सूरजमुखी का उपयोग, फायदा एवं सूरजमुखी की खेती

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सूरजमुखी का फूल दिखने में सुंदर और आकर्षक होता है, इस फूल को सूरजमुखी या सूर्यमुखी के नाम से भी जाना जाता है। इसका वानस्पतिक नाम हेलियनथस एनस है। इस फूल की खेती दुनिया के सभी देशों में की जाती है। इसे अमेरिका का मूल निवासी माना जाता है। अमेरिका में इस पौधे को वार्षिक पौधा भी माना जाता है। वहाँ यह साल के सभी महीनों में उगाया जाता है। सूरजमुखी जीनस कंपोजिटाई के जीनस हेलियनथस का सदस्य है। इस गण में लगभग साठ प्रजातियाँ पाई जाती हैं।

सूरजमुखी को मूल रूप से अमेरिका का मूल निवासी माना जाता है, लेकिन इसके अलावा यह पौधा डेनमार्क, स्वीडन, रूस, अमेरिका, मिस्र, भारत और ब्रिटेन समेत कई देशों में उगाया जाता है। सूरजमुखी का नाम सूरजमुखी क्यों पड़ा? सूरजमुखी को सूर्यमुखी कहा जाता है, क्योंकि यह सूर्य की पहली किरण से सूर्यास्त के समय तक सूर्य की ओर झुका रहता है। आप इस नजारे को करीब से देख सकते हैं। यद्यपि अधिकांश पौधे सूर्य की ओर झुकते हैं, लेकिन यदि आप सूरजमुखी के फूल को लगातार कुछ समय तक देखते हैं तो आप इसे घूमते हुए महसूस कर सकते हैं। सूरजमुखी के बीज आवश्यक फैटी एसिड, विटामिन और खनिजों से भरपूर होते हैं  जो सेहत के लिए काफी फायदेमंद माने जाते हैं। सूरजमुखी के बीज कई बीमारियों के खतरे से बचाने में मदद कर सकते हैं। सूरजमुखी के बीज हमारे शरीर के लिए बहुत ही सेहतमंद माने जाते हैं। आज के समय में लोग अपनी सेहत को लेकर काफी जागरूक हो गए हैं और उन्होंने अपने खाने में अलसी, कद्दू, तिल और सूरजमुखी के बीजों का सेवन करना शुरू कर दिया है। सूरजमुखी के बीज बहुत फायदेमंद माने जाते हैं। वे अपने गुणों और लाभों के कारण हर जगह लोकप्रिय हैं। सूरजमुखी में कई ऐसे पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो आपके शरीर को कई समस्याओं से बचाने में मदद कर सकते हैं।

सूरजमुखी के बीज में पाए जाने वाले खनिज ( Minerals Found in Sunflower Seeds )

सूरजमुखी के बीज में विटामिन ( Vitamin ) E, विटामिन B और प्रोटीन ( Protein ), सेलेनियम ( Selenium ), मैग्नीशियम ( Magnesium ), आयरन ( Iron ), फास्फोरस ( Phosphorus ), कैल्शियम ( Calcium ) जिंक ( Zink ) खनिज पाए जाते हैं।

सूरजमुखी के बीज के स्वास्थ्यवर्धक फायदे ( Health Benefits of Sunflower Seeds )

  • सूरजमुखी के बीजों का सेवन रक्त वाहिकाओं में कोलेस्ट्रॉल जमा होने से रोककर दिल के दौरे और स्ट्रोक के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है।
  • सूरजमुखी के बीजों में विटामिन सी और विटामिन ई पाया जाता है, जो दिल को कई खतरों से बचाने का कामकर सकता है।
  • सूरजमुखी के बीज फाइबर से भरपूर होते हैं, जो कब्ज की समस्या को दूर करने में मदद करते हैं।
  • सूरजमुखी में मैग्नीशियम के गुण अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं। जो हड्डियों के लिए फायदेमंद माने जाते हैं। यह हड्डियों को मजबूत बनाने और जोड़ों के दर्द से राहत दिलाने में मदद करता है।

सूरजमुखी की खेती ( Sunflower Cultivation )

सूरजमुखी एक प्रमुख तिलहनी फसल है। वैसे तो इसकी खेती रबी, खरीफ, जायद तीनों ही फसल सीजन में की जाती है, लेकिन बेहतर उपज के लिए रबी के बाद जायद सीजन में इसकी खेती करने की सलाह दी जाती है। साथ में मधुमक्खी पालन करके भी किसान अच्छी आमदनी ले रहे हैं। सूरजमुखी का तेल बाजार में काफी अच्छे दाम पर बिक रहा है। देश को तिलहन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सूरजमुखी के प्रोडक्शन पर फोकस किया जा रहा है। ज्यादातर राज्यों के किसान सूरजमुखी की फसल लगाते हैं, लेकिन कर्नाटक, उड़ीसा, हरियाणा, महाराष्ट्र और बिहार से सूरजमुखी का 75 प्रतिशत उत्पादन मिल रहा है, जबकि इस लिस्ट में कर्नाटक का नाम टॉप पर है।

सूरजमुखी की खेती के लिए मिट्टी और जलवायु ( Soil and Climate for Sunflower Farming )

सूरजमुखी की खेती खरीफ, रबी और जैद तीनों मौसमों में की जा सकती है, लेकिन खरीफ में कई बीमारियों और कीटों के प्रकोप के कारण फूल छोटे होते हैं और अनाज कम होता है। जायद में सूरजमुखी की पैदावार अच्छी होती है। इस कारण इसकी खेती ज्यादातर जैद में की जाती है। सूरजमुखी को विभिन्न प्रकार की मिट्टी में उगाया जाता है, जिसमें अच्छी तरह से सूखा और दोमट से लेकर रेतीली मिट्टी होती है जिसमें कार्बनिक पदार्थ होते हैं। लेकिन यह रेतीली और अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी में सर्वोत्तम परिणाम देता है। बेहतर परिणाम के लिए अच्छी खेती के लिए मिट्टी का पीएच 6.5 होना चाहिए। सामान्य परिस्थितियों में आर्द्र और उपोष्णकटिबंधीय जलवायु इसके लिए सर्वोत्तम मानी जाती है। इसकी कुछ किस्मों को समशीतोष्ण जलवायु में भी आसानी से उगाया जा सकता है। इसके पौधों की वृद्धि के लिए 24 सेंटीग्रेड से 32 सेंटीग्रेड का तापमान सबसे उपयुक्त होता है।

खेत की तैयारी ( Preparation for Farming )

सूरजमुखी की खेती के लिए खेत की तैयारी में पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से और दो से तीन जुताई देशी हल या कल्टीवेटर से करनी चाहिए। जुताई के बाद खेत को समतल कर स्लेट का बना लेना चाहिए। भूमि की तैयारी के समय पुरानी फसलों के अवशेषों को इकट्ठा करके जला दें। वहीं गाय के गोबर की सड़ी हुई खाद को खेत में मिला देना चाहिए।

सूरजमुखी की उन्नत किस्में ( Improved Varieties of Sunflower )

बीएसएस-1(B.S.S-1 ), केबीएसएस-1, ज्वालामुखी, एमएसएफएच-19, सूर्या आदि।

सूरजमुखी की खेती करने वाले के उत्पादक राज्य ( Producing States of Sunflower Cultivators )

कृषि मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि कर्नाटक, उड़ीसा, हरियाणा, महाराष्ट्र और बिहार के किसान सूरजमुखी की खेती में काफी रुचि लेते हैं। इन राज्यों से कुल उत्पादन का 75% प्रोडक्शन मिल रहा है। उड़ीसा दूसरे नंबर पर है, जहां से 9.46 प्रतिशत प्रोडक्शन मिल रहा है । इस लिस्ट में 7.90 प्रतिशत प्रोडक्शन के साथ तीसरे नंबर पर हरियाणा, 5.70 प्रतिशत उत्पादन के साथ चौथे नंबर पर महाराष्ट्र और 5.40 प्रतिशत उत्पादन देकर बिहार पांचवे नंबर पर कायम हो रहा है। 

कर्नाटक 48% सूरजमुखी उत्पादन करता है ( Karnataka produces 48% of Sunflower )

कर्नाटक की मिट्टी और जलवायु को सूरजमुखी की खेती के लिए सबसे अनुकूल माना गया है। यही वजह है कि यहां के किसान देश के कुल सूरजमुखी उत्पादन का 48.65 प्रतिशत सूरजमुखी का उत्पादन दे रहे हैं।

सूरजमुखी की खेती में लागत और कमाई ( Cost and Earning in Sunflower Farming )

सूरजमुखी की खेती आप कम जमीन में भी कर सकते हैं, लेकिन उसके अनुसार मुनाफा भी कम होगा। इसलिए जितना हो सके उतना करें क्योंकि इस खेती में नुकसान सिर्फ 10 से 15 प्रतिशत ही होता है। औसतन 1 हेक्टेयर सूरजमुखी की खेती की लागत 50 हजार से 60 हजार तक हो सकती है और लाभ 8 से 10 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर हो सकता है। सूरजमुखी की फसल प्रति हेक्टेयर औसतन 5.6 क्विंटल उपज देती है। इस फसल को आप साल में तीनों मौसम में कर सकते हैं और आसानी से 15 लाख रुपए कमा सकते हैं।

आप शबला सेवा की मदद कैसे ले सकते हैं? ( How Can You Take Help of Shabla Seva? )

  1. आप हमारी विशेषज्ञ टीम से खेती के बारे में सभी प्रकार की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
  2. हमारे संस्थान के माध्यम से आप बोने के लिए उन्नत किस्म के बीज प्राप्त कर सकते हैं।
  3. आप हमसे टेलीफोन या सोशल मीडिया के माध्यम से भी जानकारी और सुझाव ले सकते हैं।
  4. फसल को कब और कितनी मात्रा में खाद, पानी देना चाहिए, इसकी भी जानकारी ले सकते हैं।
  5. बुवाई से लेकर कटाई तक, किसी भी प्रकार की समस्या उत्पन्न होने पर आप हमारी मदद ले सकते हैं।
  6. फसल कटने के बाद आप फसल को बाजार में बेचने में भी हमारी मदद ले सकते हैं।

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