जिंक और औषधीय गुणों से भरपूर है डीआरआर-45 धान

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बाबूबरही प्रखंड (बिहार) में बसा है गांव छौरही। इस गांव के किसान डीआरआर धान 45 की जैविक विधि से खेती कर रहे हैं। शबला सेवा संस्थान गोरखपुर के सहयोग से यह खेती की जा रही है। इस धान के चावल में अन्य सामान्य चावल की तुलना में अधिक पोषक तत्त्व और औषधीय गुणों से भरपूर होता है।

यह धान की खेती से देश में कुपोषण दूर करने में मील का पत्थर साबित होगा। डीआरआर धान 45 में अन्य पोषक तत्त्व के अलावा भरपूर मात्रा में जिंक है। जो गर्भवती माता और प्रसव के बाद माताओं के लिए अधिक लाभदायक है। इस धान के चावल में अधिक मात्रा में जिंक है। यह धान हमारे राज्य में ही नहीं बल्कि देश में कुपोषण दूर करने में सहायक होगा। युवा किसान अविनाश जी बताते हैं कि अब धान करीब-करीब पक चुका है। कुछ दिनों में इसकी कटनी हो जाएगी। अगले वर्ष इस धान के बीज से अधिक से अधिक क्षेत्रफल में खेती करेंगे। साथ ही डीआरआर 45 धान का पुआल और अवशेष दूधारू पशु के लिए भी लाभदायक है। इस धान के पुआल को दुधारू पशु को खिलाने से दूध की मात्रा में बढ़ोतरी होती है। दुधारू पशु को अलग से जिंक का मात्रा नहीं देना होता है।

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डीआरआर 45 धान केन्द्रीय धान अनुसंधान केंद्र हैदराबाद की खोज है। इस धान की पैदावार प्रति एक एकड़ करीब 17 क्विंटल होता है। इसकी खेती करने में अधिक पानी की जरूरत नहीं होता है। इस धान की खेती किसान के लिए वरदान साबित हो सकती है। उनकी सहयोगी किरण यादव का कहना है कि इस धान की खेती कुपोषण दूर करने में सहायक है। साथ ही किसान अविनाश जी ने कहा कि वे निःशुल्क किसान भाइयों में इस धान के बीज का वितरण करेंगे। ताकि अपने जिले में इस धान की अधिकाधिक खेती हो सके।

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