हल्दी का उपयोग, फायदा एवं हल्दी की खेती

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हल्दी का पारि‍वारि‍क नाम जि‍न्‍जि‍बरऐसे है। हल्दी को अंग्रेजी में Turmeric कहते है। हल्दी का लैटिन नाम करकुमा लौंगा ( Curcuma longa ) है। हल्दी भारतीय वनस्पति है। यह अदरक की प्रजाति का ५-६ फुट तक बढ़ने वाला पौधा है जिसमें जड़ की गाठों में हल्दी मिलती है। हल्दी को आयुर्वेद में प्राचीन काल से ही एक चमत्कारिक द्रव्य के रूप में मान्यता प्राप्त है। औषधि ग्रंथों में इसे हल्दी के अतिरिक्त हरिद्रा, कुरकुमा लौंगा, वरवर्णिनी, गौरी, क्रिमिघ्ना योशितप्रीया, हट्टविलासनी, हरदल, कुमकुम, टर्मरिक नाम दिए गए हैं। भारतीय रसोई में इसका महत्वपूर्ण स्थान है और धार्मिक रूप से इसको बहुत शुभ समझा जाता है। विवाह के एक दिन पूर्व वर और वधू दोनों के शरीर पर हल्दी का लेप करने की प्रथा है। आयुर्वेद में हल्‍दी को एक महत्‍वपूर्ण औषधि कहा गया है।

हल्दी में पाए जाने वाले पोषक तत्व ( Nutrients Found in Turmeric )

हल्दी में प्रोटीन ( Protein ), कार्बोहाइड्रेट ( Carbohydrates ), कैल्शियम ( Calcium ), फाइबर ( Fiber ), आयरन ( Iron ), कॉपर ( Copper ), जिंक ( Zink ), फास्फोरस ( Phosphorus ), जैसे मिनरल्स ( Minerals ) मौजूद होते हैं। हल्दी में विटामिन ( Vitamin ) B6, विटामिन C, विटामिन E, विटामिन K जैसे पोषक तत्व भी पाए जाते हैं।

हल्दी के स्वास्थवर्धक फायदे एवं उपयोग ( Health Benefits and Uses of Turmeric )

भारतीय मसालों में हल्दी का एक अलग ही महत्व है। आपको हर घर की रसोई में हल्दी ज़रूर मिलेगी। हल्दी खाने का स्वाद और रंग रूप तो बढ़ाती ही है साथ ही यह कई तरह के रोगों से भी रक्षा करती है। प्राचीन काल से ही हल्दी को जड़ी बूटी के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। हल्दी एक जड़ी-बूटी है। इसका इस्तेमाल मसालों के रुप में प्रमुखता से किया जाता है। हिंदू धर्म में पूजा में या कोई भी शुभ काम करते समय हल्दी का उपयोग किया जाता है। खाने के अलावा कई तरह की बीमारियों से बचाव में भी हल्दी का उपयोग होता है। इस समय पूरी दुनिया में हल्दी के गुणों पर रिसर्च चल रहे हैं और कई रिसर्च आयुर्वेद में बताए गुणों कि पुष्टि करते हैं।

1. हल्दी की तासीर गर्म होने की वजह से जुकाम में इसका सेवन करना फायदेमंद रहता है।

2. आंखों में दर्द होने पर या किसी तरह का संक्रमण होने पर हल्दी का प्रयोग करना फायदेमंद रहता है।

3. हल्दी का गुण पायरिया के लिए फायदेमंद होता है।

4. हल्दी के साथ  शहद या घी मिलाकर खाने से खांसी में आराम मिलता है।

5. पेट दर्द होने पर भी हल्दी का सेवन करने से दर्द से जल्दी आराम मिलता है।

6. हल्दी के सेवन करने से पीलिया में लाभ होता है।

7. स्तन से जुड़ी समस्याओं में भी हल्दी का उपयोग करना फायदेमंद रहता है।

8. हल्दी के प्रयोग से कुष्ठ रोग के प्रभाव को भी कुछ हद तक कम किया जा सकता है। 

9. खुजली, दाद के अलावा चर्म रोग में भी हल्दी का प्रयोग करने से फायदा होता है।

10. मुँहासों से छुटकारा पाने में भी हल्दी के फायदे देखे गए है।

11. हल्दी में रोपण एवं शोथहर गुण होने के कारण यह हर प्रकार के घाव को भरने एवं उसकी सूजन आदि को भी ठीक करने में सहयोगी होती है। 

12. हल्दी में उष्ण गुण होने के कारण यह पाचकाग्नि को ठीक कर पाचन तंत्र को मजबूत बनाने में मदद करती है, जिससे मुँह के छालों में आराम मिलता है 

13. हल्दी में कफ को संतुलित करने का गुण होता है जिसके कारण यह हर प्रकार की खांसी में लाभदायक होती है।  

14. हल्दी पाचक एवं कृमिघ्न गुण होने के कारण यह पेट के कीड़ों से भी राहत दिलाती है।  

15. हल्दी में उष्ण गुण होने के कारण यह पाचकाग्नि को बढ़ा कर पाचन तंत्र को स्वस्थ करने में मदद करती है, जिससे गैस की समस्या से छुटकारा मिलता है।  

16. हल्दी में पाचक और शोथहर होने के साथ इसमें रोपण (हीलिंग) का भी  गुण होने के कारण ये पेट के अल्सर से छुटकारा दिलाती है। 

17. हल्दी में एंटीकैंसर गुण पाए जाने कारण यह कैंसर जैसी गंभीर समस्याओं में भी लाभदायक साबित होती है। 

18. हल्दी का सेवन इम्यूनिटी बढ़ाने में मदद करता है।

19. हल्दी अपने आप में कई गुणों से भरपूर है और जब आप इसका सेवन दूध में मिलाकर करते हैं तो इसके फायदे कई गुना बढ़ जाते हैं।

20. फेफड़ों के रोगों में हल्दी का सेवन फायदेमंद होता है जैसे अस्थमा की समस्या।  

21. इसमें कैंसर से बचाव के गुण पाए जाते हैं।

22. यह किडनी और लीवर को भी कई खतरों से बचाने के लिए जाना जाता है।

23. इसका कार्डियो प्रोटेक्टिव गुण हृदय को सुरक्षित रखता है।

हल्दी की खेती ( Turmeric Cultivation )

आयुर्वेद में हल्‍दी को एक महत्‍वपूर्ण औषधि कहा गया है।

हल्दी की खेती में मिटटी, तापमान एवं जलवायु ( Soil, Temperature and Climate in Turmeric Cultivation )

सभी प्रकार की मिट्टी में किया जा सकता है। इसकी खेती के लिए अधिक जीवांश वाली दोमट, जलोढ़ और लैटेराइट मिट्टी सबसे अच्छी मानी जाती है। मिट्टी का पी.एच. मान 5 से 7.5 के मध्य होना चाहिए। हल्दी एक उष्णकटिबंधीय जलवायु में खेती की जाने वाली फसल है। अच्छी बारिश वाले गर्म और आर्द्र क्षेत्र इसके उत्पादन के लिए उपयुक्त होते हैं।

हल्दी की बुवाई एवं खेती की तैयारी ( Preparation and Sowing for Cultivation of Turmeric )

हल्दी की बुआई अप्रैल से जुलाई के महीने में करने से फसल अच्छी होती है। खेतों में जल जमाव नहीं हो। खेत तैयार करने के लिए 2 बार मिट्टी पलटने वाले हल से और 3 से 4 बार देशी हल या कल्टीवेटर से जुताई करें। हल्दी की बुआई समतल खेत और मेड़ दोनों ही प्रकार से की जा सकती है। सभी पक्तियों के बीच की दूरी 30 सेंटीमीटर रखें। कंद के बीच की दूरी 20 सेंटीमीटर रखें। कंंद की बुआई 5 से 6 सेंटीमीटर की गहराई पर करें। खेत तैयार करने के लिए 2 बार मिट्टी पलटने वाले हल से और 3 से 4 बार देशी हल या कल्टीवेटर से जुताई करें। हल्दी की बुआई समतल खेत और मेड़ दोनों ही प्रकार से की जा सकती है। सभी पक्तियों के बीच की दूरी 30 सेंटीमीटर रखें। कंद के बीच की दूरी 20 सेंटीमीटर रखें। कंंद की बुआई 5 से 6 सेंटीमीटर की गहराई पर करें।

हल्दी की उन्नत किस्में ( Improved Varieties of Turmeric )

लकाडोंग हल्दी, अल्लेप्पी हल्दी, मद्रास हल्दी, इरोड हल्दी, सांगली हल्दी

हल्दी की खेती में बीज की मात्रा एवं बीज उपचार ( Seed Quantity and Seed Treatment in Turmeric Cultivation )

8 से 10 क्विंटल प्रति एकड़ की दर से बीज की आवश्यकता है। मिश्रित फसल में 4 से 6 क्विंटल प्रति एकड़ बीज पर्याप्त होते हैं। बुआई के लिए 7 से 8 सेंटीमीटर लंबाई वाले कंद का चुनाव करें। कंद पर कम से कम दो आंखे होनी चाहिए। 2.5 ग्राम थीरम या मैंकोजेब प्रति लीटर पानी में मिलाकर घोल तैयार करें। इस घोल में कंद को 30 से 35 मिनट तक भिगोकर रखें। बीज उपचार के बाद कंद को छांव में सूखा कर ही बुआई करें।

हल्दी की खेती में सिंचाई एवं खाद उर्वरक ( Irrigation and Manure Fertilizer in Turmeric Cultivation )

खेत में जल निकासी की व्यवस्था रखें। ठंड के मौसम 12 – 15 दिनों के अंतराल में सिंचाई करें। वर्षा के मौसम में केवल जरूरत पड़ने पर ही सिंचाई करें। हल्दी की फसल में हल्की सिंचाई की आवश्यकता होती है। गर्मी के मौसम में 6 दिनों के अंतराल में सिंचाई करें। हल्दी की बेहतर फसल के लिए आप प्रति एकड़ जमीन में 10 से 12 टन गोबर की सड़ी हुई खाद मिला सकते हैं। खेत की जुताई से पहले खेत में गोबर खाद मिला देना चाहिए। आप गोबर खाद की जगह कम्पोस्ट खाद का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। प्रति एकड़ जमीन में 45 से 50 किलोग्राम नाइट्रोजन  का छिड़काव करना चाहिए। खेत की आखिरी जुताई के समय 45 से 50 किलोग्राम नत्रजन की आधी मात्रा मिला कर जुताई करें। बचे हुए नत्रजन (करीब 20 से 24 किलोग्राम) को दो भागों में बांट लें। इसमें से 10 से 12 किलोग्राम नाइट्रोजन को बुआई के 45 से 60 दिनों बाद खेत में डालें। 

हल्दी की खेती किन किन राज्यों में होती है ( In which States Turmeric is Cultivated )

भारत पूरी दुनिया में हल्दी का सबसे बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता है। भारत में हल्दी की खेती मुख्यत: केरल, उडीसा, आसाम, उत्तर प्रदेश, पश्चिमी बंगाल, आंध्रप्रदेश, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश तथा उत्तराँचल प्रदेशों में व्यवसायिक फसल के रूप में की जाती है।

हल्दी की खेती में लागत एवं कमाई ( Cost and Earning in Turmeric Cultivation )

1 हेक्टेयर में हल्दी की खेती में आपकी लगभग 1 लाख रुपये की लागत आ जाएगी। आसानी से आपको 80-100 रुपये प्रति किलो का भाव मिल जाएगा। यानी आपकी हल्दी 3 लाख रुपये तक की बिकेगी। इस तरह आपको हल्दी की खेती से सिर्फ 8 महीने में ही दोगुने से तीन गुने तक का मुनाफा होगा।

 

आप शबला सेवा की मदद कैसे ले सकते हैं? ( How Can You Take Help of Shabla Seva? )

  1. आप हमारी विशेषज्ञ टीम से खेती के बारे में सभी प्रकार की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
  2. हमारे संस्थान के माध्यम से आप बोने के लिए उन्नत किस्म के बीज प्राप्त कर सकते हैं।
  3. आप हमसे टेलीफोन या सोशल मीडिया के माध्यम से भी जानकारी और सुझाव ले सकते हैं।
  4. फसल को कब और कितनी मात्रा में खाद, पानी देना चाहिए, इसकी भी जानकारी ले सकते हैं।
  5. बुवाई से लेकर कटाई तक, किसी भी प्रकार की समस्या उत्पन्न होने पर आप हमारी मदद ले सकते हैं।
  6. फसल कटने के बाद आप फसल को बाजार में बेचने में भी हमारी मदद ले सकते हैं।

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अधिक जानकारी के लिए हमसे संपर्क करें +91 9335045599 ( शबला सेवा )

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