ककड़ी का उपयोग, फायदा एवं ककड़ी की खेती

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ककड़ी का वानस्पतिक नाम कुकमिस मेलो ( Cucumis Melo ) है। इसका मूल स्थान भारत है। यह मुलायम त्वचा और सफेद गूदे के साथ हल्के हरे रंग का होता है। यह मुख्य रूप से नमक और काली मिर्च के साथ सलाद के रूप में खाया जाता है।  इसे मुख्य रूप से गर्मी के मौसम में खाया जाता है। इसकी बेलें लंबी, हल्के हरे रंग का तना, पतला और लंबा फल होता है।

ककड़ी में पाए जाने वाले पोषक तत्व ( Nutrients found in Snake Cucumber )

ककड़ी पानी से भरपूर होती है है। इसमें विटामिन ( Vitamin ) A, विटामिन C, विटामिन K, पोटैशियम ( Potassium ), फाइबर ( Fiber ) जैसे कई पोषक तत्व पाए जाते हैं। शरीर की चर्बी को कम करने के लिए आप ककड़ी का सेवन कर सकते हैं।

ककड़ी के सेवन के स्वास्थ्वर्धक फायदे ( Health Benefits of Consuming Snake Cucumber )

गर्मी के मौसम में पानी से भरपूर फलों का सेवन शरीर के लिए फायदेमंद होता है। पानी से भरपूर फल शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करता है और डिहाइड्रेशन की समस्या से बचाता है। गर्मियों में ककड़ी का सेवन सेहत के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है।  ककड़ी का प्रभाव ठंडा होता है। ऐसे में यह शरीर को ठंडक भी पहुंचाता है। इसके सेवन से पाचन से जुड़ी समस्याओं से राहत मिलती है। इसके साथ ही ककड़ी वजन घटाने में भी बहुत फायदेमंद होता है।

ककड़ी की खेती ( Snake Cucumber Cultivation )

ककड़ी की मांग गर्मियों में काफी बढ़ जाती है। ककड़ी में पर्याप्त मात्रा में पानी और विटामिन पाई जाती है जो शरीर के लिए काफी फायदेमंद होती है। ककड़ी की खेती के लिए अच्छी तरह से तैयार ज़मीन की आवश्यकता होती है। मिट्टी को भुरभुरा करने के लिए हैरो से 2-3 बार जोताई करना आवश्यक है।

ककड़ी की खेती के लिए मिट्टी, तापमान एवं जलवायु ( Soil, Temperature and Climate for Snake Cucumber Cultivation )

इसे मिट्टी की कई किस्मों में उगाया जा सकता है जैसे रेतली दोमट से भरी मिट्टी जो अच्छे निकास वाली हो। इसकी खेती के लिए मिट्टी का पी एच मान 6 – 7.5 होना चाहिए| ककड़ी की खेती के लिए गर्म और शुष्क जलवायु अच्छी मानी जाती है। इसके पौधे को पूरी तरह से 25 से 35 डिग्री सेल्सियस के बीच तापमान की आवश्यकता होती है। इसके अलावा इसके बीजों को 20 डिग्री सेल्सियस से कम तापमान में स्टोर करना चाहिए।

ककड़ी की खेती की तैयारी और बुवाई का समय ( Snake Cucumber Cultivation Preparation and Sowing Time )

फसल बोने से 20 दिन पहले मिट्टी पलटने वाले हल से जुताई करें, जिससे खेत में मौजूद खरपतवार तथा कीटपतंगे नष्ट हो जाते हैं। बुवाई से पहले 10 से12 टन गोबर की खाद और 2.5 किलोग्राम ट्राइकोडर्मा केमिकल प्रति एकड़ में डालें। खाद डालने के बाद खेत की एक बार जुताई कर उसे समतल कर लें। इसकी खेती की बुवाई फरवरी से मार्च महीने में की जाती हैं। इन महीनों में खेती की नमी के अनुसार इसकी सिंचाई करना चाहिए। बीजों को सीधे क्यारियों या मेड़ों पर 3 से 4 सेंटीमीटर की गहराई में बोया जाता है।

ककड़ी की उन्नत किस्में ( Improved Varieties of Snake Cucumber )

ककड़ी की उन्नत किस्में ये है-

पंजाब स्पेशलपैदावार 90 से 95 दिनों के बाद 200 क्विंटल प्रति हेक्टेयर

अर्का शीतलपैदावार 90 से 100 दिनों के बाद 200 क्विंटल प्रति हेक्टेयर

जैनपुरी ककड़ीपैदावार 80 से 85 दिन के बाद 150 से 180 क्विंटल प्रति हेक्टेयर

दुर्गापुरी ककड़ीपैदावार 90 से 100 दिन में 150 क्विंटल प्रति हेक्टेयर

लखनऊ ककड़ीपैदावार  75 से 80 दिनों में180 क्विंटल प्रति हेक्टेयर

ककड़ी की खेती में बीज की मात्रा एवं बीज उपचार ( Seed Quantity and Seed Treatment in Snake Cucumber Cultivation )

एक हेक्टेयर खेत में लगभग 2 किग्रा बीज पर्याप्त होता है। इसके बीजों को खेत में बोने से पूर्व बीजों को बैंलेट या बाविस्टीन 2.5 ग्राम प्रति किलो से उपचार करके मिट्टी जनित रोगों से बचाएं।

ककड़ी की खेती में सिंचाई और उर्वरक प्रबंधन ( Irrigation and Fertilizer Management in Snake Cucumber Cultivation )

बुवाई के तुरंत बाद सिंचाई आवश्यक है। गर्मियों में 4 – 5 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है और बरसात के मौसम में आवश्यकता अनुसार सिंचाई करें। ककड़ी की फसल के लिए बुवाई के समय 200 क्विंटल गोबर की खाद, 2 किग्रा ट्राइकोडर्मा, 8 किग्रा कार्बोफ्यूरान, 30 किग्रा यूरिया, 4 किग्रा जाइम, 4 किग्रा सल्फर, 90 किग्रा सिंगल सुपर फास्फेट, 45 किग्रा पोटाश का प्रयोग 1 एकड़ खेत में किया जाता है।

भारत में ककड़ी के उत्पादक राज्य ( Snake Cucumber Producing States in India )

भारत में दक्षिण भारत के कर्नाटक राज्य में एक मामूली शुरुआत हुई और बाद में पड़ोसी राज्यों तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश तक इसका विस्तार हुआ बाद में यह की पश्चिम बंगाल, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार में खेती होने लगी।

ककड़ी की खेती में लागत एवं कमाई ( Cost and Earning in Snake Cucumber Cultivation )

ककड़ी को कम लागत में ज़्यादा कमाई देने वाली उपज माना जाता है। औसतन 60 हज़ार रुपये प्रति एकड़ की लागत में करीब 70 क्विंटल ककड़ी की पैदावार होती है। ककड़ी की खेती में ₹500000 का मुनाफा कमा लेते हैं।

आप शबला सेवा की मदद कैसे ले सकते हैं? ( How Can You Take Help of Shabla Seva? )

  1. आप हमारी विशेषज्ञ टीम से खेती के बारे में सभी प्रकार की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
  2. हमारे संस्थान के माध्यम से आप बोने के लिए उन्नत किस्म के बीज प्राप्त कर सकते हैं।
  3. आप हमसे टेलीफोन या सोशल मीडिया के माध्यम से भी जानकारी और सुझाव ले सकते हैं।
  4. फसल को कब और कितनी मात्रा में खाद, पानी देना चाहिए, इसकी भी जानकारी ले सकते हैं।
  5. बुवाई से लेकर कटाई तक, किसी भी प्रकार की समस्या उत्पन्न होने पर आप हमारी मदद ले सकते हैं।
  6. फसल कटने के बाद आप फसल को बाजार में बेचने में भी हमारी मदद ले सकते हैं।

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