तुलसी का उपयोग, फायदा एवं तुलसी की खेती

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तुलसी (Tulsi/Basil), जिसे “पवित्र तुलसी (Holy Tulsi)” या “होली तुलसी (Holy Basil)” के रूप में भी जाना जाता है, भारत में सबसे लोकप्रिय पौधों में से एक है। तुलसी भारत में सबसे लोकप्रिय पौधों में से एक, हजारों सालों से हमारे जीवन का हिस्सा रहा है। तुलसी, भारत का प्रिय पौधा, धार्मिक, औषधीय और पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण है। तुलसी पवित्रता का प्रतीक है। घरों, मंदिरों और बगीचों में उगाया जाने वाला यह पौधा धार्मिक अनुष्ठानों और त्योहारों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसकी खेती किसानों और बागवानों के लिए आय का एक अच्छा स्रोत बन सकती है।

बंजर और बेकार जमीन पर तुलसी की खेती: किसानों के लिए एक वरदान

बंजर और बेकार पड़ी जमीन पर खेती न होना एक आम समस्या है। कुछ किसानों के लिए बोरिंग करवाना भी संभव नहीं होता, जिसके कारण उनकी जमीन बंजर रहती है। शबला सेवा संस्थान, गोरखपुर (उ. प्र) के संस्थापक डॉ. अविनाश कुमार की पहल से इस समस्या का समाधान हो रहा है।

संस्था किसानों को औषधीय पौधों की खेती का प्रशिक्षण और बीज मुफ्त में प्रदान कर रही है। यह खेती वर्षा आधारित होती है, जिसके कारण सिंचाई की कम आवश्यकता होती है। इसके अलावा, औषधीय पौधों की खेती में पारंपरिक फसलों की तुलना में कम लागत आती है और मुनाफा अधिक होता है।

किसान भाई शबला सेवा संस्थान से जुड़कर तुलसी, भूई, आंवला, कालमेघ, शंखपुष्पी, सहजन, कौंच और कपूर कचरी जैसी औषधीय पौधों की जैविक खेती कर रहे हैं। इन फसलों से उन्हें पारंपरिक फसलों की तुलना में अधिक मुनाफा हो रहा है।

संस्था के साथ बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, उत्तराखंड और छत्तीसगढ़ के करीब दो हजार किसान प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़कर औषधीय पौधों की जैविक खेती कर रहे हैं।

संस्था के संस्थापक डॉ. अविनाश कुमार का कहना है कि संस्था किसानों को निःशुल्क बीज और प्रशिक्षण देती है। साथ ही किसानों की उपज भी संस्था खरीद लेती है। किसान को अपनी फसल बेचने के लिए भटकना नहीं पड़ता है।

सन 2016 में अविनाश कुमार ने अपने 22 एकड़ खेत से औषधीय पौधों की जैविक खेती शुरू की थी। उन्होंने आसपास के किसान भाइयों को भी निःशुल्क प्रशिक्षण और बीज वितरण शुरू किया।

अविनाश कुमार ने औषधीय पौधों की जैविक और प्राकृतिक विधि से खेती सीखने के लिए देश के विभिन्न राज्यों के कृषि विश्वविद्यालय, कृषि विज्ञान केंद्र और अन्य संस्थाओं का भ्रमण किया। उन्होंने विभिन्न राज्यों की जलवायु को समझने का प्रयास करके उस मौसम के अनुरूप खेती कर रहे हैं।

यह पहल गरीब किसानों के लिए एक वरदान है। यह उन्हें अपनी ऊसर जमीन का उपयोग करके अच्छी आय अर्जित करने का अवसर प्रदान करती है।

तुलसी में पाए जाने वाले पोषक तत्व ( Nutrients found in Tulsi/Basil )

तुलसी पोषक तत्वों से भरपूर होती है। तुलसी में विटामिन, खनिज और एंटीऑक्सीडेंट आदि पाए जाते हैं। तुलसी में पाए जाने वाले विटामिन (Vitamin) में विटामिन A, विटामिन C, विटामिन E और विटामिन K आदि पाए जाते हैं। तुलसी में पाए जाने खनिजों में कैल्शियम (calcium), आयरन (iron), मैग्नीशियम (magnesium) और पोटेशियम (potassium) पाए जाते हैं। तुलसी में एंटीऑक्सीडेंट (Antioxidants) में यूजीनॉल (Eugenol), रोजमेरिक एसिड (Rosmarinic Acid) और ल्यूटिन (Lutein) पाए जाते हैं।

तुलसी के सेवन से होने वाले स्वास्थ्य लाभ ( Health Benefits of Consuming Tulsi/Basil )

तुलसी एक औषधीय पौधा है जो कई स्वास्थ्य लाभ प्रदान करता है। आयुर्वेद में तुलसी को स्वास्थ्य के लिए अमृत माना जाता है। इसकी जड़, शाखाएं, पत्तियां और बीज सभी औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं। तुलसी का सेवन विभिन्न तरीकों से किया जा सकता है। तुलसी का सेवन करते समय कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए।

ध्यान दें – जिन लोगों को एलर्जी है, उन्हें तुलसी का सेवन करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। तुलसी का अत्यधिक सेवन न करें। गर्भवती महिलाओं को तुलसी का सेवन डॉक्टर की सलाह से ही करना चाहिए।

तुलसी – स्वास्थ्य के लिए अमृत (Tulsi/Basil – Elixir for Health

पुरुषों के लिए फायदे (Benefits for Men) –

  1. पुरुषों में शारीरिक कमजोरी दूर करने के लिए तुलसी के बीज का सेवन लाभदायक होता है।
  2. यौन-दुर्बलता और नपुंसकता में भी तुलसी के बीज का नियमित सेवन लाभकारी होता है।

महिलाओं के लिए फायदे (Benefits for Women) –

मासिक धर्म की अनियमितता को दूर करने के लिए तुलसी के बीज या पत्तियों का नियमित सेवन फायदेमंद होता है।

प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करना (Strengthening the Immune System):

तुलसी में एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करते हैं और संक्रमण से लड़ने में मदद करते हैं।

सर्दी-बुखार (Cold and Fever) –

सर्दी या हल्के बुखार में तुलसी के पत्ते, मिश्री और काली मिर्च का काढ़ा पीने से लाभ होता है।

दस्त (Diarrhea) –

दस्त से परेशानी होने पर तुलसी (Tulsi/Basil ) के पत्तों और जीरे को पीसकर दिन में 3 से 4 बार चाटने से दस्त रुक जाता है।

सांसों की दुर्गंध (Bad Breath) –

तुलसी के पत्तों को चबाने से सांसों की दुर्गंध दूर होती है।

घाव (Wound):

घाव को जल्दी ठीक करने के लिए तुलसी के पत्तों को फिटकरी के साथ मिलाकर लगाने से घाव जल्दी भर जाता है।

तनाव कम करना (Reducing Stress) –

तुलसी में एंटी-स्ट्रेस गुण होते हैं जो तनाव और चिंता को कम करने में मदद करते हैं।

संक्रमण से लड़ना (Fighting Infection) –

तुलसी में एंटीबैक्टीरियल, एंटीवायरल और एंटीफंगल गुण होते हैं जो विभिन्न प्रकार के संक्रमण से लड़ने में मदद करते हैं।

पाचन में सुधार करना (Improves Digestion):

तुलसी पाचन क्रिया को बेहतर बनाने और पेट फूलना, अपच और कब्ज जैसी पाचन संबंधी समस्याओं को दूर करने में मदद करती है।

त्वचा और बालों के स्वास्थ्य को बढ़ावा देना (Promote Skin and Hair Health):

तुलसी में एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं जो त्वचा और बालों को नुकसान से बचाते हैं। यह त्वचा को स्वस्थ और चमकदार बनाने और बालों के झड़ने को रोकने में मदद करता है।

तुलसी के अन्य फायदे (Other Benefits of Tulsi/Basil) –

तुलसी रक्तचाप को नियंत्रित करने, मधुमेह को नियंत्रित करने, कैंसर से बचाव करने और हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में भी मदद कर सकती है।

तुलसी का सेवन कैसे करें (How to Consume Tulsi/Basil) –

तुलसी का सेवन विभिन्न तरीकों से किया जा सकता है, जैसे:

  1. तुलसी की चाय (Tulsi/Basil Tea) – यह तुलसी का सेवन करने का सबसे लोकप्रिय तरीका है। तुलसी की पत्तियों को पानी में उबालकर चाय बनाई जा सकती है। तुलसी के पत्तों का काढ़ा बनाकर भी पी सकते हैं।
  2. तुलसी का रस (Tulsi/Basil Juice) – तुलसी की पत्तियों का रस निकालकर इसका सेवन किया जा सकता है।
  3. तुलसी का पाउडर (Tulsi/Basil Powder) – तुलसी के पत्तों और बीजों को सुखाकर पीसकर पाउडर बनाया जा सकता है। इस पाउडर को दूध या पानी में मिलाकर इसका सेवन किया जा सकता है।

तुलसी की खेती ( Tulsi/Basil Farming )

तुलसी एक औषधीय पौधा है जिसकी खेती भारत में बड़े पैमाने पर की जाती है। तुलसी की पत्तियों, फूलों और बीजों का उपयोग विभिन्न औषधियों, सौंदर्य प्रसाधनों और खाद्य पदार्थों में किया जाता है। तुलसी की खेती में बहुत सारे लाभ हैं। तुलसी की खेती करना अपेक्षाकृत आसान है और यह कम लागत में की जा सकती है। तुलसी की खेती एक लाभदायक व्यवसाय है। यह किसानों के लिए आय का एक अच्छा स्रोत बन सकता है। अगर आप शबला सेवा संस्थान के माध्यम से तुलसी की खेती करते हैं तो हमारी संस्था फ्री में बीज देती है। अधिक जानकारी के लिए शबला सेवा से सम्पर्क करें।

तुलसी के प्रकार (Types of Tulsi/Basil)

भारत में घरों में आमतौर पर दो तरह की तुलसी देखने को मिलती है ।

  1. हल्के रंग की पत्तियों वाली तुलसी, हरी तुलसी (रामा तुलसी): हरी तुलसी के बीज और पत्तियाँ हरे रंग के होती हैं।
  2. गहरे रंग की पत्तियों वाली तुलसी, कृष्णा तुलसी (श्यामा तुलसी): कृष्णा तुलसी के बीज हल्के काले रंग के होते हैं। कृष्णा तुलसी की पत्तियाँ भी श्यामा रंग (हल्के काला रंग) की होती है।

तुलसी की खेती में जलवायु (Climate in Tulsi/Basil Farming)

तुलसी उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय जलवायु में अच्छी तरह से उगती है। इसे 20 से 30 डिग्री सेल्सियस के बीच तापमान की आवश्यकता होती है।

तुलसी की खेती में मिट्टी (Soil in Tulsi/Basil Farming)

तुलसी अच्छी जल निकासी वाली दोमट मिट्टी में अच्छी तरह से उगती है। मिट्टी का पीएच 6 से 8 के बीच होना चाहिए।

तुलसी की खेती में बीज (Seeds in Tulsi/Basil Farming)

तुलसी की खेती में बीज महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अच्छी गुणवत्ता वाले बीजों का उपयोग करने से अच्छी फसल प्राप्त होती है।

तुलसी की खेती में बीजों का चयन (Selection of Seeds in Tulsi/Basil Farming)

  1. बीजों को किसी ठंडी और सूखी जगह पर स्टोर करना चाहिए।
  2. बीजों को अच्छी तरह से सूखा होना चाहिए।
  3. बीजों का अंकुरण प्रतिशत 80% से कम नहीं होना चाहिए।

तुलसी की खेती में बुवाई (Sowing in Tulsi/Basil Farming)

तुलसी के बीजों को जून से जुलाई के महीने में बोया जाता है। बीजों को 1 सेंटीमीटर की गहराई और 10 सेंटीमीटर की दूरी पर बोया जाता है। तुलसी के बीजों को जून से जुलाई के महीने में बोया जाता है। बीजों को 1 सेंटीमीटर की गहराई और 10 सेंटीमीटर की दूरी पर बोया जाता है। बुवाई के बाद मिट्टी को हल्का-हल्का दबाएं और पानी दें।

  1. बीजों से तुलसी की खेती करना अपेक्षाकृत आसान है।
  2. बीजों से तुलसी की खेती कम लागत में की जा सकती है।
  3. बीजों से तुलसी की खेती में अच्छी गुणवत्ता वाली फसल प्राप्त होती है।

तुलसी की खेती में  सिंचाई (Irrigation in Tulsi/Basil Farming)

तुलसी को नियमित रूप से सिंचाई की आवश्यकता होती है। मिट्टी को हमेशा नम रखना चाहिए।

तुलसी की खेती में खाद (Fertilizer in Tulsi/Basil Farming)

तुलसी को अच्छी तरह से विकसित होने के लिए खाद की आवश्यकता होती है। खाद को दो बार, बुवाई के समय और एक महीने बाद डाला जाता है।

तुलसी की खेती में निराई-गुड़ाई (Weeding in Tulsi/Basil Farming)

तुलसी के पौधों के आसपास नियमित रूप से निराई-गुड़ाई करनी चाहिए। इससे खरपतवारों को हटाने में मदद मिलती है।

तुलसी की खेती में कीट और रोग (Pests and Diseases in Tulsi/Basil Farming)

तुलसी के पौधों पर कुछ कीट और रोगों का हमला हो सकता है। इनसे बचाव के लिए उचित उपाय किए जाने चाहिए।

तुलसी की खेती में कटाई (Harvesting in Tulsi/Basil Farming)

तुलसी की पत्तियों को बुवाई के 60 से 70 दिनों के बाद काटा जाता है। पत्तियों को सुखाकर बाजार में बेचा जाता है। एक बार कटाई शुरू होने के बाद हर हफ्ते आप पत्ती तोड़ सकते हो।

तुलसी की खेती में अधिक मुनाफा के लिए इन सुझावों को देखें। (Check Out These Tips for More Profits in Tulsi/Basil Farming)

  1. बीजों को बोने से पहले मिट्टी को अच्छी तरह से तैयार करें।
  2. बीजों को बोने के बाद मिट्टी को नम रखें।
  3. अच्छी गुणवत्ता वाले बीजों का उपयोग करें।
  4. अपनी मिट्टी का परीक्षण करवाएं।
  5. पौधों को नियमित रूप से पानी दें।
  6. खरपतवारों और कीटों को नियंत्रित करें।
  7. पत्तियों को सही समय पर काटें।

तुलसी की खेती करने वाले राज्य ( Tulsi/Basil Farming States )

तुलसी भारत में एक लोकप्रिय औषधीय पौधा है। इसकी खेती भारत के कई राज्यों में की जाती है।

तुलसी की खेती करने वाले प्रमुख राज्य निम्नलिखित हैं।

  1. उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh): उत्तर प्रदेश में तुलसी की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। यहां के मथुरा, वृंदावन, गोरखपुर और वाराणसी जैसे शहरों में तुलसी की खेती के लिए प्रसिद्ध हैं।
  2. मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh): मध्य प्रदेश में भी तुलसी की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। यहां के इंदौर, ग्वालियर और भोपाल जैसे शहरों में तुलसी की खेती के लिए प्रसिद्ध हैं।
  3. राजस्थान (Rajasthan): राजस्थान में भी तुलसी की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। यहां के उदयपुर, जयपुर और जोधपुर जैसे शहरों में तुलसी की खेती के लिए प्रसिद्ध हैं।
  4. गुजरात (Gujarat): गुजरात में भी तुलसी की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। यहां के अहमदाबाद, सूरत और राजकोट जैसे शहरों में तुलसी की खेती के लिए प्रसिद्ध हैं।

5.महाराष्ट्र (Maharashtra): महाराष्ट्र में भी तुलसी की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। यहां के मुंबई, पुणे और नागपुर जैसे शहरों में तुलसी की खेती के लिए प्रसिद्ध हैं।

इन राज्यों के अलावा, तुलसी की खेती बिहार (Bihar), झारखंड (Jharkhand), छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh), पश्चिम बंगाल (West Bengal), उड़ीसा (Orissa), आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh), तेलंगाना (Telangana), कर्नाटक (Karnataka), केरल (Kerala), तमिलनाडु (Tamil Nadu) और पंजाब (Punjab) जैसे राज्यों में भी की जाती है।

तुलसी की खेती में लागत और कमाई ( Cost and earning in Basil Farming )

तुलसी की खेती में लागत कई कारकों पर निर्भर करती है, जैसे कि:

  1. खेती का क्षेत्रफल: जितना अधिक क्षेत्रफल होगा, उतनी ही अधिक लागत होगी।
  2. बीजों की गुणवत्ता: अच्छी गुणवत्ता वाले बीजों की कीमत अधिक होती है।
  3. उर्वरकों की लागत: उर्वरक और कीटनाशकों की लागत मिट्टी की गुणवत्ता और कीटों के प्रकोप पर निर्भर करती है।
  4. सिंचाई की लागत: सिंचाई की लागत पानी की उपलब्धता और सिंचाई के तरीके पर निर्भर करती है।
  5. मजदूरी की लागत: मजदूरी की लागत क्षेत्र और मौसम पर निर्भर करती है।

औसतन, तुलसी की खेती में लागत लगभग ₹10,000 से ₹20,000 प्रति एकड़ तक होती है।

तुलसी की खेती में कमाई भी कई कारकों पर निर्भर करती है, जैसे कि:

  1. उत्पादन: जितना अधिक उत्पादन होगा, उतनी ही अधिक कमाई होगी।
  2. तुलसी की गुणवत्ता: अच्छी गुणवत्ता वाली तुलसी की कीमत अधिक होती है।
  3. बाजार का भाव: बाजार का भाव मांग और आपूर्ति पर निर्भर करता है।

औसतन, तुलसी की खेती से ₹50,000 से ₹1,00,000 प्रति एकड़ तक की कमाई हो सकती है।

आप शबला सेवा की मदद कैसे ले सकते हैं? ( How Can You Take Help of Shabla Seva? )

  1. आप हमारी विशेषज्ञ टीम से खेती के बारे में सभी प्रकार की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
  2. हमारे संस्थान के माध्यम से आप बोने के लिए उन्नत किस्म के बीज प्राप्त कर सकते हैं।
  3. आप हमसे टेलीफोन या सोशल मीडिया के माध्यम से भी जानकारी और सुझाव ले सकते हैं।
  4. फसल को कब और कितनी मात्रा में खाद, पानी देना चाहिए, इसकी भी जानकारी ले सकते हैं।
  5. बुवाई से लेकर कटाई तक, किसी भी प्रकार की समस्या उत्पन्न होने पर आप हमारी मदद ले सकते हैं।
  6. फसल कटने के बाद आप फसल को बाजार में बेचने में भी हमारी मदद ले सकते हैं।

संपर्क

अधिक जानकारी के लिए हमसे संपर्क करें +91 9335045599 ( शबला सेवा )

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