजों का चयन करें। या फिर हमसे सम्पर्क करके बीज प्राप्त कर सकते हैं। बीजों को स्वस्थ, रोग मुक्त और उच्च अंकुरण क्षमता वाला होना चाहिए।

लाल भिंडी (Lal Bhindi) की बुवाई के लिए दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त होती है। मिट्टी को अच्छी तरह से जुताई करके भुरभुरा बना लें। खेत में जल निकासी की उचित व्यवस्था होनी चाहिए। मिट्टी में गोबर की खाद या वर्मीकम्पोस्ट मिलाकर खाद डालें।

लाल भिंडी (Lal Bhindi) की बुवाई का सबसे अच्छा समय जुलाई से सितंबर तक होता है। आप फरवरी  से मार्च में भी बुवाई कर सकते हैं। लाल भिंडी के बीज 5 से 7 दिनों में अंकुरित हो जाते हैं।

लाल भिंडी की खेती में खाद और सिंचाई ( Fertilizer and Irrigation in Red Ladyfinger Cultivation )

लाल भिंडी (Lal Bhindi) को अच्छी पैदावार देने के लिए खाद की आवश्यकता होती है। खाद के रूप में आप निम्नलिखित का उपयोग कर सकते हैं:

गोबर की खाद: गोबर की खाद लाल भिंडी (Lal Bhindi) के लिए सबसे अच्छी खाद है। यह मिट्टी में पोषक तत्वों की मात्रा को बढ़ाता है और पौधों की वृद्धि को बढ़ावा देता है।

वर्मीकम्पोस्ट: वर्मीकम्पोस्ट एक जैविक खाद है जो पोषक तत्वों से भरपूर होता है। यह मिट्टी की उर्वरता को बढ़ाता है और पौधों की प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है।

जैविक खाद: जैविक खाद में विभिन्न प्रकार के जैविक पदार्थ होते हैं जो मिट्टी को समृद्ध बनाते हैं और पौधों को आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करते हैं।

खाद डालने की विधि:

गोबर की खाद या वर्मीकम्पोस्ट 10 से15 टन प्रति हेक्टेयर की दर से खेत में डालें।

जैविक खाद 2 से 3 टन प्रति हेक्टेयर की दर से खेत में डालें।

खाद को खेत में अच्छी तरह से मिला लें।

बुवाई से पहले खाद डालना सबसे अच्छा होता है।

लाल भिंडी (Lal Bhindi) को नियमित सिंचाई की आवश्यकता होती है। सिंचाई की मात्रा और आवृत्ति मिट्टी की प्रकार, मौसम और पौधों की वृद्धि के चरण पर निर्भर करती है।

सिंचाई की विधि:

लाल भिंडी (Lal Bhindi) की सिंचाई क्यारी विधि या फव्वारा विधि से करें।

क्यारी विधि में, खेत में छोटी-छोटी क्यारियां बनाकर उनमें पानी भरा जाता है।

फव्वारा विधि में, पंप की सहायता से पानी को पौधों पर छिड़का जाता है।

सिंचाई सुबह या शाम के समय करें।

बारिश के मौसम में सिंचाई की आवश्यकता कम होती है।

यह भी ध्यान दें:

लाल भिंडी (Lal Bhindi) को अधिक पानी न दें। इससे जड़ सड़न हो सकती है।

सिंचाई के बाद खेत में जल निकासी की उचित व्यवस्था होनी चाहिए।

यदि आपको लाल भिंडी की खेती में कोई समस्या हो रही है, तो हमसे संपर्क कर सकते हैं।

लाल भिंडी की खेती में रोग और कीट ( Diseases and Pests in Red Ladyfinger Cultivation )

लाल भिंडी (Lal Bhindi) की खेती में कई तरह के रोग और कीट लग सकते हैं। इनमें से कुछ प्रमुख रोग और कीट निम्नलिखित हैं:

रोग:

पाउडर फफूंदी: यह एक कवक रोग है जो पत्तियों पर सफेद धब्बे पैदा करता है।

झुलसा: यह एक कवक रोग है जो पत्तियों पर भूरे रंग के धब्बे पैदा करता है।

जड़ सड़न: यह एक कवक रोग है जो पौधे की जड़ों को सड़ा देता है।

कीट:

तुआ तुआ: यह एक छोटा कीट है जो पत्तियों को खाता है।

फली छेदक: यह एक कीट है जो फली में छेद करता है।

सफेद मक्खी: यह एक छोटा कीट है जो पौधे से रस चूसता है।

रोकथाम और नियंत्रण:

रोगों और कीटों से बचाव के लिए, आपको उचित कृषि पद्धतियों का उपयोग करना चाहिए।

बुवाई से पहले बीजों को उचित तरीके से उपचारित करें।

खेत में जल निकासी की उचित व्यवस्था होनी चाहिए।

खेत में समय-समय पर खरपतवारों को हटाते रहें।

रोगों और कीटों के शुरुआती लक्षण दिखने पर उचित उपचार करें।

रोगों और कीटों का उपचार:

रोगों और कीटों का उपचार करने के लिए विभिन्न प्रकार के रसायनों और जैविक कीटनाशकों का उपयोग किया जा सकता है।

रसायनों का उपयोग करते समय सावधानी बरतें और निर्माता के निर्देशों का पालन करें।

जैविक कीटनाशक सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल होते हैं।

लाल भिंडी की खेती में कटाई और पैदावार ( Harvesting and Yield in Red Ladyfinger Cultivation )

लाल भिंडी (Lal Bhindi) की फली 3 से 4 महीने में कटाई के लिए तैयार हो जाती है। फली को नरम होने से पहले तोड़ लेना चाहिए। लाल भिंडी की कटाई सुबह या शाम के समय करें।

कटाई:

लाल भिंडी (Lal Bhindi) की फली को हाथ से तोड़ें।

लाल भिंडी को तोड़ते समय सावधानी बरतें ताकि पौधे को नुकसान न पहुंचे।

कटी हुई फली को साफ और सूखी जगह पर रखें।

पैदावार:

लाल भिंडी (Lal Bhindi) की औसत पैदावार 10 से 15 टन प्रति हेक्टेयर होती है। अच्छी कृषि पद्धतियों का उपयोग करके पैदावार को बढ़ाया जा सकता है।

पैदावार बढ़ाने के लिए कुछ सुझाव:

उन्नत किस्मों के बीजों का उपयोग करें।

उचित खाद और सिंचाई का प्रबंधन करें।

रोगों और कीटों से बचाव के लिए उचित उपाय करें।

समय पर कटाई करें।

लाल भिंडी की खेती में बाजार और लाभ ( Market and Profits in Red Ladyfinger Cultivation )

लाल भिंडी (Lal Bhindi) की बाजार में अच्छी मांग है। यह हरी भिंडी की तुलना में अधिक मूल्य पर बेची जाती है। लाल भिंडी को स्थानीय बाजारों, मंडियों या सुपरमार्केट में बेचा जा सकता है। लाल भिंडी में हरी भिंडी की तुलना में अधिक पोषक तत्व होते हैं।

लाल भिंडी (Lal Bhindi) की खेती एक लाभदायक व्यवसाय हो सकता है। यह किसानों को अच्छी आय प्रदान कर सकती है। लाल भिंडी की मांग धीरे-धीरे बढ़ रही है। लाल भिंडी हरी भिंडी की तुलना में 5 से 7 गुना अधिक कीमत पर बेची जाती हैकम उत्पादन के कारण लाल भिंडी का उत्पादन हरी भिंडी की तुलना में कम होता है, जिसके कारण इसकी कीमत अधिक होती है।

लाल भिंडी की खेती करने वाले राज्य ( Red Ladyfinger Cultivation States )

लाल भिंडी (Lal Bhindi) की खेती पूरे भारत में भी की जाती है लेकिन कुछ राज्य लाल भिंडी की खेती को ज्यादा प्राथमिकता दी जाती है।

उत्तर भारत में लाल भिंडी (Lal Bhindi) की खेती उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब और दिल्ली में की जाती है।

दक्षिण भारत में लाल भिंडी (Lal Bhindi) की खेती आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल और तेलंगाना में की जाती है।

मध्य भारत में लाल भिंडी (Lal Bhindi) की खेती मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और गुजरात में की जाती है।

पूर्वी भारत में लाल भिंडी (Lal Bhindi) की खेती बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और उड़ीसा में की जाती है।

लाल भिंडी की खेती लागत और कमाई ( Cost and Earning in Red Ladyfinger Cultivation )

लाल भिंडी (Lal Bhindi) की खेती एक लाभदायक व्यवसाय हो सकता है। यह किसानों को अच्छी आय प्रदान कर सकती है।

लाल भिंडी (Lal Bhindi) की खेती में लागत कई कारकों पर निर्भर करती है इसीलिए लाल भिंडी की खेती में अनुमानित लागत 20,000 रुपये प्रति हेक्टेयर हो सकती है।

लाल भिंडी (Lal Bhindi) की खेती में कमाई कई कारकों पर निर्भर करती है इसीलिए लाल भिंडी की खेती में अनुमानित कमाई 1,00,000 से 5,00,000 रुपये प्रति हेक्टेयर हो सकती है।

ज्यादा जानकारी के लिए शबला सेवा से सम्पर्क करें।

आप शबला सेवा की मदद कैसे ले सकते हैं? ( How Can You Take Help of Shabla Seva? )

  1. आप हमारी विशेषज्ञ टीम से खेती के बारे में सभी प्रकार की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
  2. हमारे संस्थान के माध्यम से आप बोने के लिए उन्नत किस्म के बीज प्राप्त कर सकते हैं।
  3. आप हमसे टेलीफोन या सोशल मीडिया के माध्यम से भी जानकारी और सुझाव ले सकते हैं।
  4. फसल को कब और कितनी मात्रा में खाद, पानी देना चाहिए, इसकी भी जानकारी ले सकते हैं।
  5. बुवाई से लेकर कटाई तक, किसी भी प्रकार की समस्या उत्पन्न होने पर आप हमारी मदद ले सकते हैं।
  6. फसल कटने के बाद आप फसल को बाजार में बेचने में भी हमारी मदद ले सकते हैं।

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